ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच फ़ोन पर हुई बात, टिकटॉक और टैरिफ़ पर चर्चा

चीन की तरफ़ से कहा गया है कि दोनों देशों की तरक्की के लिए आपसी सम्मान और सहयोग ज़रूरी है.

सारांश

लाइव कवरेज

इफ़्तेख़ार अली और अंशुल सिंह

  1. भारत ने पाकिस्तान पर रात 1:30 बजे ही क्यों किया हमला? सीडीएस ने बताई वजह

    सीडीएस अनिल चौहान

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    चीफ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने गुरुवार को 'ऑपरेशन सिंदूर' से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है.

    उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान पर हमला करने के लिए रात 1:00 से 1:30 बजे के बीच का समय क्यों चुना.

    सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने रांची में एक कार्यक्रम में कहा, "7 मई को, हमने जिन आतंकवादी ठिकानों को चुना था, उन पर हमने रात 1:00 से 1:30 बजे के बीच हमला किया."

    उन्होंने कहा, "हमने रात 1:30 बजे हमला क्यों किया? वह सबसे अंधेरा समय होता है. उस समय सैटेलाइट इमेज लेना और सबूत जुटाना सबसे मुश्किल होता है. फिर भी, हमने रात 1:00 से 1:30 बजे हमला किया."

    सीडीएस ने इस समय को लेकर दो कारण बताए. उन्होंने कहा, "हमें अपनी क्षमताओं पर भरोसा था. अगर रात में भी हमला करेंगे, तो उस समय भी हम तस्वीरें ले सकते थे."

    दूसरे कारण के बारे में उन्होंने बताया, "हम आम नागरिकों को नुक़सान नहीं पहुंचाना चाहते थे."

    जनरल चौहान ने कहा, "सबसे उपयुक्त समय सुबह 5-6 बजे होता, जब उजाला होना शुरू हो जाता है. लेकिन उस समय पहली अज़ान और पहली नमाज़ होती है. ऐसे में बहावलपुर और मुरीदके में चहल-पहल शुरू हो जाती, जिससे बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे जाते."

    पहलगाम हमले के बाद 6-7 मई की रात भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में चरमपंथी कैंपों को निशाना बनाया था. इस अभियान को 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम दिया गया.

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  2. नेपाल का पीएम पद छोड़ने के बाद ओली का पहला बयान आया, क्या कहा?

    केपी शर्मा ओली

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    इमेज कैप्शन, केपी शर्मा ओली फ़िलहाल कहां हैं इसकी जानकारी सामने नहीं आई है (फ़ाइल फ़ोटो)

    नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफ़े के बाद शुक्रवार को अपना पहला सार्वजनिक बयान जारी किया.

    उन्होंने नेपाल में हुई हिंसा के बारे में ज़िक्र करते हुए इस घटना की जांच कराने की बात कही है.

    संविधान दिवस के मौके़ पर केपी शर्मा ओली ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म फ़ेसबुक पर दावा किया कि 'पुलिस ने उन ऑटोमेटिक हथियारों से गोलीबारी की जो उनके पास मौजूद नहीं थे'.

    साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि उस समय नेपाल सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोली चलाने का आदेश नहीं दिया था.

    ओली ने लिखा, "मैं आज इसके पीछे की साजिश के बारे में ज़्यादा कुछ नहीं कहूंगा, समय ही बताएगा."

    उन्होंने कहा, "क्या हमारा देश बन रहा था या बिगड़ रहा था, या फिर देश की गिरावट की एक काल्पनिक कहानी गढ़कर गुस्से को बढ़ाया जा रहा था? हमारी नई पीढ़ी खुद ही यह सब समझ जाएगी."

    पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, "एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान घुसपैठ हुई. घुसपैठियों ने हिंसा फैलाई और हमारे युवाओं को मारा."

    नेपाल में बीता सप्ताह उथल-पुथल और हिंसा से भरा रहा. चंद दिनों में देश की सत्ता बदल गई.

    देश में सोशल मीडिया पर बैन और कथित राजनीतिक भ्रष्टाचार को लेकर राजधानी काठमांडू में 'जेन ज़ी' के प्रदर्शन में कई लोगों की मौत के बाद केपी शर्मा ओली आलोचना का सामना कर रहे थे.

    हिंसा बढ़ने के बाद केपी शर्मा ओली ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया.

    नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रहीं सुशीला कार्की अब नेपाल की पहली अंतरिम महिला प्रधानमंत्री बन गई हैं.

