BBC Hindi: बीते हफ़्ते की वो ख़बरें, जो शायद आप मिस कर गए

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नमस्कार!

आशा है कि आप स्वस्थ होंगे और आपके आस-पास सब अच्छा होगा.

हमें मालूम है कि हफ़्ते भर आपके पास वक़्त की कुछ कमी रही होगी.

इस वजह से आप देश दुनिया की अहम ख़बरों को देख या पढ़ नहीं पाए होंगे.

इसी के चलते हम लाए हैं आपके लिए बीते हफ़्ते की कुछ अहम ख़बरें. शायद इन ख़बरों में से कुछ पर आपकी नज़र नहीं गई होगी.

अगर आपने ये पांच ख़बरें पढ़ लीं तो समझिए कि आपको बीते हफ़्ते की ख़ास खबरें पता चल गईं.

भारत की कामयाबी में क्या रूस ने लगाया अड़ंगा? क्या हैं विकल्प

दुनिया भर की 20 बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों के विदेश मंत्री नई दिल्ली में जुटे थे.

भारत की डिप्लोमैसी के लिए यह परीक्षा की तरह थी कि इस बैठक का अंत सबकी सहमति से एक साझा बयान के साथ हो. लेकिन यूक्रेन संकट के कारण ऐसा नहीं हो पाया.

इस साल भारत की अध्यक्षता में जी-20 देशों के मंत्रियों की यह दूसरी बैठक थी.

दोनों बैठकों में भारत रूस और चीन को साझा बयान पर सहमत नहीं करा पाया. इस बार भी रूस और चीन साझे बयान के दो पैराग्राफ से सहमत नहीं थे. भारतीय विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर ने बैठक से अलग अमेरिकी, चीनी और रूसी विदेश मंत्री से मुलाक़ात की थी ताकि एक साझा बयान पर सहमति बन सके.

लेकिन यूक्रेन युद्ध के कारण बैठक बुरी तरह से विभाजित दिखी. पूरी कहानी यहां पढ़ें.

बॉलीवुड के दीवाने भारत पर कैसे चढ़ रहा है कोरियाई ड्रामे का ख़ुमार

एक हादसे के बाद दुश्मन देश में फंसी एक युवती को सेना का एक हैंडसम अधिकारी बचाता है.

उन्हें एक दूसरे से प्यार हो जाता है. लेकिन दोनों की प्रेम कहानी में कई रुकावटें हैं. इनमें वो लकीर भी शामिल है जो दोनों देशों को बांटती है.

कुछ साल पहले अगर आप ये कहानी किसी भारतीय को सुनाते तो उन्हें सहसा साल 2004 की बॉलीवुड फ़िल्म 'वीरा ज़ारा' की याद आ जाती.

शाहरुख ख़ान और प्रीति ज़िंटा ने इस फ़िल्म भारत और पाकिस्तान के किरदारों को निभाया था. इन दोनों पड़ोसी देशों के बीच संबंधों में खटास की वजह से तनाव रहता है.

दरअसल, 2019 के कोरियाई ड्रामा (के ड्रामा) क्रैश लैंडिंग ऑन यू (सीएलओवाई) की कहानी भी इससे मिलती जुलती थी. उस कहानी के केंद्र में पड़ोसी देश दक्षिण और उत्तर कोरिया हैं.

'ड्रामा ओवर फ्लॉवर्स' नामक 'के ड्रामा पॉडकास्ट' की को होस्ट परोमा चक्रवर्ती कहती हैं, "दुनिया ने सीएलओवाई को इसलिए पसंद किया क्योंकि इस शो ने दोनों देशों के साझा ग़म को साफ़ साफ़ दिखाया. लेकिन मुझे लगता है कि दुनिया भर में दक्षिण एशियाई मूल के लोगों ने इसे अलग तरह से लिया." पूरी कहानी यहां पढ़िए.

मीराबाई चनू लगातार दूसरी बार बनीं बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर

वेटलिफ़्टर मीराबाई चनू ने 2022 का बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर अवॉर्ड जीत लिया है. चनू को पब्लिक वोटिंग के नतीजे आने के बाद विजेता घोषित किया गया.

