पाकिस्तान के कराची शहर में बारिश के कारण हुए हादसों में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई.
लाइव कवरेज
आनंद मणि त्रिपाठी और अभय कुमार सिंह
इसराइल ने ग़ज़ा सिटी पर ज़मीनी हमले से पहले 60 हज़ार आरक्षित सैनिकों को बुलाया, डेविड ग्रिटेन, बीबीसी न्यूज़
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इसराइली सेना ने कहा है कि वह ग़ज़ा सिटी पर कब्ज़ा करने और उसे पूरी तरह अपने नियंत्रण में लेने के लिए ज़मीनी हमले से पहले लगभग 60 हज़ार आरक्षित सैनिकों को ड्यूटी पर बुला रही है.
एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि ये आरक्षित सैनिक सितंबर में रिपोर्ट करेंगे.
अधिकारियों ने यह भी कहा कि ज़ैतून और जबालिया इलाक़ों में पहले से ही सैनिक तैनात हैं, ताकि इस योजना की पूरी तैयारी की जा सके. इस योजना को इसराइल के रक्षा मंत्री ने मंगलवार को मंज़ूरी दी और इस हफ़्ते इसे सिक्योरिटी कैबिनेट में रखा जाएगा.
ऐसा अनुमान है कि ग़ज़ा सिटी में रहने वाले लाखों फ़लस्तीनियों को निकालकर दक्षिण ग़ज़ा में बने शरण स्थलों पर जाने का आदेश दिया जाएगा.
इसराइल की इस योजना की कई सहयोगी देशों ने आलोचना की है. संयुक्त राष्ट्र और ग़ैर-सरकारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि एक और हमला बड़े पैमाने पर विस्थापन पैदा करेगा.
अहमदाबाद: स्कूल में छात्र की मौत के बाद हंगामा, अभिभावकों ने किया प्रदर्शन, तेजस वैद्य, बीबीसी संवाददाता
इमेज कैप्शन, अहमदाबाद में स्कूल के बाहर प्रदर्शन
अहमदाबाद के खोखरा इलाके में स्थित सेवेंथ डे स्कूल में 10वीं कक्षा के एक छात्र की मौत के बाद बुधवार सुबह भारी हंगामा हुआ. अभिभावक बड़ी संख्या में स्कूल पहुंचे, विरोध प्रदर्शन किया और तोड़फोड़ भी की.
मंगलवार को इसी स्कूल के एक छात्र ने दूसरे छात्र पर धारदार हथियार से हमला कर दिया था. घायल छात्र की इलाज के दौरान मौत हो गई. इसके बाद गुस्साए अभिभावक बुधवार सुबह स्कूल पहुंचे और जमकर नारेबाज़ी की.
इस दौरान पुलिस और अभिभावकों के बीच झड़प भी हुई. कुछ लोगों ने स्कूल कार्यालय में घुसकर सामान को नुकसान पहुंचाया.
स्कूल प्रशासन की ओर से प्रशासनिक अधिकारी मयूरीकाबेन पटेल ने बताया, "बच्चे स्कूल से बाहर जा रहे थे तभी पास की गली में एक छात्र पर हमला हुआ. हमें जानकारी मिली तो तुरंत एम्बुलेंस बुलाई गई, लेकिन ट्रैफ़िक के कारण एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुंच सकी. इसलिए हम बिना इंतजार किए बच्चे को रिक्शे से अस्पताल ले गए."
इस घटना के बाद सवाल उठा कि छात्र स्कूल में धारदार हथियार कैसे लाया. इस पर पटेल ने कहा, "ऐसा नहीं लगता कि छात्र हथियार बैग में लेकर आया था. संभव है कि उसने इसे बाहर अपनी कार में रखा हो."
पुलिस का कहना है कि मुख्य अभियुक्त समेत दो लोगों को हिरासत में लिया गया है.
अहमदाबाद के संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) शरद सिंघल ने बताया, "सुबह अभिभावकों ने मांग की थी कि इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी जाए, जिसे पुलिस कमिश्नर ने स्वीकार कर लिया है. अब जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है."
स्कूल पर लगे आरोपों के बारे में उन्होंने कहा, "आरोप है कि मंगलवार की घटना के बाद पानी का टैंकर बुलाकर सबूत नष्ट करने की कोशिश की गई."
