जो बाइडन कार्यकाल के पहले दिन कनाडा को दे सकते हैं बड़ा झटका

जो बाइडन

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उत्तरी अमेरिका की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन अपने कार्यकाल के पहले दिन विवादास्पद कीस्टोन एक्सएल पाइपलाइन के काम पर रोक लगा सकते हैं.

इस पाइपलाइन के ज़रिए तेल क़रीब 1,200 मील (1,900 किमी) दूर कनाडाई प्रांत अल्बर्टा डाउन से नेब्रास्का पहुंचाने की योजना है, जहां फिर ये मौजूदा पाइपलाइन से जुड़ जाएगी.

पर्यावरणविद् और कई अमेरिकी समूह एक दशक से भी ज़्यादा समय से इस परियोजना के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ रहे हैं.

इसका काम पहले रोक दिया गया था, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2019 में इसे फिर शुरू करवा दिया था.

ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के फ़ैसले को पलट दिया था, जिन्होंने निर्माण को मंज़ूरी देने वाले बिल को 2015 में वीटो का इस्तेमाल कर मंजूरी दी थी.

इस पाइपलाइन को बनाने के काम में 8 अरब डॉलर का खर्च आने का अनुमान है. ये पैसा निजी क्षेत्र की ओर से लगाया जा रहा है.

बाइडन क्या करने की योजना बना रहे हैं?

कनाडाई और अमेरिकी मीडिया ने जो ब्रीफ़िंग नोट देखा है, उसके मुताबिक़, जो बाइडन 20 जनवरी को पद ग्रहण करते ही कीस्टोन एक्सएल के परमिट को रद्द करने के कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे.

विवादास्पद कीस्टोन एक्सएल पाइपलाइन

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वो अमेरिका की पेरिस जलवायु समझौते में भी वापसी करवाएंगे, जो कार्बन उत्सर्जन में कटौती करने का एक वैश्विक समझौता है. यहां भी वो ट्रंप के एक फ़ैसले को पटलने जा रहे हैं. ट्रंप ने बीते साल 4 नवंबर को अमेरिका को इस समझौते से बाहर कर लिया था.

बाइडन ने जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ लड़ाई को अपने प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बनाने का संकल्प लिया है.

अल्बर्टा के नेता, प्रीमियर जेसन केनी ने कहा कि वो रिपोर्ट्स को लेकर “बेहद चिंतित” हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि अगर पाइपलाइन परियोजना रद्द होती है तो उनकी सरकार क़ानूनी कदम उठाने के बारे में सोचेगी.

कीस्टोन एक्सएल पाइपलाइन एक दिन में 830,000 बैरल हेवी क्रूड ऑयल अल्बर्टा से नेब्रास्का पहुंचाएगी.

वहां से, इस तेल को मौजूदा पाइपलाइनों के ज़रिए मैक्सिको की खाड़ी के आसपास की रिफाइनरियों में पहुंचाया जाएगा.

पाइपलाइन के ज़रिए जो तेल ले जाया जाएगा, वो अल्बर्टा के ऑयल सैंड, रेत, पानी, चिकनी मिट्टी और बिटुमेन नाम के एक गाढ़े पदार्थ के मिश्रण से निकाला गया होगा. इस तेल को निकालना पारंपरिक स्रोतों के मुक़ाबले ज़्यादा महंगा और ऊर्जा की खपत वाला है.

ग्रीनपीस जैसे पर्यावरण समूहों का कहना है कि ऑयल सैंड से प्रति बैरल तेल उत्सर्जित करने में जितनी ग्रीनहाउस गैस निकलेंगी, वो पारंपरिक तेल की तुलना में 30% ज़्यादा हो सकती है.

हालांकि कनाडा की सरकार का कहना है कि तकनीक की मदद से ऐसे तरीक़े निकाले गए हैं, जिनसे जलवायु को नुक़सान पहुंचाने वाले उत्सर्जन को कम किया जा सकता है.

उत्तरी अल्बर्टा के आदिवासी समूहों ने प्रांतीय और संघीय सरकारों पर मुक़दमा कर दिया है. उनका कहना है कि ऑयल सैंड बनाने से पहले उनसे बात नहीं की गई, जिससे 15 साल से नुक़सान हो रहा है. इन आदिवासी समूहों का कहना है कि ये पारंपरिक ज़मीन पर उनके शिकार करने और मछली पकड़ने के अधिकारों का उल्लंघन है.

जस्टिन ट्रूडो

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कनाडा के तेल उद्योग के लिए एक झटका

जेसिका मर्फी, बीबीसी न्यूज़, टोरंटो

इसमें हैरानी की बात नहीं है कि अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति कीस्टोन एक्सएल के ख़िलाफ़ हैं. वो ओबामा प्रशासन के वक़्त से ही इस परियोजना का विरोध करने वाली आवाज़ों में से एक रहे हैं. हालिया चुनाव प्रचार अभियान के दौरान उनके स्टाफ़ ने कहा था कि वो डोनाल्ड ट्रंप की इस मंज़ूरी को पलटने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

लेकिन राष्ट्रपति कार्यकाल के पहले दिन ही बाइडन का इसपर कोई कदम उठाना परियोजना के समर्थकों के लिए एक झटके जैसा है.

कनाडा में तेल और गैस वाले क्षेत्रों के राजनीतिक नेताओं ने इसपर कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

अल्बर्टा के प्रीमियर जेसन केनी ने कहा है कि परमिट रद्द होने से "सीमा के दोनों ओर के लोगों की नौकरियां जाएंगी" और "अमेरिका-कनाडा के महत्वपूर्ण संबंध भी कमज़ोर होंगे".

कनाडा ने इस परियोजना की मंज़ूरी और निर्माण के लिए कई साल तक कोशिशें की थी. इसे देश के तेल उद्योग के भविष्य के लिए अहम माना जा रहा था, जिससे प्रोडक्ट को विदेशी बाज़ार तक पहुंचाने में मदद मिलती.

इससे पहले भी पूर्व कंज़र्वेटिव प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर की कोशिशों के बावजूद ये परियोजना रुक गई थी, उन्होंने ओबामा प्रशासन पर इसे समर्थन देने के लिए दबाव बनाया था. ये परियोजना रुकने के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते ख़राब भी हुए थे.

एक बार कनाडा ने वॉशिंगटन डीसी के मेट्रो सिस्टम में हर जगह कीस्टोन एक्सएल के समर्थन में विज्ञापन भी लगाए थे.

लिबरल प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो भी इस परियोजना के समर्थन में हैं.

बाइडन प्रशासन की कनाडा के साथ ये धमाकेदार शुरुआत ज़रूरी होगी, लेकिन जस्टिन ट्रूडो कई अन्य पर्यावरण और जलवायु संबंधी मुद्दों पर बाइडन के साथ एकमत रखते नज़र आएंगे.

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