पहलवानों ने किसान नेता नरेश टिकैत को सौंपे मेडल, गंगा में बहाने का कार्यक्रम पांच दिन के लिए स्थगित

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साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया समेत कई बड़े खिलाड़ी अपने मेडल गंगा में बहाने के लिए हरिद्वार पहुंचे.

पहलवानों के पहुंचने के बाद उनके आस पास बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए. इनमें से कुछ लोगों को ये अपील करते हुए सुना गया कि पहलवान अपने मेडल गंगा में न बहाएं.

पहलवानों के पहुंचने के घंटे भर बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान नेता नरेश टिकैत अपने समर्थकों के साथ पहलवानों को मनाने के लिए हरिद्वार में हर की पौड़ी पर पहुंचे.

इससे पहले उनके छोटे भाई राकेश टिकैत ने भी पहलवानों से अपील की थी कि वे गंगा में मेडल न बहाएं. पहलवानों ने अपने मेडल नरेश टिकैत को सौंप दिए हैं.

नरेश टिकैत ने पहलवानों से बात की और उन्हें गंगा में मेडल बहाने से रोक लिया है. वहां से आ रही तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि पहलवान अब हर की पौड़ी से उठ गए हैं.

वहीं पहलवानों के गंगा में मेडल बहाने का गंगा महासभा ने विरोध किया है. आजतक से बात करते हुए गंगा महासभा का कहना है, "यहां सनातनी लोग पूजा पाठ के लिए आते हैं. ये कोई राजनीति का अखाड़ा नहीं है. ये कोई जंतर मंतर नहीं है. ये दिल्ली का कोई मैदान नहीं है कि आप यहां पर आएंगे और इसे अपनी राजनीति का अखाड़ा बनाएंगे."

पहलवानों ने बीजेपी सांसद और कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. पहलवान बृजभूषण सिंह की गिरफ्तारी की मांग को लेकर 23 अप्रैल से जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन कर रहे थे, जिसे 28 मई को दिल्ली पुलिस ने हटवा दिया था.

28 मई को नए संसद भवन के उद्घाटन के दिन ही पहलवानों ने महिला सम्मान महापंचायत का एलान किया था. जब पहलवान संसद भवन की तरफ महापंचायत करने के लिए बढ़े तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें और उनके समर्थकों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया.

दिल्ली पुलिस पहलवानों और किसान नेताओं को अलग अलग थानों में ले गई, जिन्हें देर रात छोड़ा गया. इसी बीच पुलिस ने जंतर-मंतर से पहलवानों के धरना प्रदर्शन को भी हटा दिया और उनके गद्दे, कूलर गाड़ी में भरवाकर कहीं और भेज दिए.

अब दिल्ली पुलिस का कहना है कि पहलवानों को जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं दी जाएगी.

मेडल बहाने से पहले पहलवानों ने क्या कहा?

पुलिस ने सोमवार को पहलवानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की. इसमें पहलवानों और प्रदर्शनकारियों पर दंगा भड़काने, ग़ैरक़ानूनी जमावड़ा करने, सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने, सरकारी कर्मचारी के आदेश का उल्लंघन करने, सरकारी कर्मचारी को चोट पहुंचाने और सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकने के लिए आपराधिक बल का इस्तेमाल करने जैसे आरोप लगाए गए हैं.

मेडल गंगा में बहाने से पहले पहलवानों ने अपने अपने ट्विटर हैंडल से एक खत शेयर किया, जिसमें 28 मई को दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं.

पहलवानों ने लिखा, "28 मई को जो हुआ वह आप सबने देखा. पुलिस ने हम लोगों के साथ क्या व्यवहार किया. हमें कितनी बर्बरता से गिरफ्तार किया. हम शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे. हमारे आंदोलन की जगह को भी पुलिस ने तहस-नहस कर हमसे छीन लिया और अगले दिन गंभीर मामलों में हमारे ऊपर ही एफआईआर दर्ज कर दी गई."

"क्या महिला पहलवानों ने अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न के लिए न्याय मांगकर कोई अपराध कर दिया है. पुलिस और तंत्र हमारे साथ अपराधियों जैसा व्यवहार कर रही है, जबकि उत्पीड़क खुली सभाओं में हमारे ऊपर फबतियां कस रहा है."

"अब लग रहा है कि हमारे गले में सजे इन मेडलों का कोई मतलब नहीं रह हया है. इनको लौटाने की सोचने भर से हमें मौत लग रही थी लेकिन अपने आत्म सम्मान के साथ समझौता करके भी क्या जीना."

किसने क्या कहा?

जब पहलवान जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन कर रहे थे तो कई बार किसान नेता राकेश टिकैत वहां पहुंचे थे और उनका समर्थन किया था.

उन्होंने पहलवानों से मेडलों को गंगा में न बहाने की अपील भी की. ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा, "यह मेडल देश और तिरंगे की शान है. हमारा सभी पहलवानों से अनुरोध है कि ऐसा कदम मत उठाओ."

पहलवानों का आंदोलन, कब क्या हुआ?

