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सोनिया गांधी के एतराज़ और संसद में हंगामे के बाद सीबीएसई ने हटाया ये सवाल
संसद में सोमवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE द्वारा दसवीं की अंग्रेजी विषय की परीक्षा में पूछे गए एक सवाल का मुद्दा उठा.
कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अंग्रेजी के प्रश्नन-पत्र में आए पैसेज को महिला विरोधी बताया और सीबीएसई बोर्ड और शिक्षा मंत्रालय से इस प्रश्न को वापस लेकर माफ़ीनामे की मांग की.
साथ ही उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्रालय को इस पूरे मामले की समीक्षा करनी चाहिए और ये देखा जाना चाहिए कि ऐसा दोबारा ना हो.
इस बीच सीबीएसई ने एक सर्कुलर जारी कर कहा है कि अंग्रेजी भाषा और लिटरेचर पेपर के एक सेट में पूछा गया पैसेज बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरुप नहीं था.
उसने कहा है कि 'हमें जो फीडबैक दिया गया, इस मुद्दे को हमने विशेषज्ञों की कमेटी के समक्ष रखा है'.
सर्कुलर में आगे कहा गया है कि उनकी सिफ़ारिश के बाद ये फैसला लिया गया है कि इस पैसेज नंबर 1 और उससे जुड़े सवालों को हटाया जा रहा है. और इस पैसेज के लिए छात्रों को पूरे अंक दिए जाएंगे.
साथ ही इस मामले में समानता लाने के लिए हर सेट के पैसेज नंबर 1 में दिए गए सवालों के लिए पूरे अंक दिए जाएंगे.
क्या है मामला
दरअसल दसवीं कक्षा के लिए 11 दिसंबर 2021, को अंग्रेज़ी भाषा और लिटरेचर की परीक्षा हुई थी.
इसके पर्चे के एक पैसेज में पूछी गई कुछ लाइनों पर आपत्ति जताई गई थी और उसे महिला विरोधी बताया गया था.
इसी मुद्दे को सोनिया गांधी ने शून्यकाल में उठाया और कहा, ''मैं सरकार का ध्यान 11 दिसंबर को सीबीएसई की दसवीं कक्षा की परीक्षा में पूछे गए सवाल पर दिलाना चाहूंगी. इसमें एक पैसेज रूढ़िवादी सोच को दर्शाता है जिससे देश भर में आक्रोश उपजा है.''
उन्होंने कहा,"इस पैसेज में घटिया वक्तव्य हैं, उदाहरण के तौर पर मैं क्वोट करना चाहूंगी, 'महिलाओं को स्वतंत्रता मिलना कई तरह की सामाजिक और पारिवारिक समस्याओं का मुख्य कारण हैं'.''
इस बीच संसद में 'शेम' 'शेम' यानी 'शर्मनाक है' के नारे लगे.
इसके बाद सोनिया ने दूसरा उदाहरण दिया जिसमें लिखा गया था कि ''पत्नियां अपने पतियों की बात नहीं सुनती है जिसकी वजह से बच्चे और नौकर अनुशासनहीन होते हैं''.
सोनिया गांधी ने संसद में अपना वक्तव्य पढ़ते हुए कहा कि ये पूरा पैसेज ही निंदनीय विचार को बताता है और इसमें पूछे गए सवाल संवेदनहीन हैं.
उन्होंने कहा साथ ही मैं संसद सें आग्रह करती हूं कि शिक्षा मंत्रालय को पाठ्यक्रम और परीक्षा में जेंडर सेंसिटिविटि मानकों की समीक्षा करनी चाहिए.
सोशल मीडिया पर भी हंगामा
दसवीं परीक्षा में पूछे गए सवाल पर टिवटर पर भी लोग प्रतिक्रिया देने लगे और इसकी अलोचना करने लगे.
कांगेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने भी परीक्षा में पूछे गए सवाल पर ट्वीट कर पूछा था,''अविश्वसनीय. क्या वाकई हम बच्चों को ये बकवास पढ़ा रहे हैं?साफतौर पर बीजेपी सरकार महिलाओं पर ऐसे प्रतिगामी विचारों का समर्थन करती हैं.''
इस मुद्दे को संसद में भी कांगेस, डीएमके, आईयूएमएल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, नेशनल कॉंफ्रेंस ने उठाया और महिला विरोधी बताकर संसद से वॉक आउट किया.
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