You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
नागासाकी 76वीं वर्षगांठ: कोकुरा कैसे बचा, अमरीका यहां परमाणु बम गिराने वाला था
कोकुरा शहर अब अस्तित्व में नहीं है. ये उन नगरपालिकाओं में से एक था जिन्हें 1963 में मिलाकर एक नया शहर कीटाक्यूशू बना दिया गया, जिसकी आबादी 10 लाख से कुछ कम है.
लेकिन आज भी जापानी लोगों के ज़ेहन में कोकुरा की ना मिटने वाली यादें है क्योंकि दो दशक पहले इसका अस्तित्व में ना रहना और भी दर्दनाक हो सकता था.
कोकुरा, 1945 में जापान में परमाणु बम विस्फोटों के लिए चुने गए लक्ष्यों में से एक था, लेकिन ये शहर चमत्कारिक ढंग से द्वितीय विश्व युद्ध के दिनों की भीषण तबाही से बच गया.
असल में, काकुरा 9 अगस्त को बम का निशाना बनने से कुछ मिनटों की दूरी पर था, ठीक उसी तरह जैसे तीन दिन पहले हिरोशिमा था.
लेकिन वो विनाशकारी हथियार वहाँ कभी तैनात ही नहीं किया गया क्योंकि एक साथ वहाँ कई ऐसी चीज़ें हुई जिसकी वजह से अमरीकी वायु सेना को वैकल्पिक टारगेट यानी नागासाकी की ओर बढ़ना पड़ा.
ऐसा अनुमान है कि बम विस्फोटों में हिरोशिमा के 1 लाख 40 हज़ार लोग और नागासाकी में 74 हज़ार लोग मारे गये थे, और हज़ारों लोग आगे के कई सालों तक रेडिएशन का असर झेलते रहे.
'लक ऑफ़ काकुरा' अब जापान में एक कहावत बन गई है जिसे तब बोला जाता है जब किसी के साथ बहुत बुरा होने से बच जाता है.
लेकिन काकुरा में आख़िर हुआ क्या था?
बादल और धुआँ
जुलाई 1945 के मध्य में अमरीकी सेना के अधिकारियों ने जापान के कई शहरों को चुना जहाँ परमाणु बम गिराये जा सकते थे. ये वो शहर थे जहाँ फैक्ट्रियाँ और सैन्य अड्डे थे.
कोकुरा प्राथमिकता के क्रम में सिर्फ़ हिरोशिमा से पीछे था. यानी सूची में हिरोशिमा के बाद उसका नाम था.
काकुरा हथियार उत्पादन का बड़ा केंद्र था. यहाँ जापान की सबसे बड़ी और सबसे ज़्यादा गोला-बारूद बनाने वाली फैक्टरियाँ थीं.
काकुरा में जापान की सेना की एक बहुत बड़ी आयुधशाला भी थी.
6 अगस्त को ये परमाणु बम स्टैंड-बाय पर था, ताकि अगर किसी वजह से हिरोशिमा पर बम नहीं गिर सके, तो इसका इस्तेमाल किया जा सके.
तीन दिन बाद बी-29 बमवर्षक सुबह-सुबह कोकुरा के लिए उड़े, उनमें से एक पर 'फ़ैट मैन' लदा हुआ था जो हिरोशिमा पर गिराये गए यूरेनियम बम से भी अधिक शक्तिशाली एक प्लूटोनियम बम था.
लेकिन कोकुरा के ऊपर बादलों का डेरा था, धुआँ भी हो गया था. धुआँ शायद पड़ोस के यवाटा में एक दिन पहले हुई बमबारी से उठी आग की वजह से हो गया था.
कुछ इतिहासकारों ने यह दावा भी किया कि जब पूरे जापान में हवाई हमले लगातार हो रहे थे, तब कोकुरा के कारखानों ने जानबूझकर कोयला जलाया था ताकि पूरे शहर में एक समय में एक 'स्मोक स्क्रीन' बनाई जा सके.
अमरीकी सैन्य दस्तावेज़ों और एक विमान में बैठे न्यूयॉर्क के पत्रकार विलियम लॉरेंस की रिपोर्ट के अनुसार, बी-29 बमवर्षकों ने तीन बार कोकुरा का चक्कर लगाया था.
दरअसल आदेश था कि बम तभी गिराया जाये जब टारगेट दिख रहा हो, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा नुक़सान हो सके.
समस्या ये भी थी कि ज़मीन पर मौजूद सेना ने विमान को देख लिया था और विमानों पर गोलीबारी शुरू कर दी थी.
जिस बी-29 बॉक्स्कार पर बम लदा था उसे उड़ा रहे मेजर चार्ल्स स्वीनी ने नागासाकी की ओर बढ़ने का निर्णय लिया और कोकुरा बच गया.
एक बार फिर बख़्शा
अमरीका के विमान मार्च, 1945 से ही जापान पर लगातार हमले कर रहे थे. विमान से ऐसे आग लगाने वाले बम फेंके जा रहे थे जो ज़मीन पर शहरों को जला रहे थे.
अनुमान है कि टोक्यो में 9 मार्च की रात सिर्फ़ एक रेड के दौरान 83 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी और 10 लाख से ज़्यादा लोग बेघर हो गए थे.
लेकिन बी-29 बमवर्षक जब कोकुरा पहुँचे तो वो शहर एकदम सही सलामत था.
परमाणु बम के संभावित निशानों पर आग लगाने वाले हमले नहीं किये गए थे. इसलिए कोकुरा को भी इन हमलों से बख़्श दिया गया था.
इन शहरों को पहले हमलों से इसलिए बचाए रखा गया क्योंकि अमरीकी सेना चाहती थी कि वो शक्तिशाली हथियारों से होने वाले नुकसान का बेहतर अध्ययन कर सकें.
राहत भी और दुख भी
15 अगस्त को सम्राट हिरोहितो ने बिना शर्त जापान के आत्मसमर्पण की घोषणा कर दी.
कोकुरा विनाश से बच चुका था लेकिन लोगों में अब भी घबराहट थी.
जब ख़बर आई कि नागासाकी पर गिरा बम पहले कोकुरा पर गिरने वाला था तो वहाँ के लोगों को राहत तो महसूस हुई, लेकिन उस राहत में दुख और सहानुभूति भी शामिल थी.
कीटाक्यूशू में एक नागासाकी परमाणु बम स्मारक है जो एक पूर्व आयुधशाला के मैदान में बने एक पार्क में स्थित है.
स्मारक में शहर के बम से बचने के भाग्य और नागासागी की दुर्दशा, दोनों का वर्णन है.
दोनों शहरों के बीच दशकों से मैत्रिपूर्ण संबंध गहरे हुए हैं और लोगों ने इस बात को भी माना है कि दोनों का भाग्य किस तरह से आपस में जुड़ा हुआ है.
पिछले साल कीटाक्यूशू शहर के एक प्रवक्ता ने ब्लूमबर्ग न्यूज़ एजेंसी से कहा था, "तथ्य ये है कि जो परमाणु बम कोकुरा पर गिराना तय हुआ था, वो नागासापी पर गिरा."
लेकिन कीटाक्यूशू ने भविष्य की ओर भी देखा: जापान के पुनर्निर्माण के दौरान, यह औद्योगिक शहर बहुत अधिक प्रदूषित हो गया था.
लेकिन इन दिनों, ये एशिया के सबसे हरे-भरे शहरों में एक है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)