यूक्रेन के पोलतावा पर हुए रूसी मिसाइल हमले में 51 लोगों की हुई मौत

यूक्रेन के पोलतावा पर हुए रूसी मिसाइल हमले में अभी तक 51 लोगों की मौत हो गई है.

सारांश

  • सुमित अंतिल ने फिर किया कमाल, टोक्यो के बाद पेरिस पैरालंपिक में भी जीता गोल्ड मेडल
  • इसराइली पीएम नेतन्याहू ने छह बंधकों की मौत को लेकर मांगी माफी, ग़ज़ा के रफाह में मिले थे शव
  • नित्या श्री सिवन ने पेरिस पैरालंपिक में जीता ब्रॉन्ज़ मेडल, पीएम मोदी ने दी बधाई
  • अमेरिका ने वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति मादुरो का विमान ज़ब्त किया
  • पश्चिम बंगाल विधानसभा में एंटी रेप बिल सर्वसम्मति से पास हो गया

लाइव कवरेज

शिल्पा ठाकुर

  1. अभिषेक बनर्जी ने अपनी पार्टी के लोगों से कहा- ऐसा बिल्कुल ना बोलें

    अभिषेक बनर्जी

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    इमेज कैप्शन, अभिषेक बनर्जी ने नेताओं को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सलाह दी है

    टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने सोमवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर राजनीतिक दलों के नेताओं को सलाह दी है. उन्होंने कहा कि जनता के प्रतिनिधियों को प्रदर्शनकारियों के बारे में ग़लत नहीं बोलना चाहिए.

    अभिषेक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे भी हैं. अभिषेक ने ख़ास कर अपनी पार्टी के लोगों से आग्रह किया है कि वे मेडिकल कर्मियों और सिविल सोसाइटी के बारे में कुछ भी ग़लत टिप्पणी ना करें.''

    उन्होंने पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल को टैग कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट लिखा है.

    अभिषेक बनर्जी ने लिखा, "सभी दलों के जनता के प्रतिनिधियों को अधिक विनम्र होने की ज़रूरत है. मैं टीएमसी में सभी से आग्रह करता हूं कि मेडिकल क्षेत्र और समाज से जुड़े लोगों के बारे में ग़लत ना बोलें. सभी को प्रदर्शन करने और अपनी बात कहने का अधिकार है."

    उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, "यही बात पश्चिम बंगाल को अन्य बीजेपी शासित राज्यों से अलग बनाती है. हमने राजनीति के बुलडोज़र मॉडल और उत्पीड़न की रणनीति के ख़िलाफ़ दिल से लड़ाई की है. ऐसी भयावह घटनाएं दोबारा ना हों, इसके लिए अब ज़रूरी कदम उठाने का वक़्त आ गया है."

    अभिषेक बनर्जी ने एक्स पर लिखा, "बंगाल को इस लड़ाई में एकजुट होना चाहिए और तब तक नहीं रुकना चाहिए, जब तक राज्य और केंद्र सरकारें समयबद्ध तरीके से अपराधियों को सज़ा दिलाने वाले बलात्कार से जुड़े कानून नहीं बना देतीं."

    पश्चिम बंगाल में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक महिला डॉक्टर की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी. जिसके ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

    वहीं टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने एक टीवी चैनल पर चल रहे डिबेट में मेडिकल छात्रों को लेकर विवादित टिप्पणी की थी.

    इसकी मेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी खूब आलोचना की. इस पर काकोली घोष ने रविवार को एक्स पर पोस्ट कर माफी मांगी है.

  2. जातिगत जनगणना पर आरएसएस के बयान को लेकर क्या बोले लालू प्रसाद यादव?

    लालू प्रसाद यादव

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    इमेज कैप्शन, लालू प्रसाद यादव ने जातिगत जनगणना पर आरएसएस के बयान को लेकर प्रतिक्रिया दी

    जातिगत जनगणना को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक बयान पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी (राष्ट्रीय जनता दल) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने प्रतिक्रिया दी है.

    उन्होंने मंगलवार को एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "इन आरएसएस और बीजेपी वालों का कान पकड़कर, दंड बैठक कराके इनसे जातिगण जनगणना कराएंगे. इनकी क्या औकात है, जो जातिगत जनगणना नहीं कराएंगे."

