पश्चिम बंगाल की सरकार ने कुछ दिनों पहले कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अंदर मौजूद 100 साल से ज़्यादा पुरानी बांकड़ा मस्जिद को सुरक्षा कारणों से एयरपोर्ट परिसर के बाहर हटाने का फ़ैसला किया था.
इसके ख़िलाफ़ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए.
पश्चिम बंगाल जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आज का दिन राज्य के चार करोड़ मुसलमानों और सेक्युलर लोगों के लिए "काला दिन" है.
उन्होंने कहा कि पूरे विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों ने शांति बनाए रखी.
सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने कहा, "आज बंगाल के चार करोड़ मुसलमानों और धर्मनिरपेक्ष लोगों के लिए काला दिन है. हमने शांति बनाए रखी है. पुलिस हथियार लेकर आई थी, उन्हें लग रहा था कि कुछ होगा, लेकिन वे नाकाम रहे. उनकी जानकारी गलत साबित हुई. हमारा कोई नुक़सान नहीं हो सकता, हम सोच-समझकर कदम उठाते हैं."
उन्होंने आगे कहा, "हमारे पास एयरपोर्ट के साथ 2004 से हुए लेन-देन के दस्तावेज़ हैं. मस्जिद कमेटी ने शुक्रवार की नमाज़ की इजाज़त के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी और पुलिस स्टेशन को चिट्ठी दी थी. उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. मुख्यमंत्री और मैं एक-दूसरे को जानते हैं, इसलिए मैंने उन्हें नमाज़ का इंतज़ाम करने के लिए चिट्ठी भेजी, लेकिन कोई मदद नहीं मिली. कल कोलकाता की सड़कों पर रथ यात्रा हुई और पुलिस की मदद से वह सफल रही, लेकिन हमें वंचित रखा गया."
सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने कहा कि वो क़ानूनी रास्ता अपनाएंगे.
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने उनसे संपर्क किया था, लेकिन उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि केंद्रीय गृह मंत्री के दौरे का कार्यक्रम है.
शुक्रवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अंदर मौजूद बांकड़ा मस्जिद में लोगों के जाने पर रोक लगा दी गई.
एयरपोर्ट से मस्जिद को दूसरी जगह ले जाने के प्रस्ताव पर बंगाल बीजेपी प्रमुख शामिक भट्टाचार्य ने कहा, "ये मस्जिद न होकर हनुमान जी का मंदिर भी होता तब भी उसे हटाया जाता."
"बीजेपी इस मंदिर-मस्जिद की राजनीति से बाहर आकर बात करना चाहती है. जो सिद्दीकुल्लाह चौधरी बयानबाज़ी कर रहे हैं मैं उनको यहीं कहूंगा कि ये बाबर की सरकार नहीं है. तो जो भी करना है वह हमारे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी करेंगे जिनके पास गृह मंत्रालय भी है."