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बीजेपी ने शुरू किया 'सूफ़ी संवाद', पार्टी की सोच क्या है? - प्रेस रिव्यू
भारतीय जनता पार्टी ने मुस्लिम समुदाय तक पहुंचने के लिए 'सूफ़ी संवाद' कार्यक्रम शुरू किया है. 2024 के आम चुनावों को देखते हुए पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चे को इसकी ज़िम्मेदारी सौंपी गई है.
द हिंदू अख़बार के मुताबिक़, इसके लिए बीजेपी ने 150 ग़ैर-राजनीतिक लोगों की एक टीम बनाई है.
अख़बार के मुताबिक़, बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दीक़ी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर सूफ़ी समुदाय तक पहुंचने के लिए यह किया गया है जो शांति और सद्भाव के पैरोकार हैं.
अख़बार के अनुसार, कार्यक्रम के मीडिया कोऑर्डिनेटर यासिर जिलानी ने बताया कि 30 राज्यों में सूफ़ी दरगाहों पर काम करने वाले लोग सूफ़ी संवाद के लिए बीजेपी मुख्यालय में इकट्ठा हुए हैं.
उन्होंने बताया कि कार्यक्रम का मक़सद मुस्लिम समुदाय के बीच जाना है. इस सूफ़ी संवाद कार्यक्रम की मदद से मुस्लिम समुदाय के बीच यह बताया जाएगा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने बिना जाति, पंथ या समुदाय को देखे सभी के लिए काम किया है.
अख़बार के मुताबिक़, सूफ़ी संवाद के तहत देशभर में अलग-अलग कार्यक्रम किए जाएंगे. ज़्यादातर कार्यक्रम उन ज़िलों को ध्यान में रखकर किए जाएंगे जहां पर मुस्लिम आबादी 20 प्रतिशत या उससे अधिक है.
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, केरल, बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों को शामिल किया जाएगा, वहीं उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मेरठ, रामपुर और आजमगढ़ जैसे ज़िलों पर खास ध्यान दिया जाएगा.
सूफ़ी संवाद के ज़रिए मुस्लिम समुदाय के बीच नरेंद्र मोदी सरकार की तरफ़ से चलाई जा रही योजनाओं और उससे होने वाले लाभ को प्रचारित करने की एक कवायद है.
विजय चौक पर रोका विपक्षी सांसदों का मार्च
बुधवार को अदानी मामले में संयुक्त संसदीय कमेटी यानी जेपीसी की मांग को लेकर विपक्षी नेताओं ने प्रवर्तन निदेशालय के मुख्यालय तक मार्च करने की कोशिश की, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें विजय चौक पर ही रोक दिया.
इस ख़बर को इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने पहले पन्ने पर जगह दी है. अख़बार के मुताबिक़, विपक्षी नेताओं ने कहा कि इस मार्च में 18 पार्टियों के नेताओं ने हिस्सा लिया.
विपक्ष का कहना है कि केंद्र की बीजेपी सरकार अदानी मामले से ध्यान हटाने के लिए राहुल गांधी पर हमले कर रही है.
अख़बार के अनुसार, इस प्रदर्शन में तृणमूल कांग्रेस ने हिस्सा नहीं लिया और न ही टीएमसी विपक्ष के साथ अदानी मामले में जेपीसी जांच की मांग करने वालों में शामिल है.
प्रदर्शन में टीएमसी के साथ-साथ नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी ने भी हिस्सा नहीं लिया.
प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "हम सभी प्रवर्तन निदेशालय जा रहे हैं, लेकिन सरकार ने हमें रोक दिया है. सरकार नहीं चाहती कि हम कोई मार्च निकालें."
"एक व्यक्ति ने एलआईसी, एसबीआई और दूसरे बैंकों को बर्बाद कर दिया है. लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई इन संस्थाओं में भरोसे के साथ जमा की है, लेकिन उनका सारा पैसा एक व्यक्ति कौ सौंप दिया गया है."
राहुल गांधी का नया हमला
राहुल गांधी ने भारत के मिसाइल और रडार अपग्रेड कॉन्ट्रैक्ट को अदानी के स्वामित्व वाली एक संदिग्ध एलारा नामक विदेशी कंपनी को देने का आरोप लगाया है.
इस ख़बर को टेलीग्राफ अखबार ने अपने पहले पन्ने पर जगह दी है. अखबार ने अपनी ख़बर में राहुल गांधी के उस ट्वीट के बारे में लिखा है जिसमें उन्होंने पूछा है कि एलारा कंपनी को कौन कंट्रोल करता है? और अज्ञात विदेशी कंपनियों को रणनीतिक रक्षा उपकरणों का नियंत्रण देकर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता क्यों किया जा रहा है?
अख़बार के मुताबिक़, कांग्रेस नेता जयराम रमेश का कहना है कि मॉरीशस स्थित एलारा इंडिया ऑपर्च्युनिटीज़ फ़ंड, बेंगलुरु स्थित रक्षा फ़र्म अल्फ़ा डिज़ाइन टेक्नोलॉजीज़ के सह स्वामित्व में है. इसमें अदानी डिफ़ेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज़ की 26 प्रतिशत और एलारा फ़ंड की 25.65 प्रतिशत हिस्सेदारी सीधे और एक मध्यस्थ फ़र्म के माध्यम से है.
जयराम रमेश का आरोप है कि दिसंबर 2022 तक एलारा इंडिया ऑपर्च्युनिटीज़ फ़ंड के पास 24 हज़ार 600 करोड़ रुपये की इक्टिवी थी, जिसमें से असामान्य रूप से 99 प्रतिशत यानी 24 हज़ार 335 करोड़ रुपये तीन कंपनियों, अदानी एंटरप्राइजेज़, अदानी ट्रांसमिशन और अदानी टोटल गैस में निवेश किए गए थे.
शादी के लिए लड़कियों की उम्र 21 साल
द हिंदू अखबार के मुताबिक़, सरकार का कहना है कि बाल विवाह संशोधन विधेयक 2021 संसद में पास होने के दो साल बाद प्रभावी होगा.
बाल विवाह संशोधन विधेयक 2021 में सरकार ने लड़कियों के लिए शादी की उम्र को 18 से बढ़ाकर 21 साल करने का फ़ैसला किया है.
अख़बार के मुताबिक़, सरकार का कहना है कि इन दो सालों में इस ज़रूरी सुधार के लिए लोग तैयार हो पाएंगे.
यह विधेयक फ़िलहाल संसदीय स्थायी समिति के पास है. अख़बार के मुताबिक़, महिला और बाल विकास मंत्रालय ने राज्यसभा को बताया कि इसमें भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम 1872, पारसी विवाह और तलाक़ अधिनियम 1936, मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट 1937, स्पेशल मैरिज एक्ट 1954, हिंदू मैरिज एक्ट 1955 और फ़ॉरेन मैरिज एक्ट 1969 में शादी की उम्र से संबंधित संशोधन करने के प्रावधान हैं.
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