21 अप्रैल- महिला पहलवानों ने दिल्ली के कनॉट प्लेस थाने में बृजभूषण सिंह के ख़िलाफ़ शिकायत की, लेकिन पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज नहीं की.

23 अप्रैल- दूसरी बार जंतर-मंतर पर धरना शुरू.

24 अप्रैल- पालम 360 खाप के प्रधान चौधरी सुरेंद्र सोलंकी समर्थन करने जंतर मंतर पहुंचे और दूसरी खापों से समर्थन की अपील की.

25 अप्रैल- विनेश फोगाट समेत 6 अन्य महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ एफ़आईआर की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा.

26 अप्रैल- जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक जंतर-मंतर पहुंचे और कहा, "ये लड़ाई हमारे देश की बेटियों के सम्मान की लड़ाई है. दिल्ली में जो बेशर्म लोग बैठे हैं, उन्हें मुक़दमा दर्ज करने और बृजभूषण सिंह को बर्ख़ास्त करने में एक मिनट का समय भी नहीं लगाना चाहिए था. "

27 अप्रैल- यौन उत्पीड़न के आरोपों का बृजभूषण सिंह ने कविता सुना कर जवाब दिया.

28 अप्रैल- इंडियन एक्सप्रेस अख़बार से विनेश फोगाट की बातचीत के बाद देश के कई बड़े खिलाड़ियों और सितारों ने पहलवानों के समर्थन में ट्वीट किए.

इसमें ओलंपियन नीरज चोपड़ा, स्वरा भास्कर, अभिनव बिंद्रा, सानिया मिर्ज़ा, वीरेंद्र सहवाग, इरफ़ान पठान, कपिल देव, सोनू सूद जैसे खिलाड़ी शामिल थे. विनेश ने कहा था कि सभी बड़े खिलाड़ी उनके धरना प्रदर्शन पर चुप हैं.

दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ दो एफ़आईआर दर्ज की, जिसमें से एक एफ़आईआर पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज हुई.

पहलवानों ने आरोप लगाया कि रात में दिल्ली पुलिस ने बिजली-पानी काट दिया और धरना प्रदर्शन स्थल खाली करने का दबाव बनाया.

29 अप्रैल- कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी धरना स्थल पहुंचीं और कहा, "जब महिला का शोषण होता है तो सरकार मौन हो जाती है."

3 मई- रात में जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे पहलवानों पर हमला, पुलिस के साथ धक्का मुक्की. पहलवानों ने दावा किया कि 'पुलिस ऐक्शन' में उनके दो साथी घायल हुए हैं. समर्थन करने पहुंचे नेताओं और लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया. रात भर हंगामा चलता रहा.

7 मई- पहलवानों ने जंतर मंतर पर कैंडल मार्च किया.

8 मई- कई प्रदेशों के किसान संगठन समर्थन करने जंतर मंतर पहुंचे.

11 मई- पहलवानों ने सिर पर काली पट्टियां बांधकर ब्लैक डे मनाया. नाबालिग़ महिला पहलवान ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज करवाया.

20 मई- पहलवान फ़िरोजशाह कोटला मैदान में चल रहे आईपीएल मैच को देखने पहुंचे थे. पहलवानों ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने स्टेडियम में जाने नहीं दिया.

21 मई- हरियाणा के रोहतक में पहलवानों के समर्थन में खाप पंचायत हुई. पंचायत में बृजभूषण शरण सिंह को गिरफ़्तार करने और नार्को टेस्ट करवाने की मांग की गई.

22 मई- बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि वे अपना नार्को, पॉलीग्राफ़ और लाइ डिटेक्टर टेस्ट करवाने के लिए तैयार हैं, लेकिन शर्त है कि उनके साथ विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया का भी ये टेस्ट होना चाहिए.

23 मई- जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन का एक महीना पूरा हुआ. पहलवानों ने जंतर-मंतर से इंडिया गेट के लिए पैदल मार्च किया.

25 मई- हरियाणा के जींद में हुई महापंचायत में हिस्सा लिया. सैकड़ों की संख्या में लोग पहलवानों का समर्थन करने के लिए पहुंचे थे.

27 मई- पहलवानों ने आरोप लगाया कि सरकार समझौता करने के लिए दबाव बना रही है.

28 मई- नए संसद भवन उद्घाटन के दिन, संसद भवन के सामने ही पहलवानों ने महिला सम्मान महापंचायत रखी थी, जिसमें हिस्सा लेने के लिए कई राज्यों के किसान नेता और समर्थक जंतर मंतर पहुंचे थे. जैसे ही पहलवानों ने संसद भवन की तरफ कदम बढ़ाए, दिल्ली पुलिस ने बल प्रयोग किया और पहलवानों को हिरासत में ले लिया.

28 मई- दिल्ली पुलिस ने साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, संगीता फोगाट, और बजरंग पुनिया समेत प्रदर्शनकारियों और धरने के आयोजकों पर एफ़आईआर दर्ज की है. इसमें पहलवानों और प्रदर्शनकारियों पर दंगा भड़काने, ग़ैरक़ानूनी जमावड़ा करने, सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने जैसे आरोप लगाए गए हैं.

30 मई- पहलवानों ने गंगा में मेडल बहाने की घोषणा की.

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