उन्होंने कहा, "इस मामले की जांच के लिए एफ़एसएल टीम को बुलाया गया है. अगर यह साबित होता है कि सबूत नष्ट किए गए हैं, तो इसमें शामिल लोगों के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 201 के तहत मामला दर्ज किया जाएगा."
बांग्लादेश के आरोपों पर अब भारतीय विदेश मंत्रालय का आया जवाब
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इमेज कैप्शन, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के आरोपों का जवाब दिया है
भारत के विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के बयान को ख़ारिज करते हुए कहा है कि यह अनुचित है.
विदेश मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि “बांग्लादेश में जल्द से जल्द मुक्त, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव कराए जाएं, ताकि जनता की इच्छा और जनादेश स्पष्ट हो सके.”
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “भारत सरकार को अवामी लीग के कथित सदस्यों की तरफ़ से भारत में किसी भी तरह की ‘बांग्लादेश विरोधी’ गतिविधियों की जानकारी नहीं है और न ही ऐसे किसी क़दम की, जो भारतीय क़ानून के ख़िलाफ़ हो. भारत सरकार अन्य देशों के ख़िलाफ़ राजनीतिक गतिविधियां भारतीय धरती से होने की अनुमति नहीं देती.”
बांग्लादेश की आपत्ति क्या थी?
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा था कि भारतीय धरती पर प्रतिबंधित बांग्लादेश अवामी लीग की गतिविधियां भारत-बांग्लादेश की दोस्ती, साथ ही दोनों देशों के लोगों के बीच भरोसे और सम्मान को जोख़िम में डालती हैं.
बांग्लादेश के मंत्रालय ने कहा था, “दिल्ली और कोलकाता में प्रतिबंधित राजनीतिक दल बांग्लादेश अवामी लीग के दफ़्तर खोले जाने की रिपोर्ट्स पर बांग्लादेश सरकार का ध्यान गया है.”
बांग्लादेश ने भारत से अपील की थी कि “किसी भी बांग्लादेशी नागरिक को भारतीय धरती से ‘बांग्लादेश-विरोधी’ गतिविधियां करने की इजाज़त न दी जाए, न ऐसी गतिविधियों को समर्थन दिया जाए, और अवामी लीग के किसी भी राजनीतिक दफ़्तर को तुरंत बंद कराया जाए.”
कार्टून: एथेनॉल मुनाफ़ा युक्त पेट्रोल
भारत के रूस से तेल खरीदने पर आज का कार्टून
कर्नाटक: अनुसूचित जातियों में आंतरिक आरक्षण का एलान, सिद्धारमैया सरकार पर क्या होगा असर?, इमरान क़ुरैशी, बीबीसी हिन्दी के लिए
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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 'अहिंदा' नेता के तौर पर अपनी स्थिति और मज़बूत कर ली है. उनकी कैबिनेट ने अनुसूचित जातियों के भीतर आंतरिक आरक्षण देने का फ़ैसला किया है.
सिद्धारमैया ने आज राज्य विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों में कैबिनेट के इस फ़ैसले की घोषणा की.
इस फ़ैसले के बाद हरियाणा और तेलंगाना के बाद कर्नाटक देश का तीसरा राज्य बन गया है, जिसने अनुसूचित जातियों की 101 जातियों के बीच आंतरिक आरक्षण लागू किया है.
दलित एक्टिविस्ट और टिप्पणीकार इंदुधरा होन्नापुरा ने बीबीसी हिन्दी से कहा, "यह फ़ैसला सिद्धारमैया की छवि को मज़बूत करेगा और उन्हें 'अहिंदा' नेता के तौर पर और मज़बूत स्थिति में ले जाएगा."
कैबिनेट ने जस्टिस एच.एन. नागमोहनदास आयोग की रिपोर्ट को स्वीकार किया. इस आयोग ने सिफ़ारिशों से पहले एक एम्पीरिकल स्टडी (देखे-सुने सबूतों पर आधारित स्टडी) की थी.
हालांकि राज्य सरकार ने सिफ़ारिशों में संशोधन करते हुए यह घोषणा की कि 'लेफ़्ट सेक्ट (मादिगा)' और 'राइट सेक्ट (होलिया)' दोनों को छह-छह फ़ीसदी आरक्षण मिलेगा.
सरकार ने तीसरी कैटेगरी बनाने का फ़ैसला किया जिसमें बंजारा, कोरचा और भोवी समुदायों को छोटे घुमंतु समूहों के साथ मिलाकर रखा गया है. इस कैटेगरी को पांच फ़ीसदी आरक्षण दिया गया है.
अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के गवर्नेंस और पॉलिसी के प्रोफ़ेसर ए. नारायण ने बीबीसी हिन्दी से कहा, "यह अच्छी बात है कि सरकार आंतरिक आरक्षण लागू कर रही है. लेकिन उसे नागमोहनदास आयोग की सिफ़ारिशें ही माननी चाहिए थीं. बंजारा, कोरचा और भोवी के साथ घुमंतु समुदायों को मिलाने से छोटे घुमंतु समूहों के हित प्रभावित होंगे."
राजनीतिक टिप्पणीकार डी. उमापति ने भी कहा कि घुमंतु समुदाय "संख्या में बेहद छोटे हैं. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्हें बंजारा, कोरचा और भोवी जैसी जातियों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ेगी. फिर भी यह एक ऐतिहासिक फ़ैसला है."
उमापति ने आगे कहा, "किसी हद तक यह मादिगा वोटों को बीजेपी से कांग्रेस की ओर खींचने में मदद कर सकता है."
सिद्धारमैया ने विधानसभा में कहा कि उनकी सरकार इस फ़ैसले में बदलाव करने को तैयार रहेगी, "अगर अगली जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किसी तरह के संशोधन ज़रूरी पाए जाते हैं."
दिनभर- 'पूरा दिन पूरी ख़बर’ मोहन लाल शर्मा और सुमिरन प्रीत कौर के साथ
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उत्तर कोरिया को हथियार भेजने के मामले में चीनी नागरिक को अमेरिका में 8 साल की सज़ा
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इमेज कैप्शन, प्रतीकात्मक तस्वीर
अमेरिका के न्याय विभाग ने बताया है कि उत्तर कोरिया को हथियार और सैन्य सामग्री पहुंचाने के आरोप में एक चीनी नागरिक को आठ साल की जेल की सज़ा सुनाई गई है.
विभाग के मुताबिक़, 42 वर्षीय शेंगहुआ वेन को उत्तर कोरियाई अधिकारियों से लगभग 20 लाख डॉलर मिले थे, ताकि वह कैलिफ़ोर्निया से हथियार और सैन्य सामान भेज सके.
कैलिफ़ोर्निया के ओंटारियो शहर में रहने वाले वेन को दिसंबर 2024 में गिरफ़्तार किया गया था. जून 2025 में उन्होंने क़ानून तोड़ने और विदेशी सरकार का अवैध एजेंट बनने की साज़िश रचने का दोष स्वीकार किया था.
न्याय विभाग ने बताया कि वेन 2012 में छात्र वीज़ा पर अमेरिका आए थे, लेकिन 2013 में वीज़ा की अवधि समाप्त होने के बाद भी वहीं रह गए.
विभाग के मुताबिक़, "अमेरिका आने से पहले, वेन ने चीन स्थित उत्तर कोरिया के दूतावास में वहां के अधिकारियों से मुलाक़ात की थी. इन अधिकारियों ने उन्हें उत्तर कोरिया के लिए सामान जुटाने का निर्देश दिया था."
विभाग ने यह भी कहा कि 2022 में दो उत्तर कोरियाई अधिकारियों ने ऑनलाइन मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए वेन से संपर्क किया और उन्हें अमेरिका से हथियार और अन्य सैन्य सामान की तस्करी कर उत्तर कोरिया पहुंचाने के निर्देश दिए.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों के तहत हथियार और सैन्य उपकरण उत्तर कोरिया को देने या भेजने की अनुमति नहीं है.अमेरिका ने भी उत्तर कोरिया की परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल गतिविधियों को देखते हुए उत्तर कोरिया पर अलग से प्रतिबंध लगाए हैं. लेकिन उत्तर कोरिया ने इन प्रतिबंधों से बच निकलने के अलग-अलग रास्ते तैयार कर लिए हैं.
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ख़ुद पर हुए हमले पर क्या कहा
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इमेज कैप्शन, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हमले की कोशिश की गई थी
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर बुधवार सुबह उनके आवास पर जनसुनवाई के दौरान एक शख़्स ने हमला करने की कोशिश की. मौके पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने उसे तुरंत पकड़ लिया और गिरफ़्तार कर सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन ले जाया गया.
घटना के कुछ घंटों बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर पोस्ट कर इस हमले की जानकारी दी.
उन्होंने लिखा, "आज सुबह जनसुनवाई के दौरान मेरे ऊपर हुआ हमला केवल मेरे ऊपर नहीं, बल्कि दिल्ली की सेवा और जनता की भलाई के हमारे संकल्प पर किया गया एक कायराना प्रयास है."
