अज़रबैजान और आर्मीनिया की जंग: 'अज़रबैजान ने युद्ध विराम का इस्तेमाल जंग की तैयारी में किया'

अज़रबैजान और आर्मीनिया की जंग

इमेज स्रोत, REUTERS/Umit Bektas

प्रकाशित
पढ़ने का समय: 4 मिनट

नार्गोन-काराबाख के विदेश मंत्रालय ने अज़रबैजान पर आरोप लगाया है कि उसने युद्ध विराम वार्ता का इस्तेमाल अपनी फ़ौजी तैयारी के लिए किया है.

रूस के मध्यस्थता में यह शांति वार्ता हुई थी. अब अज़रबैजान और आर्मीनिया दोनों ही एक-दूसरे पर इस शांति समझौते को तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं.

विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने शांति बहाल करने का एकमात्र रास्ता यह है कि वो इस क्षेत्र को एक स्वायत्त क्षेत्र के तौर पर मान्यता प्रदान करें.

अभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन क्षेत्र को अज़रबैजान का ही हिस्सा माना जाता है लेकिन यहाँ रहने वाली ज्यादातर आबादी आर्मीनियाई लोगों की है.

यहाँ के प्रशासन पर भी उन्हीं का दबदबा है. वो अज़ेरी सरकार के साथ किसी भी तरह का कोई संबंध नहीं रखना चाहते हैं.

अज़रबैजान और आर्मीनिया की जंग

इमेज स्रोत, ARMENIA DEFENCE MINISTRY PRESS SERVICE / HANDOUT

क्या युद्ध विराम का समझौता टूट गया है?

अज़रबैजान के विदेश मंत्री जेहुन बायरामोव ने कहा है कि मास्को में हुई वार्ता के दौरान मानवीय आधार पर युद्धविराम की घोषणा तात्कालिक तौर पर की गई है. यह व्यवस्था शवों के आदान-प्रदान तक कायम रहेगी.

बाकू में ब्रीफ़ करते हुए उन्होंने शिकायत की कि ज़मीन पर जो हालात थे, वो उनके देश के लिए माकूल नहीं थे और अज़रबैजान को उम्मीद थी कि उनके नियंत्रण में अधिक क्षेत्र होगा.

अज़रबैजान और आर्मीनिया दोनों ने ही एक-दूसरे पर युद्ध विराम के उल्लंघन का आरोप लगाया है. इससे युद्ध विराम के समझौते के मायने को लेकर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं. रूस ने दोनों देशों के बीच शांति समझौते को लेकर मध्यस्थता की थी.

अज़रबैजान और आर्मीनिया की जंग

इमेज स्रोत, Twitter@tcsavunma

तुर्की का बयान

तुर्की ने कहा है कि अज़रबैजान और आर्मीनिया की चल रही लड़ाई में वो अज़रबैजान का तब तक समर्थन करता रहेगा जब तक कि नागोर्नो-काराबाख़ के विवादित इलाके पर उसका नियंत्रण स्थापित न हो जाए.

तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा है, "अज़रबैजान की सेना ने बहादुरी का परिचय दिया है. अपने नियंत्रण वाले इलाकों को बचाने में उन्हें बड़ी कामयाबी मिली है. आर्मीनिया को कब्ज़ा की हुई ज़मीन उसके वास्तविक मालिक को लौटा देनी चाहिए. आर्मीनिया जब तक ऐसा नहीं करेगा, हम अपने अज़ेरी भाइयों के साथ खड़े रहेंगे."

छोड़िए X पोस्ट
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त

अज़रबैजान और आर्मीनिया की जंग

इमेज स्रोत, BULENT KILIC/AFP via Getty Images

संघर्ष विराम के उल्लंघन का आरोप

अज़रबैजान ने शनिवार को आर्मीनिया पर संघर्ष विराम के उल्लंघन का आरोप लगाया है. नागोर्नो-काराबाख़ के विवादित इलाके पर नियंत्रण को लेकर दो हफ़्ते से एक दूसरे के ख़िलाफ़ मैदान-ए-जंग में मोर्चा खोले दोनों देशों के बीच रूस की मध्यस्थता में शनिवार को ही संघर्ष विराम की घोषणा हुई थी.

