इंडियन डॉक्टर्स फॉर पीस एंड डेवलपमेंट ने की इसराइली मेडिकल एसोसिएशन के निलंबन की मांग

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इंडियन डॉक्टर्स फॉर पीस एंड डेवलपमेंट (आईडीपीडी) ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) से अपील की है कि वह वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन (डब्ल्यूएमए) में इसराइली मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के निलंबन की मांग का समर्थन करे.
संगठन के प्रेस रिलीज़ के मुताबिक, जब तक इसराइली मेडिकल एसोसिएशन, मेडिकल एथिक्स और मेडिकल न्यूट्रैलिटी से जुड़े अपने दायित्वों का पालन सुनिश्चित नहीं करता, तब तक उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए.
आईडीपीडी, इंटरनेशनल फिजिशियन्स फॉर द प्रिवेंशन ऑफ न्यूक्लियर वॉर (आईपीपीएनडब्ल्यू) की भारतीय सहयोगी संस्था है.
संगठन ने कहा कि पिछले करीब दो वर्षों में गज़ा की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है. अस्पतालों पर हमले, डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की मौत और गिरफ्तारी, मानवीय सहायता में रुकावट और ज़रूरी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में बाधा जैसी घटनाओं को संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, मानवाधिकार संगठनों ने दर्ज किया है.
संगठन ने हाल में द लैंसेट में प्रकाशित लेख का भी हवाला दिया, जिसमें इसराइली मेडिकल एसोसिएशन को डब्लूएमए से निलंबित करने की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग का जिक्र किया गया है.
साथ ही जस्टिस एस. मुरलीधर की अध्यक्षता वाले स्वतंत्र जन न्यायाधिकरण की रिपोर्ट और साउथ अफ्रीकन मेडिकल एसोसिएशन ने उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया गया.
आईडीपीए ने इस मुद्दे पर एक ऑनलाइन याचिका भी शुरू की है, जिसे भारत और अन्य देशों के डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों, जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों और शांति संगठनों का समर्थन मिल रहा है.
संगठन ने आईएमए से अनुरोध किया है कि वह अक्टूबर 2026 में होने वाली डब्लूएमए महासभा में इस मुद्दे को मज़बूती से उठाए और मेडिकल एथिक्स और संघर्ष क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की सुरक्षा के पक्ष में स्पष्ट रुख अपनाए.
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