उन्होंने कहा कि इस घटना से वह सदमे में थीं, लेकिन अब बेहतर महसूस कर रही हैं. मुख्यमंत्री ने अपने शुभचिंतकों से अपील की कि वे उनसे मिलने के लिए परेशान न हों. उन्होंने कहा, "मैं बहुत जल्द ही आपके बीच काम करती हुई दिखाई दूंगी."
रेखा गुप्ता ने कहा कि ऐसे हमले उनके संकल्प को नहीं तोड़ सकते और अब वह पहले से अधिक ऊर्जा और समर्पण के साथ जनता के बीच काम करेंगी.
उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि जनसुनवाई और जनता की समस्याओं का समाधान पहले की तरह ही गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ जारी रहेगा.
पीएम, सीएम को पद से हटाए जाने वाले बिल पर राहुल गांधी ने क्या कहा
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में 130वां संविधान संशोधन बिल, 2025 पेश किया. इसमें प्रावधान है कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्री अगर लगातार 30 दिनों के लिए हिरासत में रहते हैं तो उन्हें 31वें दिन पद से हटा दिया जाएगा.
विपक्ष का कहना है कि इस क़ानून का ग़लत इस्तेमाल हो सकता है.
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस बिल की तुलना मध्यकालीन व्यवस्था से की. उनका कहना है कि यह क़दम लोकतंत्र के ख़िलाफ़ है.
राहुल गांधी ने कहा है, "बीजेपी जो नया बिल ला रही है, उस पर बहुत शोर है. हम फिर उसी मध्यकालीन दौर में लौट रहे हैं, जब राजा अपनी मर्ज़ी से किसी को भी हटा देता था. चुने हुए प्रतिनिधि की कोई अवधारणा ही नहीं बचती. अगर किसी का चेहरा भी पसंद न आए तो ईडी से गिरफ़्तार करा लो और 30 दिन के भीतर लोकतांत्रिक रूप से चुना गया व्यक्ति पद से बाहर कर दो."
वहीं, डीएमके अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इस बिल को लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया.
स्टालिन ने कहा है, "130वां संविधान संशोधन कोई सुधार नहीं है, यह काला दिन है और यह काला क़ानून है. 30 दिन की गिरफ़्तारी का मतलब चुने हुए मुख्यमंत्री को हटा देना है, बिना मुक़दमा, बिना दोष सिद्धि, केवल बीजेपी की मनमानी. यही तानाशाही की शुरुआत होती है: वोट चुराना, विपक्ष को चुप कराना और राज्यों को कुचल देना."
स्टालिन ने आगे कहा कि वह इस बिल की कड़ी निंदा करते हैं. "मैं सभी लोकतांत्रिक ताक़तों से अपील करता हूं कि वे इस कोशिश के ख़िलाफ़ एकजुट हों, जो भारत को लोकतंत्र से तानाशाही में बदलने की साज़िश है."
वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस बिल के उद्देश्य पर ज़ोर दिया. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि इसका मक़सद ''राजनीति में शुचिता लाना'' और ''सार्वजनिक जीवन में गिरते नैतिक मूल्यों को ठीक करना'' है.
उन्होंने लिखा है, "देश में राजनीतिक भ्रष्टाचार के विरुद्ध मोदी सरकार की प्रतिबद्धता और जनता के आक्रोश को देख कर आज मैंने संसद में लोकसभा अध्यक्ष जी की सहमति से संवैधानिक संशोधन बिल पेश किया, जिससे महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों, जैसे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्र और राज्य सरकार के मंत्री जेल में रहते हुए सरकार न चला पाएं."
बांग्लादेश ने 'अवामी लीग की गतिविधियों' को लेकर भारत से की ये अपील
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इमेज कैप्शन, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने प्रतिबंधित अवामी लीग की भारत में गतिविधियों को लेकर एक बयान जारी किया है.
बयान में कहा गया है कि अवामी लीग की भारतीय धरती पर गतिविधियां भारत-बांग्लादेश की दोस्ती, बहुस्तरीय सहयोग और दोनों देशों के लोगों के बीच भरोसे और सम्मान को जोख़िम में डालती हैं.
बयान में कहा गया है, "दिल्ली और कोलकाता में प्रतिबंधित राजनीतिक दल बांग्लादेश अवामी लीग के दफ़्तर खोले जाने की रिपोर्ट्स पर बांग्लादेश सरकार का ध्यान गया है."