    लालू प्रसाद यादव ने अपनी पोस्ट में लिखा, "इन्हें इतना मजबूर करेंगे कि जातिगत जनगणना करनी ही पड़ेगी. दलित, पिछड़े, आदिवासी और ग़रीब की एकता दिखाने का समय अब आ गया है."

    हालांकि लालू प्रसाद यादव ने जाति जनगणना पर जिस पोस्ट को शेयर करते हुए प्रतिक्रिया दी है वो बात आरएसएस ने नहीं कही है. आरएसएस ने कहा है कि लालू यादव उस बात पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जो आरएसएस ने कही ही नहीं है.

    आरएसएस ने क्या कहा था?

    आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने केरल में जातिगत जनगणना पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा था कि ये एक संवेदनशील मुद्दा है.

    सुनील आंबेकर ने कहा, "इस मामले में आरएसएस टिप्पणी कर चुका है. हमारे हिंदू समाज में जाति और जातीय संबंध एक संवेदनशील मुद्दा है. ये राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है. इससे गंभीरता से निपटा जाना चाहिए, ना कि केवल चुनाव या राजनीति के लिए."

    उन्होंने कहा कि आरएसएस ऐसा मानना है कि कल्याणकारी योजनाओं के लिए उन जातियों पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है, जो पिछड़ रही हैं. ऐसे में अगर सरकार को संख्या की ज़रूरत पड़ती है, तो वो उसे (संख्या) ले सकती है. ऐसा सरकार ने पहले भी किया है.

    उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना का इस्तेमाल पिछड़ रहे समुदाय और जातियों के कल्याण के लिए होना चाहिए. आंबेकर ने कहा, "इसका इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए एक राजनीतिक उपकरण के रूप में नहीं होना चाहिए."

    इस मामले में अन्य राजनीतिक पार्टियों की भी प्रतिक्रिया आई है.

    कांग्रेस ने क्या कहा?

    कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी इस मामले में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है.

    उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना को लेकर आरएसएस ने जो कहा उससे कुछ बुनियादी सवाल उठते हैं.

    उन्होंने लिखा, "क्या आरएसएस के पास जातिगत जनगणना का निषेधाधिकार है? आरएसएस जातिगत जनगणना पर इजाज़त देने वाला कौन होता है?"

  3. पीएम मोदी ब्रूनेई और सिंगापुर के लिए हुए रवाना

    पीएम नरेंद्र मोदी

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    इमेज कैप्शन, पीएम मोदी आज से ब्रूनेई दारुस्सलाम और सिंगापुर की यात्रा पर हैं

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को ब्रूनेई और सिंगापुर के तीन दिवसीय दौरे पर रवाना हो गए.

    पीएम मोदी को ब्रूनेई के सुल्तान हाजी हसनल बोल्किया ने न्योता दिया था.

    ब्रूनेई के बाद पीएम मोदी सिंगापुर रवाना होंगे. यह दौरा 4-5 सितंबर के बीच होगा.

    पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा, "अगले दो दिन ब्रूनेई और सिंगापुर की यात्रा करूंगा. भारत के साथ रिश्ते मज़बूत करने पर ध्यान केंद्रित होगा. भारत और ब्रूनेई के राजनयिक संबंध कायम होने के 40 साल पूरे हो गए हैं. सुल्तान हाजी बोल्किया से मुलाकात करूंगा."

    पीएम मोदी ने लिखा, "सिंगापुर में मैं राष्ट्रपति थर्मन शनमुगरत्नम, प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग, वरिष्ठ मंत्रियों ली सीन यूंग और गोह चोक टोंग से बातचीत करूंगा."

    पीएम मोदी की यात्रा कितनी अहम?

    पीएम मोदी की ब्रूनेई यात्रा रक्षा साझेदारी के लिए अहम है. दोनों देश इस क्षेत्र में सहयोग के लिए एक जॉइंट वर्किंग ग्रुप बनाना चाहते हैं.

    भारत और ब्रूनेई के ऊर्जा क्षेत्र और अंतरिक्ष क्षेत्र में भी सहयोग का विस्तार करने की उम्मीद है.

