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छठ पर्व के लिए दिल्ली, यूपी और उत्तराखंड में सरकारी छुट्टी का एलान
छठ पर्व को देखते हुए दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की राज्य सरकारों ने छुट्टी का एलान किया है.
भारत में छठ पर्व मनाया जा रहा है. मंगलवार को छठ पूजा के दूसरे दिन लोगों ने खरना पूजा की.
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगलवार को छठ पूजा के मौके पर आम लोगों को बधाई दी.
उन्होंने कहा कि ये त्योहार सूर्य देव और प्रकृति के साथ हमारे संबंधों की एक आद्वितीय अभिव्यक्ति है.
राष्ट्रपति ने कहा कि छठ पूजा देश में मनाए जाने वाले सबसे पुराने त्योहारों में से एक है.
उन्होंने कहा, "इसका महत्व डूबते सूर्य को अर्घ्य देने में है. श्रद्धालु दिन के दौरान कठोर उपवास करने के बाद त्योहार की समाप्ति पर नदियों और तालाबों के पानी में पवित्र स्नान करते हैं."
राष्ट्रपति ने भारत और विदेशों में रहने वाले सभी देशवासियों को छठ पूजा की बधाई भी दी.
उन्होंने अपनी शुभकामना संदेश में कहा, "ये त्योहार प्रकृति के साथ हमारे शाश्वत संबंधों को मजबूत करे जिससे पर्यावरण की रक्षा करने में हमें मदद मिलेगी."
ये त्योहार मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाक़ों में मनाया जाता है.
इस क्षेत्र के लोग भारत में जहां भी बसे हैं, वहां छठ का त्योहार भी पहुंच गया है.
छठ वो त्योहार है जिसमें डूबते और उगते सूरज दोनों ही वक्त का बराबर महत्व है.
चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व को छठ पूजा, डाला छठ, छठी माई पूजा, सूर्य षष्ठी पूजा आदि कई नामों से जाना जाता है.
श्रद्धालुओं की मान्यता है कि छठ के दिन सूर्य की उपासना से छठी माई प्रसन्न होती हैं. नेपाल के तराई इलाके में भी ये पर्व मनाया जाता है.
छठ का पहला दिन 'नहाय खाय' के रूप में मनाया जाता है, जिसमें घर की सफाई, फिर स्नान और शाकाहारी भोजन से व्रत की शुरुआत की जाती है.
दूसरे दिन व्रतधारी दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को भोजन करते हैं. इसे खरना कहा जाता है.
तीसरे दिन छठ का प्रसाद बनाया जाता है. प्रसाद के रूप में ठेकुआ, चावल के लड्डू और चढ़ावे के रूप में फल आदि भी शामिल होते हैं.
शाम को बांस की टोकरी में अर्घ्य का सूप सजाया जाता है और तालाब या नदी किनारे सामूहिक रूप से सूर्य को अर्घ्य दान किया जाता है.
चौथे दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी को उगते सूरज को अर्घ्य दिया जाता है. व्रतधारी दोबारा वहीं जमा होते हैं जहां पूर्व संध्या को अर्घ्य दिया था.
अर्घ्य देते वक्त छठ के प्रसाद को सूप में रखा जाता है. दोबारा पिछली शाम की प्रक्रिया की पुनरावृत्ति होती है.
छठ व्रत एक कठिन तपस्या की तरह माना जाता है. यह छठ व्रत अधिकतर महिलाओं द्वारा किया जाता है; कुछ पुरुष भी इस व्रत को रखते हैं.
ऐसा जरूरी नहीं है कि छठ पूजा पर महिलाएं सिर्फ नदी या नहर किनारे ही सूरज को अर्घ्य देती हैं.
जिन जगहों में ये व्यवस्था नहीं होती है, वहां अब महिलाएं छोटे तालाब, स्वीमिंग पूल, रबर से बने बाथटब, छोटे गड्ढे जिनमें पानी भरा होता है, से भी अर्घ्य देती हैं.
इस त्योहार के बारे में हिंदू धर्म के जानकार पंडित रामदेव पांडे ने बताया, ''छठ के बारे में कहा जाता है कि इस व्रत को पहली बार सतयुग में राजा शर्याति की बेटी सुकन्या ने रखा था.''
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