बयान में यह भी कहा गया, "भारतीय धरती पर रह रहे बांग्लादेशी नागरिक अगर बांग्लादेश के ख़िलाफ़ कोई राजनीतिक गतिविधि करते हैं, ख़ासकर प्रतिबंधित दल के नेता या कार्यकर्ता, और दफ़्तर खोलते हैं, तो यह बांग्लादेश के लोगों और सरकार का सीधा अपमान है."
बांग्लादेश ने भारत से तत्काल कार्रवाई की अपील की है. बयान के मुताबिक, "बांग्लादेश सरकार भारत सरकार से अनुरोध करती है कि किसी भी बांग्लादेशी नागरिक को भारतीय धरती से 'बांग्लादेश विरोधी' गतिविधियां करने की इजाज़त न दी जाए, ना ही ऐसी गतिविधियों को कोई समर्थन दिया जाए, और भारतीय धरती पर अवामी लीग के किसी भी राजनीतिक दफ़्तर को तुरंत बंद कराया जाए."
पीएम, सीएम को पद से हटाए जाने वाले बिल पर प्रियंका गांधी, ममता बनर्जी ने क्या कहा
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में 130वां संविधान संशोधन बिल, 2025 पेश किया. इसमें प्रावधान है कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्री अगर लगातार 30 दिनों के लिए हिरासत में रहते हैं तो उन्हें 31वें दिन पद से हटाना होगा.
विपक्ष का कहना है कि इस क़ानून का ग़लत इस्तेमाल हो सकता है.
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इस बिल को अधिकारों पर हमला बताया. उन्होंने कहा कि इसे भ्रष्टाचार विरोधी कदम बताना जनता की आंखों पर पर्दा डालने जैसा है.
उन्होंने कहा, "कल को आप किसी मुख्यमंत्री पर कोई भी मुक़दमा डाल सकते हैं, उसे 30 दिन तक बिना दोष सिद्ध हुए जेल में रख सकते हैं, और उसे मुख्यमंत्री पद से हटा दिया जाएगा. यह बिल्कुल ग़लत है, असंवैधानिक है, अलोकतांत्रिक है और बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है."
टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे लोकतंत्र और संघीय ढांचे के लिए ख़तरा बताया.
उन्होंने कहा, "मैं भारत सरकार की तरफ़ से आज पेश किए गए 130वें संविधान संशोधन बिल की कड़ी निंदा करती हूं. यह ‘सुपर-इमरजेंसी’ से भी आगे की स्थिति है, भारत के लोकतांत्रिक युग को हमेशा के लिए ख़त्म करने की कोशिश है."
आरजेडी सांसद मनोज झा ने इसी बिल से जुड़ी एक रिपोर्ट को शेयर करते हुए एक्स पर लिखा है कि यह बिल विपक्ष को कमज़ोर करने की कोशिश है. उनके मुताबिक, लोकतंत्र बहस, असहमति और सत्ता को चुनौती देने के अधिकार पर टिका होता है.
उन्होंने कहा, "जब विपक्षी आवाज़ों को दबाया जाए या अप्रासंगिक बना दिया जाए, तो वहां लोकतंत्र नहीं बचता, बल्कि केवल चुनावी अनुष्ठानों में लिपटा हुआ निरंकुश शासन रह जाता है."
उत्तर प्रदेश: मुख़्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी को हाई कोर्ट से राहत, सैयद मोज़िज इमाम, बीबीसी संवाददाता
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उत्तर प्रदेश के मऊ सदर से निर्वाचित विधायक अब्बास अंसारी को इलाहाबाद हाई कोर्ट से राहत मिली है.
हाई कोर्ट ने उनकी दो साल की सज़ा पर रोक लगा दी है.
अब्बास अंसारी पूर्व बाहुबली नेता मुख़्तार अंसारी के बेटे हैं. मुख़्तार अंसारी की मार्च 2024 में मौत हो गई थी.
मई 2025 में मऊ की एक निचली अदालत ने हेट स्पीच के मामले में अब्बास अंसारी को दो साल की सज़ा सुनाई थी.
इस फ़ैसले के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द हो गई थी.
अब्बास अंसारी ने निचली अदालत के इस फ़ैसले को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी थी.
हाई कोर्ट की तरफ़ से अब सज़ा पर रोक लगाए जाने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता भी बहाल हो जाएगी.
