WHO पर ट्रंप की कार्रवाई अमरीका में ही घिरी, राष्ट्रपति पर ही उठ रहे सवाल

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विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO से संबंध ख़त्म करने की घोषणा के बाद अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेशों में आलोचना तो हो ही रही है, देश के भीतर से भी सवाल उठ रहे हैं.

यूरोपीय यूनियन ने ट्रंप से आग्रह किया है कि एक बार वो अपने फ़ैसले पर फिर से विचार करें.

जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि ट्रंप का फ़ैसला अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य के लिए निराशाजनक झटका है. अमरीकी सीनेट में हेल्थ कमिटी के प्रमुख ने भी कहा है कि अभी WHO से बाहर होने का वक़्त नहीं है. ट्रंप का आरोप है कि WHO ने कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए कुछ ठोस नहीं किया और चीन की कठपुतली बनकर रह गया.

WHO संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी है जो संसार भर में हेल्थकेयर और बीमारियों के लिए काम करती है. कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी को लेकर WHO लगातार राष्ट्रपति ट्रंप की आलोचना का सामना कर रहा है.

पिछले महीने ट्रंप ने WHO को अमरीका से मिलने वाला फंड बंद कर दिया था. शुक्रवार को ट्रंप ने स्थायी रूप से फंड की राशि रोक दी. पिछले साल अमरीका ने WHO को 40 करोड़ डॉलर से ज़्यादा का फंड दिया था. फंड की यह राशि दुनिया के किसी भी एक देश से WHO को मिलने वाली रक़म से ज़्यादा है. अमरीका का यह फंड WHO के कुल बजट का 15 फ़ीसदी होता है.

अमरीका के इस क़दम पर बाक़ी दुनिया की क्या प्रतिक्रिया है?

यूरोपियन कमिशन की प्रमुख उर्सुला वोन और शीर्ष के डिप्लोमैट जोसेप बोरेल ने अपने बयान में कहा है, ''वैश्विक महामारी के वक़्त में सहयोग बढ़ाने की ज़रूरत है और सबको मिलकर समाधान खोजना है. अमरीका के इस क़दम से अंतरराष्ट्रीय नतीजे प्रभावित होंगे और ऐसा करने से बचने की ज़रूरत है. हम अमरीका से आग्रह करते हैं कि वो अपने फ़ैसले पर फिर से विचार करे.''

जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्री जेंस स्पान ने कहा कि यह निराशाजनक है. हालांकि उन्होंने इस बात को स्वीकार किया किया WHO में सुधार की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि ईयू को इसमें अब और सकारात्मक भूमिका निभानी होगी और आर्थिक रूप से बढ़चढ़कर हिस्सा लेना होगा.''

ब्रिटेन के एक प्रतिनिधि ने कहा है, ''कोरोना वायरस एक वैश्विक चुनौती है और इसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन की अहम भूमिका है. WHO की सक्रियता बहुत ज़रूरी है. WHO को ब्रिटेन से मिलने वाला फंड जारी रहेगा और हमारी ओर से फंड रोकने की कोई योजना नहीं है.''

अमरीकी सीनेट में हेल्थ कमिटी के प्रमुख लैमर एलेक्जेंडर ने कहा है कि ट्रंप के इस फ़ैसले से कोविड 19 की वैक्सीन बनाने की कोशिश को धक्का लगेगा. लैमर ने कहा कि राष्ट्रपति को अपने फ़ैसले पर फिर से विचार करना चाहिए.

लैमर ने कहा, ''इसमें कोई शक नहीं है कि WHO को और दुरुस्त करने की ज़रूरत है. कोरोना वायरस की महमारी में WHO पर भी कई तरह के सवाल हैं. लेकिन अभी हमें साथ मिलकर काम करना चाहिए. हम बाक़ी की चीज़ें इस महामारी के बाद ठीक कर लेंगे, लेकिन बीच में ऐसे कोई क़दम उठाने से अपने लक्ष्यों को हासिल नहीं कर सकते.''