    भारत और ब्रूनेई के राजनयिक संबंध साल 1984 में स्थापित हुए थे और इस साल संबंधों को 40 साल पूरे हो गए हैं.

    वर्तमान में क़रीब 14 हज़ार भारतीय ब्रूनेई में रहते हैं. ब्रूनेई में बड़ी संख्या में रह रहे डॉक्टर और शिक्षक भारत से हैं.

  4. बुलडोज़र चलाने पर सुप्रीम कोर्ट की सख़्त टिप्पणी, क्या बोलीं मायावती

    बसपा प्रमुख मायवती

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    इमेज कैप्शन, मायावती ने बुलडोज़र चलाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को लेकर प्रतिक्रिया दी

    देश के कई राज्यों में अलग-अलग मामलों के अभियुक्तों की संपत्तियों पर बुलडोज़र चलाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सख़्त टिप्पणी की थी.

    सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को लेकर भारत की कई राजनीतिक पार्टियों की प्रतिक्रिया आई है.

    इस मामले में उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा (बहुजन समाज पार्टी) प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी है.

    उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा, "देश में आपराधिक तत्वों के ख़िलाफ़ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए. उनके अपराध की सज़ा उनके परिवार और नज़दीकी लोगों को नहीं मिलनी चाहिए."

    उन्होंने कहा, "अब बुलडोज़र का इस्तेमाल सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फ़ैसले के मुताबिक होना चाहिए. बेहतर यही होगा कि इसके इस्तेमाल की ज़रूरत ही ना पड़े क्योंकि आपराधिक तत्वों से सख़्त कानून के ज़रिए निपटा जा सकता है. "

    मायावती ने कहा कि सभी सरकारें इस ओर ज़रूर ध्यान दें.

    उन्होंने कहा, "बुलडोज़र के इस्तेमाल के बजाय उन संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए जो ऐसे तत्वों के साथ मिलकर पीड़ितों को सही न्याय नहीं देते."

    इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को स्वागत योग्य बताया था.

    राहुल ने कहा था, "बुलडोज़र के नीचे मानवता और इंसाफ को कुचलने वाली भाजपा का संविधान विरोधी चेहरा अब बेनक़ाब हो चुका है."

    राहुल ने कहा कि "तुरंत न्याय के चक्कर" में "भय का राज स्थापित" करने की मंशा से चलाए जा रहे बुलडोज़र के नीचे अक्सर बहुजन और ग़रीबों की ही घर-गृहस्थी आती है.

    सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

    सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथ की बेंच ने कहा था कि किसी का घर केवल इसलिए कैसे ध्वस्त किया जा सकता है, क्योंकि वह अभियुक्त है.

    बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दिशा निर्देश तय करेगा ताकी जब भी तोड़फोड़ की कार्रवाई की ज़रूरत पड़े, तो वो उसी आधार पर की जाए.

  5. बीजेपी विधायक नितेश राणे ने मुसलमानों पर की विवादित टिप्पणी, क्या बोली बीजेपी

    बीजेपी विधायक नितेश राणे

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    इमेज कैप्शन, बीजेपी विधायक नितेश राणे ने एक कार्यक्रम में विवादित टिप्पणी की है

    महाराष्ट्र से बीजेपी (भारतीय जनता पार्टी) के विधायक नितेश राणे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसमें वो मुसलमानों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करते नज़र आ रहे हैं.

    उनके इस वीडियो को एआईएमआईएम (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने भी एक्स पर शेयर किया.

    वारिस पठान ने आरोप लगाया कि नितेश राणे अपने पूरे भाषण में मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रत फैला रहे हैं. उन्होंने इसे भड़काऊ भाषण बताया.

    बीजेपी ने क्या कहा?

    इस मामले में बीजेपी की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई है. बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने एक चैनल से बातचीत में कहा कि वो नितेश राणे के कहे शब्दों की निंदा करते हैं.

    तुहिन सिन्हा ने कहा, "मैं उनके कहे शब्दों की निंदा करता हूं. ऐसे शब्दों का सार्वजनिक जीवन में कोई स्थान नहीं है. किसी भी राजनेता को ऐसे शब्द नहीं कहने चाहिए. जहां तक मुझे पता है उनके ख़िलाफ़ दो एफ़आईआर दर्ज हो चुकी हैं."

