इमरान ख़ान की मुश्किलें विश्वास मत हासिल करने के बाद भी नहीं होंगी कम- उर्दू प्रेस रिव्यू

इमेज स्रोत, @PAKPMO
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते सीनेट के चुनाव और इमरान ख़ान सरकार के विश्वास मत से जुड़ी ख़बरें सुर्ख़ियों में रहीं.
सबसे पहले बात विश्वास मत की. इमरान ख़ान की सरकार ने संसद में विश्वास मत हासिल कर लिया है. 342 सीटों के निचले सदन नेशनल असेम्बली में विश्वास मत हासिल करने के लिए उन्हें 172 वोटों की ज़रूरत थी और उन्हें 178 वोट मिले.
बुधवार (तीन मार्च) को पाकिस्तानी संसद के ऊपरी सदन सीनेट के लिए हुए चुनाव में इमरान ख़ान की पार्टी के उम्मीदवार मौजूदा वित्त मंत्री हफ़ीज़ शेख़ इस्लामाबाद की प्रतिष्ठित सीट हार गए थे. उसके बाद इमरान ख़ान ने फ़ैसला किया था कि वो संसद में विश्वास मत हासिल करेंगे.
शनिवार को विश्वास मत हासिल करने के बाद इमरान ख़ान ने संसद में दिए अपने भाषण में चुनाव आयोग पर निशाना साधा.
उन्होंने कहा, "यह जो सीनेट के चुनाव हुए हैं, मुझे शर्म आती है स्पीकर साहब, बकरा मंडी बनी हुई है. हमें एक महीने से पता था. चुनाव आयोग ने कहा कि हमने बड़ा अच्छा इलेक्शन कराया है. इससे मुझे और सदमा हुआ. अगर यह इलेक्शन आपने अच्छा कराया है तो फिर पता नहीं कि बुरा इलेक्शन कैसा होता है."
उन्होंने कहा, "मैं चुनाव आयोग से कहना चाहता हूं कि पाकिस्तान की एजेंसियों से एक ख़ुफ़िया ब्रीफ़िंग लें ताकि आपको पता चले कि चुनाव में कितना पैसा चला."
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त
इमरान ख़ान ने अपनी लड़ाई जारी रखने का विश्वास दिलाते हुए कहा, "मैं आख़िरी गेंद तक लड़ने वाला हूं और अगर पूरी पार्टी भी मेरा साथ छोड़ गई तो भी मैं अकेला लड़ूँगा."
दरअसल तीन मार्च को हुए सीनेट के चुनाव में ग्यारह विपक्षी पार्टियों के समूह पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) के साझा उम्मीदवार पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने इमरान ख़ान की पार्टी के उम्मीदवार मौजूदा वित्त मंत्री हफ़ीज़ शेख़ को हरा दिया था. कहा जा रहा है कि चुनाव के दौरान इमरान ख़ान की पार्टी के कई सांसदों ने पार्टी के उम्मीदवार के हक़ में वोट नहीं दिया था और क्रॉस वोटिंग की थी.
इमरान ख़ान ने आरोप लगाया था कि इस चुनाव में पैसों की ख़ूब लेन-देन हुई है जिसके कारण उनके उम्मीदवार चुनाव हार गए.

