एनडीए के दस विधायकों के एक समूह ने बुधवार को मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से राजभवन में मुलाकात की.
करीब एक घंटे तक चली इस मुलाकात के बाद बीजेपी विधायक थोकचोम राधेश्याम सिंह ने राजभवन के सामने मीडिया से दावा करते हुए कहा, "मणिपुर में नई सरकार बनाने के लिए 44 विधायक तैयार हैं."
राज्यपाल से सुबह 11 बजे मुलाकात करने वाले दस विधायकों में राधेश्याम सिंह के साथ बीजेपी के पांच विधायक,एनपीपी से विधायक शेख नूरुल हसन, जंगहेमलिउंग और निर्दलीय विधायक सापम निशिकांत भी शामिल थे.
राज्यपाल से जिन दस विधायकों ने यह मुलाकात की है उनमें नौ विधायक मैतेई बहुल घाटी से हैं, जबकि एक नागा विधायक हैं.
राज्यपाल के साथ मुलाकात कर लौटे एक विधायक ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बीबीसी से कहा,"नई सरकार गठन करने को लेकर राज्यपाल से विस्तार से बात हुई है. हम एनडीए के प्रतिनिधि के तौर पर आज राजभवन गए थे. हमारे पास 44 विधायकों के दस्तख़त वाला समर्थन पत्र था जो हमने राज्यपाल को सौंप दिया है. उम्मीद है कि 15 जून तक मणिपुर में एक नई लोकप्रिय सरकार का गठन कर लिया जाएगा."
मणिपुर में बीते तीन-चार दिनों से राज्यपाल भल्ला के ख़िलाफ़ मैतेई संगठन लगातार आंदोलन कर रहे है. ये संगठन राज्यपाल से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने की मांग पर अड़े है.
पहाड़ी जिले उखरुल में 20 मई से आयोजित शिरुई लिली महोत्सव को कवर करने जा रहे इंफाल के पत्रकारों की एक सरकारी बस को सुरक्षाबलों ने एक चेक पोस्ट पर रोक कर बस के सामने लिखे मणिपुर स्टेट ट्रांसपोर्ट में कथित तौर पर 'मणिपुर' को ढक दिया था.
इस घटना से नाराज मैतेई समुदाय इसे “मणिपुर की पहचान, उसके नाम, गौरव और सम्मान को कमजोर करने” के रूप में देख रहा है.
इसी विरोध के दौरान अब मणिपुर में एक नई सरकार गठन करने को लेकर राजनीतिक उठापटक शुरू हो गई है.
इससे पहले 29 अप्रैल को एनडीए के 21 विधायकों के एक समूह ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री दोनों को पत्र सौंपकर राज्य में लोकप्रिय सरकार की स्थापना की मांग की थी.
नई सरकार गठन की मांग करने वाले विधायकों के समूह में पूर्व सीएम एन बीरेन सिंह या उनके करीबी विधायकों का समूह शामिल नहीं था.
नई सरकार गठन करने की कवायद में शामिल एक विधायक ने बताया कि मणिपुर में 13 फरवरी से राष्ट्रपति शासन लागू है लेकिन राज्य में शांति और सामान्य स्थिति लाने की दिशा में कुछ बदलाव नहीं हुआ है.
लिहाजा एक नई सरकार ही मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति ला सकती है.
इन विधायकों के समूह में शामिल एक नेता का दावा है कि जिन 44 विधायकों ने नई सरकार गठन करने का समर्थन किया है इसमें कुकी जनजाति के दस विधायक भी शामिल है.
हालांकि कुकी विधायकों की तरफ से इसे लेकर अभी किसी तरह की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.