    नितेश राणे क्या बोले?

    नितेश राणे ने अपने विवादित बयान को लेकर एएनआई से कहा, "वो (दूसरे समुदाय के लोग) बोल सकते हैं लेकिन हम इसी भाषा के साथ हिंदू समुदाय के समर्थन में उतरें, तो हमसे क्यों सवाल किया जाता है? पुलिस और संविधान को अपना काम करने दीजिए."

    उन्होंने कहा, "हिंदू समुदाय के लोगों को क्यों धमकाया जाता है? कल दिया गया बयान (जिस बयान पर विवाद हो रहा है) एक्शन का रिएक्शन था. कल मैंने अपना बयान एक हिंदू होने के नाते दिया. इस आधार पर दिया कि हिंदू समाज को डरने की ज़रूरत नहीं है."

  6. इसराइली पीएम को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने की यह टिप्पणी

    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन

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    इमेज कैप्शन, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इसराइली पीएम को लेकर टिप्पणी की

    अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के लिए कहा कि वो बंधकों की रिहाई के लिए हमास के साथ समझौते और युद्धविराम के लिए पर्याप्त कोशिश नहीं कर रहे हैं.

    बाइडन ने ये बात ऐसे वक़्त पर कही है, जब ऐसी रिपोर्ट्स आ रही हैं कि अमेरिका की तरफ़ से इसराइली पीएम को एक और नया "अंतिम" प्रस्ताव भेजा जा सकता है.

    राष्ट्रपति बाइडन और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने इस नए प्रस्ताव के संबंध में वार्ताकारों से मुलाक़ात की.

    ये सब ऐसे वक़्त पर हो रहा है, जब सोमवार को भी इसराइल में सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन जारी रहे.

    प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नेतन्याहू सरकार बंधकों की रिहाई के लिए हमास के साथ समझौता करने के लिए कुछ ख़ास कोशिश नहीं कर रही है.

    बीते साल सात अक्टूबर को इसराइल पर हमला करने के बाद सैकड़ों की संख्या में लोगों को बंधक बनाकर ग़ज़ा ले जाया गया था. इनमें से छह के शव बीते शनिवार को ग़ज़ा के रफाह की एक सुरंग में मिले हैं.

    जब बाइडन से पूछा गया कि क्या नेतन्याहू पर्याप्त कोशिशें कर रहे हैं, तो इस पर उन्होंने जवाब दिया "नहीं."

    उन्होंने कहा कि अमेरिका हार नहीं मानेगा और समझौते तक पहुंचने के लिए अपनी तरफ़ से ज़ोर लगाता रहेगा.

  7. नमस्कार

    बीबीसी हिंदी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता शिल्पा ठाकुर आप सभी तक आज की बड़ी ख़बरें पहुंचाऊंगी.

    आप बीबीसी हिंदी के पेज पर मौजूद बड़ी ख़बरों को इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं.

    देश के कई राज्यों में अलग-अलग मामलों के अभियुक्तों की संपत्ति पर 'बुलडोज़र चलाने के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सख़्त टिप्पणी की. जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथ की पीठ ने कहा कि किसी का घर सिर्फ़ इसलिए कैसे ध्वस्त किया जा सकता है कि वह अभियुक्त है. पूरी ख़बर पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें.

    वेटिकन में एक ऐसा दस्तावेज़ है, जिसे बहुत कम लोगों ने देखा है. इसकी एक प्रति बीजिंग में भी है. यह एक गुप्त संधि है जिस पर 2018 में हस्ताक्षर किए गए थे. इसे चीन और कैथोलिक चर्च के बीच अस्थायी समझौता क़रार दिया गया था. तो आखिर चीन और कैथोलिक चर्च के बीच हुआ ये अस्थायी समझौता क्या है? पूरी ख़बर पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें.

    इसराइल में अरसे से प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के ख़िलाफ़ प्रदर्शन होते रहे हैं लेकिन जब इसराइल डिफ़ेंस फ़ोर्स (आईडीएफ़) ने बताया कि उसे शनिवार को दक्षिणी ग़ज़ा के रफाह में एक सुरंग में छह बंधकों के शव मिले हैं तब से प्रदर्शन और तेज़ हो गए हैं. पूरी ख़बर पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें.

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