  3. सऊदी अरब-पाकिस्तान के बीच जो समझौता हुआ क्या उसमें दूसरे देश भी शामिल होंगे? ख़्वाजा आसिफ़ ने बताया

    पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़

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    इमेज कैप्शन, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए समझौते पर रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने प्रतिक्रिया दी है

    पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने कहा है कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच आपसी रक्षा समझौते के बाद अन्य खाड़ी देश भी इसी तरह के समझौते पर हस्ताक्षर करना चाहेंगे.

    बीबीसी उर्दू के मुताबिक़, रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने अल जज़ीरा टीवी को दिए एक इंटरव्यू में कहा, "पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच सुरक्षा समझौते के बाद और क्षेत्र की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, इसका दायरा स्वाभाविक रूप से अन्य देशों तक भी बढ़ेगा."

    उनका कहना है कि अपनी सुरक्षा के लिए, ये देश मीलों दूर किसी अन्य देश पर निर्भर रहने के बजाय एक ऐसे संप्रभु देश की ओर देखेंगे जिसके पास उनकी रक्षा करने की क्षमता हो.

    जब पत्रकार ने ख़्वाजा आसिफ़ से दूसरे खाड़ी देशों को इसमें शामिल करने के बारे में सवाल पूछा, तो इसके जवाब में उन्होंने कहा, "यह संभव है कि अगर जीसीसी में कोई देश ऐसा संकेत देता है, तो हम बाकी (देशों) को इसमें शामिल करने पर विचार कर सकते हैं, जैसा कि सऊदी अरब के साथ आपसी सहमति से हुआ है."

    पाकिस्तान और सऊदी अरब के नेताओं ने इस समझौते को 'ऐतिहासिक' बताया है.

    सऊदी अरब और परमाणु शक्ति संपन्न देश पाकिस्तान के बीच बुधवार को एक पारस्परिक सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर हुआ है.

    सऊदी अरब और पाकिस्तान की ओर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया है, "पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने स्ट्रैटिजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हैं. दोनों देश किसी भी आक्रामकता के ख़िलाफ़ मिलकर काम करेंगे. अगर दोनों देशों में से किसी एक के ख़िलाफ़ भी कोई आक्रामक होता है तो इसे दोनों के ख़िलाफ़ माना जाएगा."

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  4. ईरान पर प्रतिबंध लगाने को लेकर क्या बोले इमैनुएल मैक्रों?

    फ़्रांस

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    इमेज कैप्शन, ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी को 'ई3' के नाम से भी जाना जाता है

    फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गुरुवार को कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि इस महीने के आख़िर तक ईरान पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध दोबारा लागू हो जाएंगे.

    यह बयान उन्होंने एक इसराइली टीवी इंटरव्यू के दौरान दिया.

    न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, पत्रकार ने मैक्रों से सवाल किया कि क्या ईेरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लगे प्रतिबंध 'इस महीने के अंत तक' वापस आ जाएंगे?

    इसके जवाब में उन्होंने कहा, "हां, मुझे ऐसा लगता है, क्योंकि ईरानियों से हमें जो ताज़ा जानकारी मिली है, वह गंभीर नहीं है."

    पिछले महीने ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी, ने एक प्रक्रिया शुरू की है, जिसके ज़रिए संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को दोबारा लागू (स्नैपबैक) किया जा सकता है.

    स्नैपबैक मैकेनिज़्म दरअसल वह प्रावधान है जिसके तहत अगर यह मान लिया जाए कि ईरान ने परमाणु समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है, तो 2015 से पहले जो संयुक्त राष्ट्र के सभी कड़े प्रतिबंध थे, वे अपने-आप फिर से लागू हो जाते हैं.

  5. अफ़ग़ानिस्तान: तालिबान सरकार ने महिलाओं से जुड़ा एक नया फ़रमान जारी किया, अली हुसैनी, बीबीसी अफ़ग़ान

    अफ़ग़ानिस्तान

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    इमेज कैप्शन, अफ़ग़ान विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम से किताबें हटाने के लिए कहा गया है (सांकेतिक तस्वीर)

    अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार ने एक नए प्रतिबंध के तहत विश्वविद्यालयों से महिलाओं की लिखी गई किताबें हटा दी हैं.

    इसी आदेश में मानवाधिकार और यौन उत्पीड़न जैसे विषयों की पढ़ाई पर भी रोक लगा दी गई है.

    तालिबान ने 680 किताबों पर रोक लगा दी है. इनमें लगभग 140 किताबें महिलाओं ने लिखी है, जिनमें ‘सेफ़्टी इन द केमिकल लेबोरेटरी’ जैसी किताबें भी शामिल हैं.

    तालिबान का कहना है कि ये किताबें उनकी नीतियों और शरिया के ख़िलाफ़ हैं.

