You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
कोरोना वायरसः क्या सामान्य ज़िंदगी जीने के दिन लौट आए?
- Author, फर्गस वाल्श
- पदनाम, मेडिकल एडिटर
- प्रकाशित
सरकार और मीडिया क्या कोरोना वायरस को लेकर ज़रूरत से ज़्यादा गंभीरता दिखा रहे हैं? क्या अब हमें आगे एक सामान्य जीवन की ओर बढ़ जाना चाहिए? - ये बड़े सवाल हैं.
अर्थव्यवस्था की बुरी हालत को देखते हुए इस पर कुछ गौर करने की ज़रूरत है. यहां कुछ सकारात्मक बातें करते हैं. इससे कोविड-19 ख़त्म हो चुका है- जैसी सोशल मीडिया पर आजकल खूब दिखने वाले वाली राय को प्रोत्साहित करने में मदद मिल सकती है.
मौतों और गंभीर रूप से बीमार होने वालों के ट्रेंड में लगातार गिरावट आ रही है.
महीनों से अस्पताल में आने वाले कोविड-19 संक्रमितों की संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है.
यूके में जिस वक्त कोरोना वायरस अपने चरम पर था तब वहां रोज़ाना क़रीब 20,000 मरीज आ रहे थे. अब यह आंकड़ा घटकर महज 800 रह गया है.
एक वक्त पर पूरी इंटेंसिव केयर यूनिट्स कोविड-19 मरीजों से भरी हुई थीं. इनमें से कई मरीजों को हफ़्तों तक वेंटीलेटर्स पर रहना पड़ा था.
इसी तरह से वेंटीलेटर्स पर आने वाले मरीजों की संख्या भी लगातार गिर रही है और यह 3,300 से घटकर 64 पर आ गई है.
कोविड से होने वाली मौतों को गिनने के कई तरीके हैं. लेकिन, इन सभी से पता चलता है कि अप्रैल में यह दर सबसे अधिक थी और तब से इसमें गिरावट आ रही है.
अगर हम कोरोना वायरस टेस्ट में पॉजिटिव आने के 28 दिनों के भीतर मरने वालों का आंकड़ा देखें तो यह औसतन 1,000 लोग रोज़ाना से 99 फ़ीसदी गिरकर 10 से भी कम रह गया है.
इसके मुकाबले प्रोस्टेट कैंसर से हर दिन औसतन 30 आदमियों की मौत होती है, जबकि ब्रेस्ट कैंसर से रोज़ाना 30 महिलाएं मर जाती हैं. कोरोना से उलट इनमें से कोई भी ख़बर रोज़ाना रात को टीवी पर नहीं आती है.
हालांकि, गुजरे कुछ महीनों से कोरोना वायरस के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन इसकी बड़े तौर पर वजह टेस्टिंग में इज़ाफ़ा होना है.
जुलाई की शुरुआत से ही स्वाब टेस्ट को दोगुना किया गया है. नाक और गले के ज़्यादा स्वाब टेस्ट की वजह से वायरस का ज़्यादा पता चला है. लेकिन, इससे हॉस्पिटल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या नहीं बढ़ रही है.
हालिया ओएनएस इनफेक्शन सर्वे से पता चला है कि इंग्लैंड में रोज़ाना 2,200 संक्रमण के मामले आ रहे हैं. जुलाई में मामूली इज़ाफ़े के बाद पिछले पूरे महीने यह आंकड़ा स्थिर रहा है.
ऐसे में यूके में कोरोना के फ़ैलने के बाद से चीज़ों में बड़ा बदलाव आया है.
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एविडेंस-बेस्ड मेडिसिन के प्रोफेसर कार्ल हेनेघन कहते हैं, "अगर आप मार्च और अप्रैल की बात करें तो अतिसंवेदनशील लोगों का एक बड़ा पूल था जिसमें केयर होम्स में एक हफ़्ते में 1,000 कोरोना केस आ रहे थे. अब कहीं ज़्यादा युवा लोग संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं और इन पर इसका ज़्यादा असर नहीं हो रहा है."
"दूसरा, वायरस के फ़ैलने की दर भी घटी है. सामाजिक दूरी के पालन के साथ लोग इससे बचने में सफल हो रहे हैं. इनका संपर्क वायरस की कम मात्रा से हो रहा है और इस वजह से ये कम गंभीर बीमार हो रहे हैं."
