पाकिस्तान प्लेन क्रैश: 'घड़ी और कपड़े से पहचाना भाई का शव'

    • Author, रियाज़ सोहेल
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू, कराची
  • प्रकाशित

शुक्रवार को पाकिस्तान के कराची शहर में हुए विमान हादसे में मारे गए लोगों में से 66 लोगों के शवों की पहचान हो चुकी है.

बाक़ी शवों की पहचान के लिए फ़िंगर प्रिंट्स और डीएनए टेस्ट्स का सहारा लिया जा रहा है.

लाहौर से कराची जा रहा पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) का A320 एयरबस विमान (PK8303) कराची पहुंचते हुए एयरपोर्ट पर लैंडिंग से ठीक पहले रिहाइशी इलाक़े जिन्ना गार्डन मॉडल कॉलोनी में गिर गया.

विमान में आठ चालक दल के सदस्यों समेत कुल 99 लोग सवार थे. हादसे में 97 लोगों की मौत हो गई लेकिन दो लोग बच गए हैं.

बुरी तरह जल गए हैं शव

कराची के ईधी मुर्दाघर पहुँचे सैयद इमरान अली ने बीबीसी को बताया कि कई शव इतनी बुरी तरह जल गए हैं कि उनकी पहचान संभव नहीं है. इमरान अपने भांजे के शव की पहचान के लिए आए थे.

अब उन्होंने शव की पहचान के लिए अपना डीएनए सैंपल कराची यूनिवर्सिटी भेजा है और अब उन्हें रिपोर्ट का इंतज़ार है.

सिंध के स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार अभी तक 47 यात्रियों के परिजनों ने अपने डीएनए सैंपल उपलब्ध कराए हैं ताकि उनके प्रियजनों के शवों की पहचान हो सके.

सैयद इमरान अली का कहना है कि पीड़ित परिवारों के लिए उचित सूचना व्यवस्था के कारण उन्हें अपने भांजे सैयद अरमानग़न अली की तलाश में चार अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़े.

जब उन्हें इन अस्पतालों में कोई सूचना नहीं मिली, तो उन्हें ईधी मुर्दाघर आना पड़ा.

पहले चरण में थंब और फ़िंगरप्रिंट्स से मृतकों की पहचान की कोशिश की जा रही है. इसके लिए कराची में नेशनल डेटाबेस एंड रजिस्ट्रेशन ऑथॉरिटी की टीम मौजूद है.

घड़ी और कपड़े से हुई शव की पहचान

हालाँकि विमान दुर्घटना में मारे गए दिलशाद अहमद के छोटे भाई का कहना है कि उन्हें अपने भाई का शव पहचानने में कोई परेशानी नहीं हुई. हालांकि उन्हें शव मिलने में ज़रूर परेशानी हुई, क्योंकि वहाँ बड़ी संख्या में मृतकों के परिजन मौजूद थे.

उन्होंने अपने भाई का शव उनके कपड़े और घड़ी से पहचाना.

वे कहते हैं, "मेरे भाई ने मुझे प्लेन पर चढ़ने से पहले एयरपोर्ट से अपनी तस्वीर भेजी थी. इसलिए हमें पता था कि उन्होंने कैसे कपड़े पहने थे." दिलशाद अहमद ने प्लेन पर चढ़ने से पहले अपनी बीवी और माँ को फ़ोन भी किया था.

उनके छोटे भाई कहते हैं, "जैसे ही हमने प्लेन क्रैश की ख़बर सुनी, हमें पता था कि ये वही विमान है, जिसमें मेरे भाई भी थे. इसलिए हमने तुरंत उनकी तलाश शुरू कर दी. इसके बाद यात्रियों की सूची भी जारी हो गई, जिससे इसकी पुष्टि हो गई."

दिलशाद के छोटे भाई को उनका शव जिन्नाह पोस्ट ग्रेजुएट सेंटर से पहचान के बाद मिला.

अधिकारियों का कहना है कि जिन शवों की पहचान फ़िंगरप्रिंट्स से नहीं हो पा रही है, उनकी पहचान के लिए उनके परिजनों का डीएनए सैंपल लिया जाएगा. पहचान के लिए डीएनए सैंपल लैब भेजे जाएँगे.

अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में समय लग सकता है.

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