ये मामला साल 2022 में विधानसभा चुनाव के दौरान का है, जब अब्बास अंसारी चुनाव लड़ रहे थे.
3 मार्च 2022 को मऊ के पहाड़पुर में हुई सभा में अंसारी ने अफ़सरों को "देख लेने" की धमकी दी थी.
इसके बाद एसआई गंगाराम बिंद की शिकायत पर मुक़दमा दर्ज किया गया था.
एडिटर्स गिल्ड ने रुबेन बनर्जी का यूट्यूब चैनल हटाने पर नाराज़गी जताई
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इमेज कैप्शन, वरिष्ठ पत्रकार रुबेन बनर्जी का यूट्यूब चैनल प्लेटफ़ॉर्म से हटा दिया गया है
एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया ने वरिष्ठ पत्रकार और गिल्ड के महासचिव रुबेन बनर्जी के यूट्यूब चैनल को बिना नोटिस दिए हटाए जाने पर कड़ा ऐतराज़ जताया है.
गिल्ड ने कहा कि अचानक उठाए गए इस क़दम से अभिव्यक्ति की आज़ादी और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म की जवाबदेही को लेकर अहम सवाल खड़े होते हैं.
गिल्ड के बयान में कहा गया, "एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया बेहद चिंतित है कि वरिष्ठ पत्रकार और गिल्ड के महासचिव रुबेन बनर्जी का यूट्यूब चैनल बिना किसी चेतावनी या नोटिस के अचानक बंद कर दिया गया है."
गिल्ड ने यह भी कहा कि चैनल को तुरंत बहाल किया जाए और बंद करने की साफ़ वजह सार्वजनिक की जाए.
गिल्ड ने कहा है कि यह मामला अकेला नहीं है. बयान के मुताबिक़, "चिंता की बात यह है कि यह कोई इकलौती घटना नहीं है. हाल ही में इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट पूनम अग्रवाल, जिन्होंने चुनावी गड़बड़ियों और मानवाधिकारों पर व्यापक रिपोर्टिंग की है, उनका एक वीडियो भी यूट्यूब से बिना किसी जानकारी या स्पष्ट कारण के हटा दिया गया.
''अप्रैल में पत्रकार संजय शर्मा का 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क सरकार के ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ और ‘लोक व्यवस्था’ का हवाला देते हुए भारत में ब्लॉक कर दिया गया."
गिल्ड ने कहा, "यूट्यूब ने चैनल को बिना चेतावनी या स्पष्टीकरण दिए हटाया. हालांकि सरकार ने मई के मध्य में आदेश वापस ले लिया और चैनल बहाल हुआ, लेकिन ऐसा तभी हुआ जब नेटवर्क सुप्रीम कोर्ट पहुंचा."
गिल्ड का कहना है, "ऑनलाइन मीडियम में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता उतनी ही ज़रूरी है जितनी ऑफ़लाइन. लोकतंत्र के मज़बूत बने रहने के लिए ज़रूरी है कि यूट्यूब जैसे प्लेटफ़ॉर्म पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही से काम करें, ताकि ज़िम्मेदार पत्रकारिता की रक्षा हो, उसे दंडित न किया जाए."
नॉर्वे की राजकुमारी के बेटे पर बलात्कार और दुर्व्यवहार के आरोप, सेहर आसफ़, बीबीसी न्यूज़
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इमेज कैप्शन, 2022 में एक कार्यक्रम में मारियस बोर्ग होइबी
नॉर्वे की राजकुमारी के बेटे मारियस बोर्ग होइबी (28) पर बलात्कार के चार मामलों सहित कुल 32 अपराधों के मामले दर्ज किए गए हैं.
यह जानकारी अभियोजन पक्ष ने दी है.
होइबी पर उनकी एक पूर्व साथी के साथ दुर्व्यवहार और एक अन्य पूर्व साथी के साथ कई क़ानूनों के उल्लंघन का आरोप भी लगाया गया है.
मारियस बोर्ग होइबी का जन्म क्राउन प्रिंसेस मेटे-मैरिट के विवाह से पहले अफ़ेयर से हुआ था. इसके बाद राजकुमारी ने प्रिंस हाकोन से शादी की थी.
होइबी ने अपने ख़िलाफ़ सबसे गंभीर आरोपों से इनकार किया है.
उनके वकील पेटर सेकुलिक ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि वह कोशिश करेंगे कि उनके मुवक्किल को न्यूनतम सज़ा मिले.