अगर आपको हॉस्पिटल में जाना पड़ता है तो आपके कोविड-19 से जीवित बचने के आसार काफी मजबूत होते हैं. मेडिकल टीमों के पास अब इस बात की अच्छी समझ है कि इस वायरस से कैसे लड़ना है और वे ज़्यादा प्रभावी डेक्सामेथेसोन जैसी दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं.
मैं बीबीसी का मेडिकल एडिटर हूं. 2004 से ही मैं कैंसर, जेनेटिक्स, मलेरिया और एचआईवी जैसे कई विषयों पर ख़बरें करता रहा हूं. इसके अलावा, मैंने मेडिकल साइंसेज में आए बदलावों पर भी लिखा है.
मैंने बर्ड फ्लू, सार्स और मर्स जैसे महामारी के ख़तरों को भी देखा है. अब मैं कोविड-19 और इसके दुनिया पर हो रहे भयंकर परिणामों को भी देख रहा हूं.
दुनिया भर में कोविड-19 के संक्रमण के मामले 2.4 करोड़ से ऊपर जा चुके हैं और इनमें हर चार दिनों में क़रीब 10 मामलों का इज़ाफ़ा हो रहा है.
इस महामारी की शुरुआत के बाद से 8 लाख से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं. लेकिन, यह टीबी जैसी दूसरी संक्रामक बीमारियों के मुक़ाबले अभी भी काफी कम है.
हवा में मौजूद बैक्टीरिया के संक्रमण से होने वाली टीबी से हर साल क़रीब 15 लाख लोगों की मौत होती है. इनमें से ज़्यादातर लोग विकासशील देशों में मारे जाते हैं. यह बीमारी मोटे तौर पर ग़रीबी और कुपोषण से जुड़ी हुई है. यह ऐसे लोगों को होती है जिनका इम्युनिटी सिस्टम कमज़ोर होता है.
कोविड के उलट इसे एंटीबायोटिक्स से ठीक किया जा सकता है. हालांकि, दवाइयों से बड़े पैमाने पर बेअसर टीबी के मामलों में गंभीर उछाल देखा गया है.
लेकिन, फिर से अपने मूल सवाल पर वापस लौटते हैः क्या ज़िंदगी को सामान्य रूप से चलाने का वक्त आ गया है?
अगर इसका मतलब बच्चों को स्कूल भेजने से है तो हां. इस बात के साक्ष्य हैं कि बच्चों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने के आसार न के बराबर होते हैं, और उनकी पढ़ाई का नुकसान कहीं ज़्यादा बड़ा हो सकता है.
लेकिन, हम सब क्या करें? इस बात में कोई संदेह नहीं है कि कोविड-19 विनाशकारी साबित हो सकता है. हमें अब आकर पता चलना शुरू हुआ है कि इस बीमारी से लंबे वक्त के क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं.
आपकी जितनी ज़्यादा उम्र होगी आपका जोखिम उतना ही बड़ा होगा. हालांकि, 70 साल के एक ट्रायथलीट का इम्यून सिस्टम एक 40 साल के मोटे और आलसी शख्स के मुक़ाबले मजबूत हो सकता है.
सांख्यिकी गुरु प्रोफ़ेसर डेविड स्पीगलहाल्टर कहते हैं कि 80 साल के शख्स के लिए 20 साल के युवा के मुक़ाबले कोविड से मरने का 500 गुना ज़्यादा जोखिम होता है.
हम अभी भी इस भयंकर बीमारी पर जीत हासिल करने से कोसों दूर हैं. मैंने इंटेंसिव केयर यूनिट में इससे बीमार लोगों को देखा है. इनमें से कई पहले फिट और स्वस्थ थे. यह उम्रदराज लोगों के लिए ज़्यादा गंभीर बीमारी है. लेकिन, कई दफ़ा इसके किसी को भी अपना शिकार बना लेने के मामले देखे गए हैं.
हम सब अब यह जानना चाहते हैं कि इस पतझड़ में क्या होने वाला है. हम फिलहाल एक अच्छी स्थिति में हैं.
अभी गर्मियां चल रही हैं. रेस्पिरेटरी वायरस के लिए गर्मियों में फ़ैलना उतना आसान नहीं होता है. हम में से ज़्यादातर लोग सामाजिक दूरी का पालन कर रहे हैं. मुझे याद नहीं कि आखिरी बार मैंने कब किसी से हाथ मिलाया था. ऐसे में वायरस के एक शख्स से दूसरे में पहुंचने के आसार कम हैं. लेकिन, कोरोना वायरस अभी भी मौजूद है.
