दिल्ली विधानसभा चुनाव: आम आदमी पार्टी की जीत और बीजेपी की हार पर पाकिस्तान में क्या प्रतिक्रिया है?

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दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी से बीजेपी को करारी हार मिली है. आम आदमी पार्टी ने दिल्ली का चुनाव विकास के मुद्दे पर लड़ा जबकि बीजेपी ने राष्ट्रवाद और पाकिस्तान तक का मुद्दा दिल्ली के चुनावों में उठाया.
बीजेपी के कुछ नेताओं ने तो यहां तक कहां कि दिल्ली के चुनाव नतीजे भारत और पाकिस्तान के बीच जीत-हार तय करने वाले होंगे.
दिल्ली विधानसभा चुनाव नतीजों की चर्चा पाकिस्तान के अख़बारों में भी है. पाकिस्तान के लगभग सभी अख़बारों ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी की शानदार जीत और बीजेपी की शर्मनाक हार को प्रमुखता ने पन्नों पर जगह दी है.
अख़बार एक्सप्रेस ने सुर्ख़ी लगाई है, ''विवादित नागरिक संशोधन क़ानून मोदी को ले डूबा, दिल्ली विधानसभा चुनाव में बदतरीन शिकस्त.''
अख़बार लिखता है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने मोदी की भारतीय जनता पार्टी को तीसरी बार भी बदतरीन शिकस्त का मज़ा चखा दिया है. सत्तारूढ़ बीजेपी तमाम सरकारी तंत्र का इस्तेमाल करने के बावजूद सिर्फ़ आठ सीटें जीत सकी. जबकि आम आदमी पार्टी ने 62 सीटें जीती हैं. अख़बार लिखता है कि कुल 70 सीटों वाली दिल्ली विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 36 सीटों की ज़रूरत होती है लेकिन आम आदमी पार्टी ने 62 सीटें जीतकर मोदी सरकार के घमंड को धूल चटा दी.
अख़बार ने राजनीतिक विश्लेषकों के हवाले से लिखा है कि मोदी की पार्टी की हार की एक बड़ा कारण विवादित नागरिकता संशोधन क़ानून है जिसे मुसलमान समेत भारत के कई लोगों ने ख़ारिज कर दिया था. अख़बार के अनुसार दिल्ली के वोटरों ने बीजेपी की विभाजनकारी राजनीति को ख़ारिज कर दिया है. बीजेपी ने इस बार चुनाव में आम लोगों से जुड़े रोज़मर्रा के मुद्दों की बजाए नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ दिल्ली के शाहीन बाग़ में विरोध कर रही महिलाओं को अपना चुनावी मुद्दा बनाया था.

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मोदी की छवि को झटका?
अख़बार जंग ने लिखा है कि दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर मैदान मार लिया और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी को फिर हार का सामना करना पड़ा.
अंग्रेज़ी अख़बार डॉन ने सुर्ख़ी लगाई है, ''दिल्ली के अहम चुनाव में मोदी ने हार स्वीकार की.''
अख़बार के अनुसार दिल्ली विधानसभा चुनाव विवादित नागरिकता संशोधन क़ानून को पास करने के बाद मोदी के लिए पहली चुनावी चुनौती थी. बीजेपी ने बहुत ही आक्रामक चुनाव प्रचार किया था और इस चुनाव के ज़रिए उन्होंने नागरिकता क़ानून पर लोगों का समर्थन हासिल करने की कोशिश की थी. दिल्ली की हार बीजेपी के लिए पिछले दो सालों में राज्यों के चुनाव में मिल रही हार की ताज़ा कड़ी है.
दिल्ली में हार मोदी की छवि के लिए एक बड़ा झटका है क्योंकि केवल आठ महीने पहले मोदी ने आम चुनाव में शानदार सफलता हासिल की थी और दिल्ली की सभी सात लोकसभा सीटों पर भारी जीत हासिल की थी.
जियो न्यूज़ ने सुर्ख़ी लगाई है, ''दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी ने मोदी की बीजेपी का सूपड़ा साफ़ किया.''
जियो के अनुसार दिल्ली का चुनाव प्रधानमंत्री मोदी के लिए बड़ी चुनौती थी. दिसंबर 2019 में बने नागरिकता संशोधन क़ानून को भारत के धर्मनिरपेक्ष संविधान और अल्पसंख्यक मुसलमानों के हितों के ख़िलाफ़ बताया जा रहा है. बीजेपी ने चुनाव प्रचार के दौरान नागरिकता क़ानून का विरोध कर रहे लोगों को पाकिस्तान समर्थक क़रार दिया था. बीजेपी की अपनी सीटें पिछले चुनाव के मुक़ाबले तीन से बढ़कर आठ तो हो गईं लेकिन वो उनकी अपनी अपेक्षा से बहुत कम थीं.

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बीजेपी के पास कोई चेहरा नहीं?
अख़बार ने एक राजनीतिक विश्लेषक के हवाले से लिखा है कि राष्ट्रीय राजनीति में तो मोदी की हैसियत का कोई दूसरा राजनेता नहीं है जिसके कारण बीजेपी को चुनावी लाभ मिलता है लेकिन मोदी की यही छवि राज्य के चुनावों में प्रभावी नहीं होती है जहां बीजेपी के पास कोई स्थानीय प्रभावी चेहरा नहीं है.
अख़बार नवा-ए-वक़्त ने सुर्ख़ी लगाई है, ''दिल्ली चुनाव में बीजेपी की शर्मनाक शिकस्त.''
अख़बार लिखता है कि दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी ने बीजेपी का सफ़ाया कर दिया.
अख़बार डेली पाकिस्तान ने सुर्ख़ी लगाई है, ''दिल्ली चुनाव: आम आदमी पार्टी ने मोदी सरकार को धूल चटा दी.''
अख़बार के अनुसार सत्तारूढ़ बीजेपी ने दिल्ली चुनाव में एड़ी चोटी का ज़ोर लगाने के बावजूद सिर्फ़ आठ सीटें हासिल की. अख़बार लिखता है कि दिल्ली में चुनावी बिसात उलटने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली में डेरे डाल दिए थे और सरकारी सुविधाओं का जमकर इस्तेमाल किया गया, हिंदू मतदाताओं को लुभाने के लिए अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ ज़हर उगला गया और नफ़रत का माहौल पैदा किया लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद मतदाताओं ने मोदी सरकार की नीतियों को ठुकरा दिया.
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