संजय सिंह कौन हैं जो समीर वानखेड़े की जगह आर्यन ख़ान ड्रग्स केस की जांच करेंगे

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नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने बीते शुक्रवार आर्यन ख़ान की गिरफ़्तारी से चर्चा में आए कॉर्डेलिया क्रूज़ ड्रग्स केस की जांच करने की ज़िम्मेदारी एक डीडीजी रैंक के अधिकारी आईपीएस संजय सिंह को सौंपी है.

अब तक इस मामले की जांच एनसीबी की मुंबई ज़ोन के निदेशक समीर वानखेड़े कर रहे थे. एनसीबी के इस फ़ैसले को समीर वानखेड़े के ख़िलाफ़ की गई दंडात्मक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि बीते कई दिनों से समीर वानखेड़े राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के केंद्र में थे.

हालांकि, समीर वानखेड़े ने कहा है कि उन्हें इन मामलों में जांच से नहीं हटाया गया है.

एनसीबी की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ में बताया गया है, "एनसीबी महानिदेशक ने एनसीबी मुख्यालय की ऑपरेशंस ब्रांच के अधिकारियों को लेते हुए एक विशेष जांच दल गठित किया है जो कि एनसीबी की मुंबई ज़ोनल यूनिट के छह मामलों की जांच करेगा. इन मामलों के तार राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैले हुए हैं. एनसीबी की ऑपरेशंस ब्रांच इन मामलों की गहन जांच करके इनके आगे और पीछे विस्तार की जांच करेगी."

एनसीबी ने ये भी बताया है कि किसी भी अधिकारी या अधिकारियों को उनके मौजूदा पदों से हटाया नहीं गया है, और वे ऑपरेशंस ब्रांच की जांच में सहयोग करते रहेंगे जब तक कि इसके ख़िलाफ़ कोई स्पष्ट आदेश जारी न हो."

कौन हैं आईपीएस संजय सिंह

1996 बैच के ओडिशा कैडर के आईपीएस अधिकारी संजय कुमार सिंह इससे पहले सीबीआई और एनसीबी में रहते हुए कई हाई प्रोफाइल मामलों की जांच कर चुके हैं.

ड्रग्स से जुड़े मामलों की जांच के संबंध में संजय सिंह को काफ़ी अनुभवी माना जाता है.

संजय सिंह इस समय एनसीबी में ही डिप्टी डायरेक्टर जनरल (ऑपरेशंस) के रूप में काम कर रहे हैं. इससे पहले वह ओडिशा ट्विन सिटी में तमाम पदों पर काम कर चुके हैं.

लेकिन ट्विन सिटी में एंटी ड्रग्स टास्क फोर्स का नेतृत्व करने के लिए उनकी चर्चा की जाती है. ये दूसरा मौका है जब संजय सिंह केंद्रीय एजेंसी में काम करने पहुंच रहे हैं.

इससे पहले साल 2008 से लेकर 2015 तक वह सीबीआई में डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल के पद पर रह चुके हैं.

साल 2010 में केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई के साथ काम करते हुए सिंह कॉमनवेल्थ खेल घोटाले की जांच करने वाली टीम को सुपरवाइज़ भी कर चुके हैं.

बताया जाता है कि ओडिशा ट्विन सिटी में एंटी ड्रग्स यूनिट का नेतृत्व करने के बाद एनसीबी में उनकी पोस्टिंग काफ़ी अहम थी. उन्होंने साल 2020 में एनसीबी में काम करना शुरू किया था.

इसके साथ ही संजय सिंह को एक साफ़ छवि वाला अधिकारी माना जाता है.

साल 2020 में एनसीबी में उनकी ज्वॉइनिंग से पहले गृह मंत्रालय की ओर से जारी पत्र में बताया गया था कि "सिंह के ख़िलाफ़ किसी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई अथवा आपराधिक मामला लंबित नहीं है. इसके साथ ही वह विजिलेंस एंगल से भी मुक्त हैं क्योंकि एंटी-करप्शन डायरेक्टरेट की ओर से उनके ख़िलाफ़ कोई केस दर्ज नहीं कराया गया है."

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क्या बोले समीर वानखेड़े

एनसीबी के इस फ़ैसले के बाद समीर वानखेड़े ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा है कि वह अभी भी अपने पद पर बने हुए हैं.