अगले कुछ हफ़्ते काफी अहम रहेंगे. स्कूलों और विश्वविद्यालयों के खुलने और लोगों के अपने ऑफिस वापस जाना शुरू करने के बाद यह पता चलेगा कि ट्रांसमिशन की दर क्या तेज़ी से बढ़ती है या नहीं.
इंपीरियल कॉलेज लंदन की वायरलॉजिस्ट प्रोफेसर वेंडी बार्कले कहती हैं, "हमें पता है कि नॉर्दर्न हेमीस्फियर में सर्दियां आने के साथ रेस्पिरेटरी वायरस फ़ैलाना शुरू करते हैं. ऐसे में यह अभी ख़त्म नहीं हुआ है और चीज़ें और ज़्यादा ख़राब हो सकती हैं."
फ़्रांस से चिंताजनक संकेत मिल रहे हैं. यहां न केवल मामले बल्कि कोविड संबंधित बीमारी में भी इज़ाफ़ा हो रहा है.
हर हफ़्ते 800 से ज़्यादा कोरोना वायरस मरीजों को अस्पतालों में भर्ती किया जा रहा है. छह हफ़्ते पहले यह आंकड़ा 500 पर था. पेरिस में सभी सार्वजनिक जगहों पर मास्क अब अनिवार्य है.
स्वास्थ्य मंत्री मैट हैन्कॉक ने टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा है कि दूसरी लहर "एक बेहद गंभीर ख़तरा है."
प्रोफ़ेसर कार्ल हेनेघन कहते हैं, "यह सोचना ग़लती होगी कि संक्रमण ख़त्म हो गया है. वायरस अभी भी फ़ैल रहा है और अगर हम अपनी सतर्कता कम कर देंगे तो इसमें उछाल आएगा. मुझे लगता है कि हमें लोगों को एक सरल और स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि हाथ धोना और सामाजिक दूरी कितनी ज़रूरी है."
हमें स्वीडन की तरह की एप्रोच और भी जगह देखने को मिल सकती है जहां कभी लॉकडाउन लागू नहीं किया गया और स्कूल खुले रहे.
"ऐसा नहीं है कि उन्होंने कुछ नहीं किया. उन्होंने सामाजिक रूप से ज़िम्मेदारी के साथ सामूहिकता से काम किया. रेस्टोरेंट्स खुले रहे, लेकिन लोगों ने सामाजिक दूरी बनाए रखी."
यह जानना भी ज़रूरी है कि कितने लोगों में कोविड-19 से कुछ इम्युनिटी है.
शायद हम में से हर 10 में एक में वायरस के लिए एंटीबॉडीज हैं. लेकिन, टी-सेल्स की भी भूमिका अहम है जो कि संक्रमित सेल्स को पहचानकर उन्हें नष्ट करती है.
प्रोफ़ेसर बार्कले मानती हैं कि वायरस अभी टिका रहेगा. वे कहती हैं, "मुझे लगता है कि कोविड-19 सफलतापूर्वक जानवरों से मनुष्यों में आया है और इसके ख़त्म होने के आसार कम हैं. सबसे बड़ी उम्मीद वैक्सीन की है."
एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के इम्युनोलॉजी की प्रोफ़ेसर एलीनोर राइले कहती हैं कि हम निश्चित तौर पर किसी दूसरी लहर के लिए ज़्यादा बेहतर तरीके से तैयार हैं.
वे कहती हैं, "हमें केसेज में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी, लेकिन मुझे नहीं लगता कि हमें अप्रैल के स्तर के हॉस्पिटल में भर्तियां या मौतें देखने को मिलने वाली हैं."
इसका मतलब है कि इस महामारी को रोकने की हम सबकी भी एक भूमिका है. सामाजिक दूरी और हाथों को धोना इसमें शामिल है. अगर आप यह याद नहीं कर सकते हैं कि आपने अपने गार्डन में कितने लोगों को इजाज़त दी थी, या क्या अलग-अलग घरों के दो लोगों को दुकान जाने के लिए लिफ़्ट देने में आपको कोई हर्ज़ नहीं है तो कम से कम अपने हाथ धोना और जिनके साथ आप रह रहे हैं उनसे दूरी बनाकर रहना तो किया ही जा सकता है.
कइयों को डर है कि आगे का वक़्त जाने कैसा होगा.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)