भारतीय सेना ने मंगलवार को अपाचे हेलीकॉप्टर्स का पहला बैच शामिल कर लिया.
भारतीय सेना ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है, "अपाचे हेलीकॉप्टर्स का पहला बैच आज भारत पहुंच गया है. यह भारतीय सेना के लिए एक "मील का पत्थर" है. इसके आने से भारतीय सेना की परिचालन क्षमताओं में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी."
बोइंग कंपनी ने जनवरी, 1984 में अमरीकी फ़ौज को पहला अपाचे हेलीकॉप्टर दिया था. तब इस मॉडल का नाम था AH-64A.
तब से लेकर अब तक बोइंग 2,200 से ज़्यादा अपाचे हेलीकॉप्टर बेच चुकी है.
भारत से पहले इस कंपनी ने अमरीकी फ़ौज के ज़रिए मिस्र, यूनान, भारत, इंडोनेशिया, इसराइल, जापान, क़ुवैत, नीदरलैंड्स, क़तर, सऊदी अरब और सिंगापुर को अपाचे हेलीकॉप्टर बेचे हैं.
इसे दो पायलट मिलकर इसे उड़ाते हैं. मुख्य पायलट पीछे बैठता है. उसकी सीट थोड़ी ऊंची होती है. वो हेलीकॉप्टर को कंट्रोल करता है. आगे बैठा, दूसरा पायलट निशाना लगाता है और फ़ायर करता है.
'अपाचे' में ख़ास क्या है ?
क़रीब 16 फ़ुट ऊंचे और 18 फ़ुट चौड़े अपाचे हेलीकॉप्टर को उड़ाने के लिए दो पायलट होना ज़रूरी है.
अपाचे हेलीकॉप्टर के बड़े विंग को चलाने के लिए दो इंजन होते हैं. इस वजह से इसकी रफ़्तार बहुत ज़्यादा है.
अधिकतम रफ़्तार: 280 किलोमीटर प्रति घंटा.
अपाचे हेलीकॉप्टर का डिज़ाइन ऐसा है कि इसे रडार पर पकड़ना मुश्किल होता है.
बोइंग के अनुसार, बोइंग और अमरीकी फ़ौज के बीच स्पष्ट अनुबंध है कि कंपनी इसके रखरखाव के लिए हमेशा सेवाएं तो देगी पर ये मुफ़्त नहीं होंगी.
सबसे ख़तरनाक हथियार: एक साथ 16 एंटी टैंक मिसाइल छोड़ने की क्षमता.
हेलीकॉप्टर के नीचे लगी राइफ़ल में एक बार में 30एमएम की 1,200 गोलियाँ भरी जा सकती हैं.
फ़्लाइंग रेंज: क़रीब 550 किलोमीटर
ये एक बार में पौने तीन घंटे तक उड़ सकता है.
(इनपुट: बोइंग कंपनी की वेबसाइट से)