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BBC Hindi: बीते हफ़्ते की वो ख़बरें, जो शायद आप मिस कर गए
हेलो. उम्मीद है कि आप अच्छे होंगे, खुश होंगे और सकरात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहे होंगे.
हम जानते हैं कि आप जैसे व्यस्त इंसान के लिए सारी ख़बरों पर नज़र रखना मुश्किल रहता होगा.
ऐसे में हम लाए हैं बीते सप्ताह की कुछ दिलचस्प और अहम ख़बरें, जिन पर शायद आपकी नज़र ना गई हो.
ये पांच ख़बरें आपने पढ़ लीं तो ये समझिए कि आप पूरी तरह से अपडेटेड हो गए.
तो फिर इंतज़ार किस बात का? पढ़िए...
भारत में AIDS का पहला मामला ऐसे मिला था
30 साल पहले भारत में जानलेवा एचआईवी एड्स का पहला केस मिला था, जब छह सेक्स वर्कर्स के ब्लड सैंपल की जांच के दौरान उन्हें पॉज़िटिव पाया गया.
यह मूल रूप से एक युवा वैज्ञानिक के प्रयासों से संभव हो पाया था. लेकिन आज उनके इस काम को भुला दिया गया है.
यह साल 1985 की बात है, चेन्नई के एक मेडिकल कॉलेज की 32 साल की माइक्रोबायोलाजी की छात्रा सेलप्पन निर्मला अपने लेख का विषय ढूंढ रही थीं.
उनके शिक्षक और मेंटर सुनिति सोलोमॉन ने पहली बार सेलप्पन निर्मला को एचआईवी एड्स के लिए लोगों की जांच करने की सलाह दी. अमेरिका में तो एड्स के मामलों का औपचारिक रूप से पता लगाने की शुरुआत 1982 में हुई थी.
भारत में एड्स का पहला मामला मिलने की कहानी बेहद दिलचस्प है. पूरी कहानी यहां पढ़िए.
'कश्मीर फ़ाइल्स' को 'भद्दा और प्रोपेगेंडा' बताने वाले नदाव लपिड कौन हैं?
गोवा में 53वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोह यानी आईएफ़एफ़आई में तब एक बड़ा विवाद पैदा हो गया, जब फ़ेस्टिवल के ज्यूरी चेयरमैन इसराइली फ़िल्म मेकर नदाव लपिड ने 'कश्मीर फ़ाइल्स' को 'प्रोपेगेंडा और भद्दा' क़रार दिया.
सोमवार को 53वें इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल ऑफ़ इंडिया का समापन समारोह था और चुनी हुई फ़िल्मों की घोषणा से पहले नदाव लपिड को मंच पर बुलाया गया.
लपिड ने कहा, "हमने डेब्यू कंपटीशन में सात फ़िल्में और इंटनेशनल कंपटीशन में 15 फ़िल्में देखीं. इनमें 14 फ़िल्में सिनेमैटिक क्वालिटी की थीं और इन्होंने बहुत शानदार बहस छेड़ी. 15वीं फ़िल्म 'कश्मीर फ़ाइल्स' को देख हम सभी विचलित और हैरान थे. यह एक प्रोपेगैंडा और भद्दी फ़िल्म जैसी लगी. जो कि इस तरह के प्रतिष्ठित फ़िल्म फ़ेस्टिवल के कलात्मक कंपटीशन के अयोग्य थी."
नदाव लपिड आख़िर हैं कौन? पूरी कहानी यहां पढ़िए.
वो 'अंधेरा' गांव जहां आज़ादी के 75 साल बाद भी नहीं आई बिजली
गुजरात के बनासकांठा का राघानेसडा गांव. यहां के बाशिंदों का कहना है कि उन्होंने अब तक अपने गांव में बिजली नहीं देखी है और इसे वे आख़िरी दर्जे का गांव बताते हैं.
हालांकि भारत-पाकिस्तान सीमा से 30 किलोमीटर दूर के इस गांव में 1400 हेक्टर से ज़्यादा ज़मीन पर 700 मेगावट से ज़्यादा की क्षमता का सौर ऊर्जा पार्क बनाया गया है.
गांव से कई किलोमीटर दूर तक हज़ारों सोलर पैनल्स बिछाए गए हैं.
ज़मीन पर हक़ीक़त क्या है? पूरी कहानी यहां पढ़िए.
क्यों वायरल हुआ ये लेस्बियन कपल?
"हम आज़ाद हैं, अपने सपने को जी सकते हैं."
इस एक बयान से समझी जा सकती है फ़ातिमा नूरा और अदीला नासरीन की खुशी.
केरल की ये महिला समलैंगिक जोड़ी इस साल की शुरुआत से ही सुर्ख़ियों में है, जब केरल की एक अदालत ने दोनों महिलाओं को दोबारा एक साथ रहने की इजाज़त दे दी थी.
नूरा और अदीला के परिवार वालों ने जबरन दोनों को अलग कर दिया था. परिवार के विरोध के बाद नूरा और अदीला ने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया और एक याचिका के ज़रिए एक साथ रहने की गुहार लगाई थी.
पूरी कहानी यहां पढ़िए.
उर्फ़ी जावेद लेखक चेतन भगत से क्यों भिड़ गईं?
रियालिटी टीवी स्टार उर्फ़ी जावेद और लेखक चेतन भगत के बीच एक टिप्पणी को लेकर विवाद हो गया है.
चेतन भगत ने एक कार्यक्रम में बात करते हुए कहा था कि 'उर्फ़ी जावेद की तस्वीरें लड़कों का ध्यान भटका रही हैं.'
विवाद बढ़ने के बाद अब चेतन भगत ने कहा है कि, "मैंने युवाओं से सिर्फ़ यह कहा था कि वो करियर पर ध्यान दें, इंस्टाग्राम पर समय बर्बाद ना करें."
चेतन भगत के बयान पर उर्फी जावेद ने क्या कहा? पूरी कहानी यहां पढ़िए.
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