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बीजेपी का दामन थामने वाले मेट्रोमैन ई श्रीधरन ने क्यों छोड़ी सक्रिय राजनीति?
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरु से बीबीसी के लिए
- प्रकाशित
केरल में बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में पेश किए गए मेट्रोमैन ई श्रीधरन ने सक्रिय राजनीति से संन्यास की घोषणा कर दी है. हालांकि उन्होंने कहा है कि वो बीजेपी के साथ बने रहेंगे.
उन्होंने बीबीसी हिंदी से कहा, "आपसे किसने कहा कि मैं राजनीति छोड़ रहा हूं? मैंने राजनीति नहीं छोड़ी है. मैंने सक्रिय राजनीति छोड़ी है. इन दोनों में बातों में बहुत फ़र्क़ है."
श्रीधरन ने बीबीसी से कहा, "मैंने सिर्फ़ ये कहा है कि मैं सक्रिय राजनीति छोड़ रहा हूं क्योंकि मैं बहुत भागदौड़ नहीं कर पाऊंगा. मैं कोई अधिकारिक पद नहीं चाहता हूं. मैं अभी भी बीजेपी में ही हैं, लेकिन सक्रिय राजनीति में नहीं हूं. इसका मतलब ये है कि मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा. मैं ये भी नहीं चाहूंगा कि कोई ज़िम्मेदारी भरा पद मुझे दिया जाए. लेकिन अगर मुझसे कोई सलाह-मशविरा लिया जाएगा तो मैं उसके लिए हमेशा उपलब्ध रहूंगा."
स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं
श्रीधरन कहते हैं कि उनके इस फ़ैसले की दो वजहें हैं. "पहली तो मेरी उम्र. मैं अब 90 साल का हो गया हूं और दूसरी ये कि बीते चुनावों के बाद मेरे स्वास्थ्य को दो झटके लगे हैं."
"2009 में दिल्ली में मेरी बाइपास सर्जरी हुई थी और जब चुनाव हो रहे थे, उससे पहले मैं बहुत एक्टिव था, बहुत गतिशील था, कोई समस्या नहीं थी. चुनाव के दो महीने बाद मेरे सीने में दर्द रहने लगा. मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा स्टेंट लगवाने पड़े. बात वहीं ख़त्म नहीं हुई."
"इसके बाद से मेरी नब्ज़ में समस्या हो गई. एक समय मेरी नब्ज़ बहुत धीमी चल रही थी तो लगभग दो महीने पहले मुझे पेसमेकर लगवाना पड़ा. इन सब चीज़ों की वजह से मैं बहुत सक्रिय नहीं रह सकता हूं. मूल बात ये है. लेकिन मैं अब भी बीजेपी में हूं. मैं अब भी बीजेपी की केंद्रीय कार्यकारिणी में विशेष अतिथि हूं. मैंने अभी इस्तीफ़ा नहीं दिया है."
"आप जानते हैं कि अंत की तरफ़, दो साल भी बहत फ़र्क पैदा करते हैं... चुनाव से पहले मैं बिल्कुल स्वस्थ था, मेरे अंदर काफ़ी ताक़त थी, जोश था, लेकिन अब बात ऐसी नहीं है. बावजूद इसके मैं पार्टी में हूं. मैं उपलब्ध हूं. वो चाहें तो अब भी मुझसे सलाह ले सकते हैं."
श्रीधरन की शख़्सियत
अप्रैल में चुनावों से कुछ पहले ही ई श्रीधन ने बीजेपी का दामन थामा था और पलक्कड सीट से चुनाव लड़ा था. तब 88 वर्षीय श्रीधरन सबसे उम्रदराज़ उम्मीदवारों में शामिल थे. चुनाव अभियान के दौरान श्रीधरन दोपहर में एक छोटा ब्रेक लेकर दिन भर प्रचार करते थे. वो विवादित मुद्दों पर सख़्त प्रतिक्रिया देने में परहेज़ नहीं करते थे. श्रीधरन 3859 वोटों के मामूली अंतर से चुनाव हार गए थे.
टेक्नोक्रैट श्रीधरन सबसे पहले ऐतिहासिक पंबन पुल का पुनरोद्धार करने के बाद चर्चा में आए थे. तमिलनाडु को रामेश्वरम से जोड़ने वाला ये पुल चक्रवात में तबाह हो गया था. इसके बाद जब उन्होंने दिल्ली के मेट्रो प्रोजेक्ट पर काम किया तो उन्हें मेट्रोमैन के रूप में पहचान मिली. भारत की पहली मेट्रो सेवा के वो आधार स्तंभ थे. बाद में इसी मॉडल पर देश के कई बड़े शहरों में मेट्रो चली.
जब उन्होंने बीजेपी में शामिल होकर राजनीति करने और केरल में पार्टी का मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनने का निर्णय लिया तो राजनीतिक हलकों में बहुत से लोग हैरान हो गए. लेकिन शशि थरूर जैसे नेताओं ने कहा था कि उनका चुनाव पर कोई असर नहीं होगा.
केरल विधानसभा चुनावों में बीजेपी कोई भी सीट नहीं जीत सकी थी.
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