2021 का बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर अवॉर्ड भी उन्होंने ही जीता था.

मणिपुर में पैदा हुईं चनू ने बचपन में जलावन के लिए लकड़ी इकट्ठा करते हुए वेटलिफ़्टिंग के गुर सीखने शुरू कर दिए थे.

साल 2020 में उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में वेटलिफ़्टिंग का सिल्वर मेडल जीता था. ऐसा करने वाली वह पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं.

इसके बाद 2022 में इंग्लैंड के बर्मिंघम में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने वेटलिफ़्टिंग का गोल्ड मेडल जीता. इसी साल आयोजित वर्ल्ड वेटलिफ़्टिंग चैंपियनशिप में भी उन्होंने सिल्वर मेडल जीता.

नई दिल्ली में आयोजित अवॉर्ड समारोह में पुरस्कार लेने के बाद मीराबाई चनू ने कहा, "शुक्रिया बीबीसी, एक बार फिर से ये अवॉर्ड देने के लिए. इस अवॉर्ड के लिए मैं अपने कोच, परिवार, फेडरेशन और सभी को धन्यवाद कहना चाहती हूं."

चीन में महिलाएं मां बनने से इनकार क्यों कर रही हैं?

चीन की आबादी में बड़ा बदलाव हो रहा है. छह दशकों में ये पहली बार है जब चीन की आबादी कम हो रही है.

नए डाटा के मुताबिक़ चीन की अधिकतर महिलाएं या तो एक बच्चा चाहती हैं या बच्चा पैदा ही नहीं करना चाहती हैं.

चाइना पॉपुलेशन एंड डेवलपमेंट रिसर्च सेंटर के डेटा के मुताबिक़, चीन में बिना बच्चे वाली औरतों की तादाद साल 2015 में 6 प्रतिशत थी जो 2020 में बढ़कर 10 प्रतिशत पहुंच गई. इस डेटा के मुताबिक़ चीन में बच्चा पैदा करने की उम्र वाली महिलाओं में भी बच्चा पैदा करने की इच्छा कम हो रही है. चीन की महिलाओं में साल 2017 में बच्चे पैदा करने की औसत इच्छा संख्या 1.76 थी जो 2021 में कम होकर 1.64 हो गई है.

हालांकि सिंगापुर, जापान, दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देशों में भी प्रजनन दर 2 के नीचे है. वहां अधिकतर लोग ये कहते हैं कि वो दो बच्चे पैदा करना चाहते हैं. लेकिन चीन में बात इससे अलग है. पूरी स्टोरी यहां पढ़िए.

जासिया अख़्तर: चरमपंथियों के ख़ौफ़ से छोड़ा था क्रिकेट, अब दिल्ली कैपिटल्स से खेलेंगी

34 साल की क्रिकेटर जासिया अख़्तर का भारतीय टीम के लिए खेलने का सपना अभी तक अधूरा है, लेकिन महिला प्रीमियर लीग तक के अपने सफ़र से उन्होंने तमाम लड़कियों के सपनों को एक नया आसमान दिया है.

महिला प्रीमियर लीग की पाँच टीमों में से एक दिल्ली कैपिटल्स की टॉप ऑर्डर बल्लेबाज़ जासिया अख़्तर को ज़्यादा लोग नहीं जानते लेकिन वो अपने इलाक़े में किसी स्टार से कम नहीं हैं.

जासिया भारत प्रशासित कश्मीर के उस शोपियां ज़िले से आती हैं जो गाहे-बगाहे चरमपंथ से जुड़ी घटनाओं की वजह से सुर्ख़ियों में रहता है.

जासिया ख़ुद भी इस चरमपंथ से जूझीं और एक समय पर उन्होंने बल्ला भी छोड़ दिया लेकिन उनके शिक्षक ख़ालिद हुसैन ने हौसला बढ़ाया और खेल जारी रखने को कहा. पूरी स्टोरी यहां पढ़िए.

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