इमेज स्रोत, Getty Images
चुनाव आयोग पर हमला
इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने सीक्रेट बैलट से सीनेट का चुनाव करवा कर 'मुजरिमों' को बचा लिया है.
इमरान ख़ान ने चुनाव आयोग पर हमला करते हुए कहा, "जब अदालत ने आपको मौक़ा दिया था तो आपने क्यों सीक्रेट बैलट का समर्थन किया. मैं जानना चाहता हूं कि मेरे कौन सांसद बिके हैं लेकिन सीक्रेट बैलट की वजह से यह पता लगाना संभव नहीं. आपने देश के लोकतंत्र को नुक़सान पहुँचाया है. आपने मुजरिमों को बचा लिया है. क्या संविधान चोरी करने की इजाज़त देता है."
चुनाव आयोग ने इमरान ख़ान और उनके मंत्रियों के लगाए गए तमाम आरोपों को ख़ारिज कर दिया है.
अख़बार दुनिया के अनुसार चुनाव आयोग ने एक बयान जारी कर कहा, "सीनेट चुनाव के नतीजों के बाद कुछ मंत्रियों और प्रधानमंत्री ने जो कहा उसे सुनकर दुख हुआ. हर पार्टी और व्यक्ति में हार स्वीकार करने का जज़्बा होना चाहिए. अगर हमसे विरोध है तो सुबूत के साथ बात करें. चुनाव आयोग सिर्फ़ संविधान और क़ानून की रोशनी में बिना किसी दबाव के स्वतंत्र रूप से अपना काम करता है. हमें अपना काम करने दें और राष्ट्रीय संस्थाओं पर कीचड़ न उछालें."
विपक्षी दलों ने विश्वास मत का बहिष्कार किया था.
पीडीएम के संयोजक मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने कहा, "राष्ट्रपति ने जाली प्रधानमंत्री की सिफ़ारिश पर जाली सेशन बुलाया. हमें पता है एजेंसियों ने किस तरीक़े सांसदों से जबरन उनके वोट लिए. प्रधानमंत्री को उन्हीं भ्रष्ट सांसदों का वोट लेते शर्म नहीं आई. प्रधानमंत्री की 2018 की बहुमत भी जाली थी और आज का विश्वास मत भी जाली है. हम इसे स्वीकार नहीं करते हैं."

इमेज स्रोत, Getty Images
संसद के बाहर धक्का-मुक्की
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार शनिवार को विश्वास मत के दौरान सदन के बाहर विपक्षी नेताओं और सत्तारूढ़ पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ के समर्थकों के बीच हाथापाई हुई.
पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद ख़ाक़ान अब्बासी को धक्के दिए गए, पूर्व गृहमंत्री अहसन इक़बाल पर जूते चलाए गए. मुस्लिम लीग (नवाज़ गुट) की प्रवक्ता मरियम औरंगज़ेब के साथ भी पीटीआई के समर्थकों ने धक्का-मुक्की की.
इस पर मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "आज संसद के बाहर बदमाशों ने विपक्षी नेताओं के प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान हमला किया. शीशे के घर में रहकर किसी पर पत्थर नहीं फेंकते. सरकार शराफ़त का दामन हाथ से ना जाने दे. हम ईंट का जवाब पत्थर से देना जानते हैं. तुम्हें गली कूचों में चलने की जगह नहीं मिलेगी."
अख़बार जंग के अनुसार गृहमंत्री शेख़ रशीद ने कहा कि मरियम औरंगज़ेब के साथ जो हुआ वो नहीं होना चाहिए था. उन्होंने कहा कि मुस्लिम लीग की नेता के साथ बहुत ज़्यादती हुई है और वो इसकी कड़ी निंदा करते हैं.
उन्होंने कहा कि अगर उन्हें शिकायत मिली तो वो ज़रूर कार्रवाई करेंगे.
हालांकि इमरान ख़ान की कैबिनेट के कई मंत्रियों ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि उन्हें पता ही नहीं कि संसद के बाहर मरियम औरंगज़ेब के साथ क्या हुआ था.

इमेज स्रोत, TWITTER @NADEEM MALIK
सरकार ने गुंडागर्दी की है: मरियम नवाज़
विपक्षी नेता और मुस्लिम लीग (नवाज़ गुट) की उपाध्यक्ष मरियम नवाज़ ने संसद के बाहर हुई घटना पर सख़्त प्रतिक्रिया दी है.
मरियम नवाज़ ने कहा, "आज सरकार ने गुंडागर्दी की है. उन्होंने विश्वास मत तो हासिल कर लिया लेकिन अब ये जाने वाले हैं. आपसे जल्द यह सुरक्षा वापस ले ली जाएगी और फिर 22 करोड़ लोग आपकी सरकार बदलने को तैयार बैठे हैं. हमारे कार्यकर्ता भी हैं. आज जो हुआ उसे मुस्लिम लीग (नवाज़) कभी नहीं भूलेगी."
मरियम नवाज़ ने इमरान ख़ान की तुलना अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करते हुए कहा कि पाकिस्तानी ट्रंप ने जाने से पहले हमला किया है.
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ने कहा कि सीनेट चुनाव में नामुमकिन को मुमकिन बना दिया गया. बिलावल ने कहा कि इमरान ख़ान को ना तो सदन में समर्थन हासिल है और ना ही जनता में.