    विश्वविद्यालयों को यह भी आदेश दिया गया कि अब वह 18 विषयों की पढ़ाई नहीं कर सकते, क्योंकि तालिबान अधिकारियों के मुताबिक़ ये विषय 'शरिया के सिद्धांतों और सिस्टम की नीति से मेल नहीं खाते हैं'.

    यह फ़रमान पिछले चार सालों में तालिबान की ओर से लागू किए गए कई प्रतिबंधों की कड़ी में एक और क़दम है.

    इस हफ़्ते तालिबान के सर्वोच्च नेता के आदेश पर कम से कम 10 प्रांतों में फाइबर-ऑप्टिक इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. अधिकारियों ने कहा कि इसका मक़सद अनैतिकता रोकना है.

  6. भारत-चीन पर अमेरिकी टैरिफ़ के बारे में रूस ने उठाए ये सवाल

    विदेश मंत्री लावरोव

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    इमेज कैप्शन, विदेश मंत्री लावरोव का कहना है कि रूस पर नए प्रतिबंधों से मुझे कोई समस्या नहीं है

    रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका की भारत और चीन पर टैरिफ़ लगाने की धमकियां असरदार साबित नहीं हो रही हैं.

    साथ ही उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन में अब यह समझ बढ़ रही है कि दो प्राचीन सभ्यताओं से इस तरह की भाषा में बात करना बेकार है

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक लावरोव ने कहा, "भारत और चीन दोनों प्राचीन सभ्यताएं हैं. उनसे इस तरह बात करना कि 'या तो तुम वो करना बंद करो जो मुझे पसंद नहीं है, वरना मैं तुम पर टैरिफ़ लगा दूंगा', यह काम नहीं करेगा."

    विदेश मंत्री लावरोव ने रूस के मुख्य चैनल 1 टीवी के 'द ग्रेट गेम' कार्यक्रम में बोलते हुए यह बात कही.

    उन्होंने कहा कि बीजिंग और वॉशिंगटन के बीच, और नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच जो बातचीत चल रही है, उससे साफ़ है कि अमेरिकी पक्ष भी यह समझ रहा है.

    उन्होंने अमेरिका की मांगों पर भारत और चीन की प्रतिक्रिया की ओर इशारा किया. उन्होंने कहा, "यह सिर्फ़ उन देशों की आर्थिक स्थिति को कमज़ोर नहीं करता, बल्कि उनके लिए गंभीर दिक़्क़तें भी पैदा करता है, उन्हें नए बाज़ार ढूंढने पड़ते हैं."

  7. ट्रंप ने क्यों अमेरिकी टीवी नेटवर्कों के लाइसेंस छीनने की बात कही?

    राष्ट्रपति ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, राष्ट्रपति ट्रंप ने सुझाव दिया है कि एफ़सीसी को उन नेटवर्कों के लाइसेंस रद्द कर देने चाहिए जो उनके बारे में नकारात्मक ख़बरें फैलाते हैं

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुझाव दिया है कि कुछ टीवी नेटवर्क्स के लाइसेंस "छीन लिए जाने चाहिए."

    डिज़्नी के स्वामित्व वाले नेटवर्क एबीसी ने बुधवार शाम घोषणा की कि कॉमेडियन को 'अनिश्चितकाल' के लिए शो से हटा दिया गया है.

    यह क़दम पिछले हफ़्ते कंज़र्वेटिव कार्यकर्ता चार्ली कर्क की हत्या पर जिमी किमेल की टिप्पणी को लेकर हुए विवाद के बाद उठाया गया.

    सोमवार को किमेल ने कहा था कि चार्ली कर्क की हत्या मामले में संदिग्ध 'मागा रिपब्लिकन' है, जबकि यूटा के अधिकारियों का कहना था कि कथित बंदूकधारी 'वामपंथी विचारधारा से प्रभावित' था.

    फेडरल कम्युनिकेशंस कमिशन (एफ़सीसी) ने उनकी टिप्पणी पर कार्रवाई की चेतावनी दी, जिसके बाद एबीसी ने जिमी किमेल लाइव! का प्रसारण बंद कर दिया.

    ट्रंप ने गुरुवार को ब्रिटेन के दौरे से लौटते समय एयर फ़ोर्स वन विमान में पत्रकारों से बात की.

    इस दौरान उन्होंने कहा, "मैंने कहीं पढ़ा था कि नेटवर्क्स का 97 फ़ीसदी कवरेज मेरे ख़िलाफ़ था, फिर भी मैंने चुनाव जीता और आसानी से जीता, सभी सात स्विंग स्टेट्स जीते."

    ट्रंप ने कहा, "वह मुझे सिर्फ़ नकारात्मक प्रचार देते हैं. मेरा मतलब है, उन्हें एक लाइसेंस मिला हुआ है. मुझे लगता है कि शायद उनका लाइसेंस छीन लिया जाना चाहिए."

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