अमरीका में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार रहीं सीनेटर एलिज़ाबेथ वारेन ने ट्वीट कर कहा है, ''वैश्विक महामारी के दौरान WHO से नाता तोड़ने से हमारा वैश्विक नेतृत्व प्रभावित होगा और अमरीकी नागरिकों का हेल्थ केयर सिस्टम भी प्रभावित होगा.''

WHO के पूर्व कार्यकारी महानिदेशक एंड्रेस नॉर्डोस्ट्रोम ने भी ट्रंप के फ़ैसले को चिंताजनक बताया है. उन्होंने कहा कि वैश्विक महामारी के वक़्त में जब एकता की ज़रूरत है तो इससे राजनीतिक तनाव बढ़ेगा. दक्षिण अफ़्रीका के स्वास्थ्य मंत्री ने भी इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.

WHO के सदस्य देशों में 19 मई को कोरोना वायरस की महामारी में इस एजेंसी की भूमिका की स्वतंत्र जांच को लेकर सहमति बनी थी.

ट्रंप ने ऐसा फ़ैसला क्यों किया?

शुक्रवार को व्हाइट हाउस के रोज गार्डेन में प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान ट्रंप ने पत्रकारों से कहा था, ''हमने WHO में व्यापक सुधार के लिए कहा था लेकिन इन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया. इसके बाद हमने फ़ैसला किया है कि अमरीका विश्व स्वास्थ्य संगठन से ख़ुद को अलग करता है. जो फंड हम इसे देते थे उसे वैश्विक हेल्थ केयर के लिए दूसरे संगठनों को देंगे.''

अभी तक साफ़ नहीं है कि अमरीका ख़ुद को औपचारिक रूप से WHO से कब अलग करेगा. 1948 में WHO और अमरीका में हुए समझौते के मुताबिक़ अलग होने से एक साल पहले नोटिस देने का प्रावधान है.

ट्रंप ने यह भी कहा था कि चीन ने कोरोना वायरस के संक्रमण को शुरू में छुपाने की कोशिश की और WHO ने कुछ नहीं किया. कोरोना वायरस के संक्रमण की शुरुआत चीनी शहर वुहान से पिछले साल दिसंबर में हुई थी.

अमरीकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा था कि विश्व स्वास्थ्य संगठन पर चीन का नियंत्रण है. ट्रंप ने यह आरोप भी लगाया था कि उसने कोरोना वायरस को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन पर दबाव बनाया और दुनिया को गुमराह किया. ट्रंप ने कहा था, ''पूरी दुनिया चीन के अपराध की सज़ा भुगत रही है.''

अमरीका में कोरोना वायरस की चपेट में आने से अब तक एक लाख दो हज़ार लोगों की जान जा चुकी है. दुनिया भर के किसी भी देश में इस महामारी से इतनी बड़ी संख्या में मौत नहीं हुई है.

अमरीका में विपक्ष का कहना है कि ट्रंप ने कोरोना वायरस की त्रासदी को कमतर आंका जिससे इतना बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है. विपक्ष का यह भी कहना है कि राष्ट्रपति अपनी नाकामी छुपाने के लिए ऐसा कर रहे हैं. अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव होना है और इस संकट की घड़ी में ट्रंप के दोबारा चुने जाने की संभावना को झटका लगा है. चीन का कहना है कि ट्रंप पूरी दुनिया को अपनी नाकामी छुपाने के लिए गुमराह कर रहे हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन क्या है?

  • WHO की स्थापना 1948 में हुई. यह स्विटज़रलैंड के जेनेवा में स्थित है. यह संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी है जो वैश्विक स्वास्थ्य सेवा और बीमारियों पर काम करती है.
  • इसके कुल 194 सदस्य देश हैं. इसका उद्देश्य दुनिया को स्वस्थ रखना है ताकि किसी मुश्किल स्थिति से बचा जा सके.
  • टीकाकरण के अभियान में WHO की अहम भूमिका रही है. आपातकालीन हालात में हमेशा से इस एजेंसी का योगदान अहम रहा है.
  • इसे सदस्य देश ही फंड करते हैं. फंड की राशि आबादी और आर्थिक हैसियत के आधार पर तय होती है.

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