अगर गंभीर आरोप सिद्ध हो जाते हैं तो होइबी को 10 साल तक की सज़ा हो सकती है.
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पाकिस्तान: कराची में बारिश से हुए हादसों में कम से कम आठ लोगों की मौत, रियाज़ सोहेल, बीबीसी उर्दू, कराची
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इमेज कैप्शन, मौसम विभाग ने कराची में मंगलवार को 165 मिमी बारिश दर्ज की है.
पाकिस्तान के कराची शहर में बारिश के कारण हुए हादसों में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई.
सर्जन डॉ. सामिया सैयद के अनुसार, इन लोगों की मौत दीवार गिरने, बिजली का झटका लगने और नाले में गिरने के कारण हुई है.
सिंध सरकार ने मंगलवार को हुई भारी बारिश के बाद कराची में बुधवार को छुट्टी की घोषणा कर दी है.
पाकिस्तान मौसम विभाग ने बुधवार को भी भारी बारिश की चेतावनी दी है.
मुख्यमंत्री मुराद अली शाह और कराची के मेयर मुर्तजा वहाब ने जल निकासी कार्य की निगरानी के लिए रात में गश्त की.
बारिश के बाद मालिर नदी में पानी के तेज़ बहाव के कारण कोरंगी कॉज़वे को बंद कर दिया गया है.
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पाकिस्तान मौसम विभाग के अनुसार, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से मानसूनी हवाएं लगातार देश के ज्यादातर हिस्सों, ख़ासकर दक्षिणी इलाकों में प्रवेश कर रही हैं.
इसके कारण अगले दो दिनों में सिंध और बलूचिस्तान में भारी बारिश और बाढ़ की आशंका है.
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मौसम विभाग के अनुसार सिंध, कराची, हैदराबाद, मीठी, थारपारकर, उमरकोट, मीरपुरखास सहित कई इलाकों में तेज़ हवाओं और गरज के साथ बारिश और भारी बारिश होने की संभावना है.
इसके कारण निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है.
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ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 377 पहुंची: पीडीएमए
पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत की प्राकृतिक आपदा प्रबंधन एजेंसी पीडीएमए ने बारिश और बाढ़ के कारण प्रांत के विभिन्न जिलों में अब तक हुए जान-माल के पर एक रिपोर्ट जारी की है.
पीडीएमए का कहना है कि प्रांत में बारिश और बाढ़ के कारण अब तक 377 लोगों की मौत हुई है और 182 घायल हैं. इसमें 294 पुरुष, 50 महिलाएं और 33 बच्चे शामिल हैं.
पीडीएमए का कहना है कि बारिश और बाढ़ के कारण अब तक प्रांत में कुल 1,377 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें से 355 घर पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं.
ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह में बाढ़ से बुनेर जिला सबसे अधिक प्रभावित हुआ है.
मुंबई : हार्बर लाइन पर लोकल ट्रेन सेवाएं 15 घंटे बाद बहाल
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इमेज कैप्शन, मुंबई में हार्बर लाइन की सेवाएं मंगलवार सुबह 11 बजकर 15 मिनट पर निलंबित कर दी गई थीं.
मुंबई में मध्य रेलवे की हार्बर लाइन पर 15 घंटे से अधिक समय बाद बुधवार को लोकल ट्रेन सेवाएं बहाल कर दी गई.
मुंबई में हुई भारी बारिश के बाद रेल पटरियों के जलमग्न होने के कारण शहर की जीवनरेखा कही जाने वाली लोकल ट्रेनों की सेवाएं ठप हो गई थीं.
अधिकारियों ने पीटीआई को बताया कि मूसलाधार बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित होने के एक दिन बाद बुधवार सुबह मुंबई में लोकल ट्रेन सहित सभी सार्वजनिक परिवहन सेवाएं सामान्य रूप से बहाल हो गईं.
मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी स्वप्निल नीला के अनुसार, तड़के तीन बजे पटरियों से पानी कम होने के बाद हार्बर लाइन पर ट्रेन सेवाएं पूरी तरह से बहाल कर दी गईं.
उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए उम्मीदवार राधाकृष्णन ने दाखिल किया नामांकन पत्र
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इमेज कैप्शन, एनडीए ने सीपी राधाकृष्णन का नाम उपराष्ट्रपति पद के लिए प्रस्तावित किया है.
एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने बुधवार को उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया.
इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और अन्य वरिष्ठ नेताओं भी उपस्थित रहे.