इमेज स्रोत, Getty Images
वित्त नीति से नाराज़गी: पूर्व गृहमंत्री अहसन इक़बाल
पूर्व गृहमंत्री अहसन इक़बाल ने इमरान ख़ान के आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी के उम्मीदवार की हार के कारण हैं.
उन्होंने कहा कि इमरान ख़ान अपने फ़ायदे के लिए पूरे देश को बदनाम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इमरान ख़ान पूरे सीनेट चुनाव के लिए चुनाव आयोग पर हमले कर रहे हैं लेकिन इस्लामाबाद की एक सीट जो उनकी पार्टी हारी है उसके ठोस कारण हैं.
अहसन इक़बाल के अनुसार इमरान ख़ान की वित्त नीति से सांसदों में नाराज़गी है और इसके लिए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री ज़िम्मेदार होते हैं इसीलिए सांसदों ने वित्त मंत्री को चुनाव हरवा दिया.
विपक्ष का लॉन्ग मार्च
अख़बार जंग के अनुसार मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने सोमवार को पीडीएम की बैठक बुलाई है जिसमें सीनेट चुनाव के नतीजे और इमरान ख़ान के विश्वास मत के बाद पैदा हुए हालात पर चर्चा होगी. इसमें सीनेट के चेयरमैन के चुनाव के बारे में भी बातचीत होगी.
इस बीच विपक्ष के 26 मार्च के इस्लामाबाद रैली पर गृहमंत्री ने कहा है कि 26 मार्च को विपक्ष अगर संविधान और क़ानून को अपने हाथ में ना ले तो वो शौक़ से इस्लामाबाद आ सकते हैं. उन्होंने कहा कि राजधानी के डी-चौक पर विपक्ष को प्रदर्शन करने की इजाज़त देने का अंतिम फ़ैसला प्रधानमंत्री इमरान ख़ान लेंगे.

इमेज स्रोत, @SMQORYYAPTI
विश्वास मत के बाद भी इमरान की चुनौती
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार सदन में विश्वास मत हासिल करने के बाद भी इमरान ख़ान की मुश्किल ख़त्म नहीं हुई है.
अख़बार के मुताबिक़ इमरान ख़ान के सहयोगी उनसे और मंत्रालय देने की माँग कर रहे हैं. मंत्रालय के अलावा सीनेट के चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन की पोस्ट पर भी सहयोगियों की नज़र है.
उधर विपक्षी पीडीएम भी इमरान की सहयोगी पार्टियों को ऑफ़र दे रही है.
अख़बार के अनुसार मुत्ताहिदा क़ौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) ने इमरान ख़ान से सीनेट के डिप्टी चेयरमैन की पोस्ट माँग ली है.
उधर पीडीएम के नेता यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने एमक्यूएम के नेता ख़ालिद मक़बूल से मुलाक़ात की. मुलाक़ात के बाद गिलानी ने कहा कि प्रधानमंत्री अपनी ही पार्टी के सांसदों पर शक कर रहे हैं. गिलानी ने कहा कि सांसदों के लिए 'बिकाऊ' जैसे शब्दों का इस्तेमाल ग़लत है.
गिलानी ने कहा कि उन्होंने एमक्यूएम से गुज़ारिश की है कि वो पीडीएम का साथ दें. ख़ालिद मक़बूल ने कहा कि इस बारे में कोई अंतिम फ़ैसला पार्टी की राब्ता कमेटी करेगी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)























