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ऑस्ट्रेलिया चुनावः क्या हैं मुद्दे, कौन हैं प्रत्याशी
ऑस्ट्रेलियाई नया प्रधानमंत्री चुनने के लिए आम चुनाव में मतदान कर रहे हैं. शनिवार सुबह से ही देशभर में वोट डाले जा रहे हैं.
ऑस्ट्रेलिया में 1.64 करोड़ मतदाता पंजीकृत हैं और सभी के लिए वोट डालना अनिवार्य है.
ऑस्ट्रेलिया में बीते एक दशक में अंदरूनी राजनीतिक रस्साकशी की वजह से चार प्रधानमंत्रियों को पद छोड़ना पड़ा है.
यहां हर तीन साल में प्रधानमंत्री पद के लिए मतदान होता है लेकिन 2007 के बाद से कोई भी प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सका है.
प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन का कहना है कि उन्होंने अपनी कंज़रवेटिव सरकार में एकजुटता पैदा की है.
वो नौ महीने पहले मैल्कम टर्नबुल के स्थान पर प्रधानमंत्री बने थे.
वहीं विपक्षी लेबर पार्टी के नेता बिल शॉर्टन ने अपने चुनाव अभियान में बड़े नीतिगत बदलाव करने के वादे किए हैं.
स्कॉट मॉरिसन और बिल शॉर्टेन ने शुरुआत में ही वोट डालकर मतदाताओं को लुभाने का अंतिम प्रयास किया.
क्या हैं अहम मुद्दे?
चुनाव सर्वेक्षणों के मुताबिक़ अर्थव्यवस्था, बढ़ता जीवनयापन ख़र्चा, पर्यावरण और स्वास्थ्य सेवाएं मुख्य मुद्दे हैं.
कई मायनों में इसे एक पीढ़िगत मुद्दों का चुनाव भी माना जा रहा है. विश्लेषकों के मुताबिक युवा मतदाताओं में जलवायु परिवर्तन और महंगे होते घरों के किरायों को लेकर ग़ुस्सा है.
वहीं अन्य विश्लेषकों का तर्क है कि बूढ़े मतदाता कर सुधार प्रस्तावों से सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे. चुनाव अभियानों में ही ये मुद्दा हावी रहा है.
कौन है मुख्य उम्मीदवार
लिबरल-नेशनल सरकार तीसरे कार्यकाल के लिए मैदान में है. प्रधानमंत्री मॉरिसन का कहना है कि उन्होंने पार्टी को उस अंदरूनी लड़ाई से उबार लिया है जिसकी वजह से पूर्व प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल को इस्तीफ़ा देना पड़ा था.
मॉरिसन अपने चुनाव अभियान में आर्थिक मुद्दों पर ज़ोर देते रहे हैं. वो चुनाव को अपने और विपक्षी उम्मीदवार बिल शॉर्टन के बीच लड़ाई के रूप में दिखा रहे हैं.
वहीं विपक्षी उम्मीदवार लेबर पार्टी के बिल शॉर्टन छह साल से पार्टी के प्रमुख हैं. उन्होंने अपनी पार्टी की जलवायु परिवर्तन, जीवनयापन ख़र्च और स्वास्थ्य से जुड़ी नीतियों पर ज़ोर दिया है.
कैसे होता है मतदान?
ऑस्ट्रेलिया में हमेशा शनिवार को ही मतदान होता है. इस बार मतदान के लिए देशभर में सात हज़ार से अधिक पोलिंग बूथ बनाए गए हैं.
लेकिन कुछ प्री-पोलिंग बूथ भी हैं जहां मतदाता पहले ही अपना वोट डाल सकते हैं. पिछले चुनावों में क़रीब चालीस लाख लोगों ने ऐसे मतदान किया था.
संसद के निचले सदन की सभी सीटों और उच्च सदन यानी सीनेट की लगभग आधी सीटों के लिए मतदान हो रहा है.
चूंकि मतदान अनिवार्य है, वोट न डालने वालों को 14 डॉलर तक का जुर्माना देना पड़ता है.
पिछले चुनाव में 95 फ़ीसदी मतदाताओं ने वोट डाला था. इसकी तुलना में अमरीकी चुनाव में 55 प्रतिशत और ब्रिटेन में 69 फ़ीसदी मतादाताओं ने पिछले चुनावों में वोट डाला था.
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