ईरान ने कहा- सेना सम्मान और अपने हितों की रक्षा के लिए तैयार

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ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कोर (आईआरजीसी) ने एक बयान में कहा कि अगर दुश्मन अपने वादे से मुकरता है, तो वे देश की सुरक्षा, सम्मान और हितों की रक्षा के लिए तैयार हैं.
यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच जंग को रोकने के लिए हुए समझौते (एमओयू) के मुद्दे पर आया है.
इस बयान में कहा गया है कि ईरानी लोगों के साहसी प्रतिरोध, सेना के बलिदान और समर्पण के साथ ही शहीद नेता की पहले से की गई समझदारी भरी पहल ने दुश्मन को युद्धविराम की ओर बढ़ने के लिए मजबूर किया.
आईआरजीसी ने कहा है कि अन्याय को अस्वीकार करने की ईरान की पुरानी संस्कृति और कमांडर-इन-चीफ़ के दूरदर्शी नेतृत्व के दम पर सेना अपने देश की रक्षा और रेसिस्टेंस फ़्रंट के जायज़ अधिकारों के लिए अडिग है.
ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमलों के 100 दिन बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ है. इसमें दोनों पक्ष अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के हस्ताक्षर वाले इस समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए 60 दिनों का ढांचा तय किया गया है.
इसमें सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकने की बात कही गई है. इसमें लेबनान भी शामिल है. समझौते में एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करने की बात भी कही गई है.
साथ ही होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने और ईरानी जहाजों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की पुष्टि की गई है.
इसके अलावा वह अपने क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की योजना पर काम करेगा.