लेकिन अज़रबैजान की तरफ़ ये आरोप संघर्ष विराम के लागू होने के कुछ ही देर बाद सामने आया है. अज़रबैजान के रक्षा मंत्रालय ने कहा, "आर्मीनिया खुलेआम संघर्ष विराम के समझौते का उल्लंघन कर रहा है. दो अलग-अलग दिशाओं से उनकी तरफ़ से हमले किए गए हैं."

अज़रबैजान के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि तेर्तेर और अग़दाम के इलाकों में दुश्मन की ओर से गोलीबारी हुई है. हालांकि आर्मीनिया की तरफ़ से भी अज़रबैजान पर यही आरोप लगाया गया है.

दूसरी तरफ़, आर्मीनिया के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि संघर्ष विराम के लागू होने के बाद काराखामबेयली के इलाके में अज़रबैजान के सैनिकों ने हमला किया है.

आर्मीनिया के रक्षा मंत्रालय की प्रेस सचिव शुशैन स्टीफेनयान ने कहा कि काराबाख में सुरक्षा बल दुश्मनों के हमलों का जवाब देने के लिए ज़रूरी कदम उठा रहे हैं.

वीडियो कैप्शन, आर्मीनिया और अज़रबैजान के बीच लड़ाई में भारत किधर होगा?

मारे गए लोगों को लेकर आर्मीनिया के दावे

आर्मीनियाई रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक लड़ाई के दौरान नागोर्नो-काराबाख के 28 और लोगों की अज़रबैजानी फ़ौज के साथ भिड़त में मौत हुई है. इस तरह कुल मरने वालों की संख्या 404 हो चुकी है.

वीडियो कैप्शन, आर्मीनिया और अज़रबैजान एक बार फिर जंग के मैदान में

ड्रोन हमले का वीडियो

अज़रबैजान के रक्षा मंत्रालय ने बख्तरबंद गाड़ी पर हवाई हमले का ड्रोन वीडियो जारी किया है. रक्षा मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि यह युद्धविराम का उल्लंघन है.

हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी इस वीडियो की रिकॉर्डिंग कब की है.

ऐसी रिपोर्ट थी कि अज़रबैजान ने युद्ध विराम से पहले आर्मीनियाई फ़ौजी उपकरणों पर ड्रोन की मदद से हमले किया था.

इससे पहले अज़रबैजान और आर्मीनिया के विदेश मंत्रियों ने मास्को में घंटों तक हुई बातचीत के बाद शनिवार की दोपहर से संघर्ष क्षेत्र में युद्ध विराम करने को लेकर रजामंद हुए थे.

इस समझौते के तहत युद्ध बंदियों और मृतकों के शव की अदला-बदली होने पर सहमति बनी है. इसके अलावा संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए वार्ता शुरू करने पर भी सहमति बनी.

अज़रबैजान और आर्मीनिया की जंग

इमेज स्रोत, ARIS MESSINIS/AFP via Getty Images

नागोर्नो-काराबाख़ के बारे में कुछ बातें

  • ये 4,400 वर्ग किलोमीटर यानी 1,700 वर्ग मील का पहाड़ी इलाक़ा है.
  • पारंपरिक तौर पर यहां ईसाई आर्मीनियाई और तुर्क मुसलमान रहते हैं.
  • सोवियत संघ के विघटन से पहले ये एक सवायत्त क्षेत्र बन गया था जो अज़रबैजान का हिस्सा था.
  • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस इलाक़े को अज़रबैजान के हिस्से के रूप में मान्यता दी जाती है, लेकिन यहां की अधिकांश आबादी आर्मीनियाई है.
  • आर्मीनिया समेत संयुक्त राष्ट्र का कोई सदस्य किसी स्व-घोषित अधिकारी को मान्यता नहीं देता.
  • 1980 के दशक से अंत से 1990 के दशक तक चले युद्ध में 30 हज़ार से अधिक लोगों की जानें गईं. उस दौरान अलगावादी ताक़तों ने कुछ इलाक़ों पर कब्ज़ा जमा लिया.
  • 1994 में यहां युद्धविराम हुआ जिसके बाद से यहां गतिरोध जारी है.
  • तुर्की खुल कर अज़रबैजान का समर्थन करता है.
  • यहां रूस का एक सैन्य ठिकाना है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)