राधाकृष्णन और एनडीए के वरिष्ठ नेताओं के साथ मोदी ने राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी को नामांकन पत्रों के चार सेट सौंपे हैं.
पीसी मोदी उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए रिटर्निंग ऑफिसर हैं.
नामांकन पत्रों के चार सेटों में पीएम मोदी, राजनाथ सिंह, अमित शाह और जदयू नेता राजीव रंजन सिंह मुख्य प्रस्तावक हैं.
मध्य प्रदेश: नरसिंहपुर में छात्र ने शिक्षिका पर पेट्रोल डालकर लगाई आग, पुलिस ने किया गिरफ़्तार, विष्णुकांत तिवारी, बीबीसी संवाददाता
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इमेज कैप्शन, नरसिंहपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप भूरिया
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर ज़िले में 12वीं कक्षा के एक छात्र को अपनी शिक्षिका पर पेट्रोल डालकर आग लगाने के आरोप में पुलिस ने गिरफ़्तार किया है.
25 वर्षीय शिक्षिका ने कुछ दिन पहले छात्र के पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने की शिकायत स्कूल में दर्ज की थी.
पुलिस के मुताबिक़ सोमवार को छात्र शिक्षिका के घर पहुँचा और माफ़ी माँगने के बहाने उन्हें बाहर बुलाया. जैसे ही शिक्षिका बाहर आईं, छात्र ने उन पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी.
नरसिंहपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप भूरिया ने कहा, “यह घटना सोमवार, 18 अगस्त को हुई. आरोपी ने महिला शिक्षिका के घर पहुँचकर उन पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी. इससे पहले 15 अगस्त को आरोपी ने महिला पर साड़ी पहनने को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. शिक्षिका ने इसकी शिकायत स्कूल प्रशासन से की थी."
उन्होंने बताया कि छात्र को कल्याणपुर गाँव से गिरफ़्तार कर लिया गया है. छात्र के ख़िलाफ़ भारतीय न्याय संहिता की धारा 124(1) (एसिड आदि के प्रयोग से जानबूझकर गंभीर चोट पहुँचाना) और धारा 332(बी) (गंभीर अपराध करने की नीयत से घर में घुसपैठ करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है.
घटना के बाद शिक्षिका को पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, फिर उन्हें जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफ़र किया गया.
इस हमले में उनका लगभग 25% शरीर झुलस गया है, हालांकि फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है.
इसराइल ने सभी बंधकों की रिहाई की मांग की, ग़ज़ा में युद्धविराम प्रस्ताव पर संदेह
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इमेज कैप्शन, बंधकों के परिवार और उनके समर्थक चाहते हैं कि इसराइल सरकार युद्ध समाप्त कर बंधकों को घर वापस लाए.
एक इसराइली अधिकारी ने कहा है कि इसराइल ने ग़ज़ा में बंधक बनाए गए सभी 50 बंधकों की रिहाई की मांग कर रहा है, इससे इस बात पर संदेह पैदा हो गया है कि क्या वह 60 दिन के युद्धविराम के नए प्रस्ताव को स्वीकार करेगा? जिस पर हमास ने सोमवार को सहमति व्यक्त की थी.
कतर और मिस्र के पेश किए गए प्रस्ताव के तहत करीब आधे बंधकों की रिहाई हो जाएगी और कतर के अनुसार, यह प्रस्ताव इसराइल के पहले स्वीकार किए गए अमेरिकी प्रस्ताव के "समान" है.
इसराइल ने इसे स्पष्ट रूप से अस्वीकार नहीं किया है लेकिन इसराइल सरकार के प्रवक्ता डेविड मेन्सर ने बीबीसी को बताया कि इसराइल को "आंशिक समझौतों" में कोई दिलचस्पी नहीं है.
मेन्सर ने कहा, "अब चीजें बदल गई हैं. प्रधानमंत्री ने ग़ज़ा के भविष्य के लिए एक योजना तैयार की है."
फ़लस्तीनी सूत्रों ने बताया कि प्रस्ताव के तहत सबसे पहले 10 जीवित और 18 मृत बंधकों को सौंप दिया जाएगा, इसके बाद दोनों पक्ष स्थायी युद्धविराम और अन्य बंधकों की वापसी पर बातचीत करेंगे.
इसराइल का मानना है कि 22 महीने के युद्ध के बाद 50 बंधकों में से केवल 20 ही जीवित बचे हैं.