बेंगलुरु के कई इलाकों में भारी बारिश की वजह से पानी भर गया है. कहा जा रहा है कि पिछले 15 सालों में यह दूसरी बार है जब यहां इतनी बारिश हुई है.
हालांकि अभी तक किसी के भी हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन कल रातभर हुई भारी बारिश (10 सेंटीमीटर) ने उन इलाकों को सबसे ज़्यादा प्रभावित किया है जो पहले से ही जलभराव के लिए जाने जाते हैं.
बच्चों और बुज़ुर्गों सहित कई परिवारों को दमकल विभाग के कर्मचारियों ने नावों और ट्रैक्टरों की मदद से सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया. यह राहत कार्य दोपहर तक जारी रहा.
यह बारिश प्री-मानसून की है और इससे शहर के ऐसे इलाके भी डूब गए है जिन्हें आमतौर पर साफ-सुथरा और बेहतर माना जाता है, जैसे बस स्टॉप और मुख्य सड़कें.
बेंगलुरु में मौसम विभाग की वैज्ञानिक लता श्रीधर ने बीबीसी हिंदी को बताया, "शहर में पिछले 24 घंटों में 10 सेंटीमीटर (112.5 मिमी) बारिश हुई. इससे पहले इतनी भारी बारिश 18 मई 2022 को (114.6 मिमी) दर्ज की गई थी. अब तक प्री-मानसून की सबसे ज़्यादा बारिश 15 सेंटीमीटर रही है."
इस बारिश में सबसे ज़्यादा नुकसान साई लेआउट को हुआ है, जो झील की जमीन पर बसा है और पहले से ही जलभराव के लिए जाना जाता है.
रविवार को जब ब्रुहत बेंगलुरु महानगर पालिके (बीबीएमपी) के नव नियुक्त आयुक्त महेश्वर राव इस लेआउट का दौरा करने पहुंचे, तो वहां के निवासियों ने उनसे सवाल भी किए.
कर्नाटक के शहरी विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव तुषार गिरिनाथ ने बीबीसी हिंदी को बताया, "समस्या यह है कि पास में जो एक स्टॉर्म वॉटर ड्रेन है, वह ऊंचाई पर है. उसके नीचे एक संकरा रेलवे वेंट है जिससे पानी बहता है. अब हम एक और रेलवे वेंट बना रहे हैं ताकि आसानी से पानी निकल सके. लेकिन इसके लिए रेलवे की अनुमति का इंतजार है और इसे पूरा करने में दो महीने लग सकते हैं. हमारा लक्ष्य है कि 31 अगस्त तक काम पूरा हो जाए."
तुषार गिरिनाथ ने दो हफ़्ते पहले बीबीएमपी के मुख्य आयुक्त का कार्यभार महेश्वर राव को सौंपा था.
गिरिनाथ ने कहा, "शहर के अन्य हिस्सों में जलभराव की समस्या इसलिए हो रही है क्योंकि ड्रेनेज आउटलेट्स पर ठोस कचरे का ढेर जमा हो गया है."