उन्होंने कहा, "मुझे जांच से नहीं हटाया गया है. मैंने कोर्ट में रिट पेटिशन दी थी कि इस मामले की जांच सेंट्रल एजेंसी द्वारा की जानी चाहिए. ऐसे में आर्यन (ख़ान) केस और समीर ख़ान केस की जांच दिल्ली एनसीबी की एक विशेष टीम करेगी. ये मुंबई और दिल्ली की एनसीबी टीमों के बीच एक समन्वय है."

नवाब मलिक ने दी प्रतिक्रिया

एनसीबी के इस फ़ैसले पर पिछले कुछ दिनों से समीर वानखेड़े पर खुलकर आरोप लगा रहे एनसीपी नेता नवाब मलिक ने टिप्पणी की है.

मलिक ने शनिवार सुबह ट्वीट करके लिखा है कि "मैंने एक विशेष जांच दल की मांग की थी ताकि आर्यन ख़ान को अगवा करने और फिरौती मांगने के मामले में समीर दाऊद वानखेड़े के ख़िलाफ़ जांच की जा सके. अब राज्य और केंद्र में दो विशेष जांच दल बनाए गए हैं, देखते हैं कि कौन वानखेड़े की ज़िंदगी के स्याह पहलुओं को उजागर करके उनकी निजी सेना के बारे में दुनिया को बताता है."

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राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों का लंबा सिलसिला

पिछले एक महीने से मुंबई क्रूज़ शिप ड्रग्स मामले में एक ओर जहां चर्चा बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख़ ख़ान के बेटे आर्यन ख़ान की हो रही है वहीं दूसरी ओर चर्चा नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के मुंबई डिवीज़न के डायरेक्टर समीर वानखेड़े की है.

2 अक्तूबर को क्रूज़ ड्रग्स मामले के सामने आने के बाद जहां समीर वानखेड़े के एक सख़्त मिज़ाज अफ़सर होने की चर्चाएं थीं वो चर्चाएं अब वानखेड़े 'हिंदू हैं या मुसलमान' से लेकर उनके महंगे कपड़े पहनने आदि तक पहुंच गयी हैं.

और इस चर्चा को केंद्र में लेकर आए हैं महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक, जो लगातार क्रूज़ ड्रग्स मामले में धांधली के आरोप लगा रहे हैं.

वो प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके या रोज़ाना कोई नया वीडियो या तस्वीर ट्वीट करके अलग-अलग दावे करते रहे हैं.

ड्रग्स मामले के सामने आने के बाद 6 अक्तूबर को नवाब मलिक ने पहली बार प्रेस कॉन्फ़्रेंस की और एनसीबी पर जानबूझकर बॉलीवुड और महाराष्ट्र सरकार को बदनाम करने का आरोप लगाया.

शुरुआत में उन्होंने एनसीबी की छापेमारी पर सवाल उठाए. उन्होंने सवाल पूछा कि इस छापेमारी में प्राइवेट डिटेक्टिव किरण गोसावी और बीजेपी नेता मनीष भानुशाली शामिल क्यों थे. उन्होंने 2 अक्तूबर की रात का वीडियो ट्वीट किया जिसमें एनसीबी ऑफ़िस में गोसावी और भानुशाली जाते दिख रहे हैं.

बाद में एनसीबी ने सफ़ाई जारी करते हुए कहा कि गोसावी और भानुशाली इस मामले में गवाह हैं.

लेकिन फिर इस बात को लेकर भी सवाल उठाए गए कि क्या गवाह अभियुक्तों को पकड़कर ला सकता है या उनके साथ तस्वीरें ले सकता है क्योंकि गोसावी की आर्यन ख़ान के साथ एक तस्वीर भी सामने आई थी.

नवाब मलिक की ये आरोपों की शुरुआत थी इसके बाद उन्होंने अगले दिन एनसीबी के ज़ोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े का वीडियो ट्वीट करते हुए सवाल उठाए कि समीर वानखेड़े ने कहा था कि 8 से 10 लोग गिरफ़्तार किए जाएंगे क्या उन्हें नहीं पता था कि कितने लोग गिरफ़्तार किए जा रहे हैं या फिर वो दो और लोगों पर मामला दर्ज करने वाले थे.

इसके बाद फिर प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके उन्होंने आरोप लगाया कि ड्रग्स मामले में 11 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था लेकिन 3 लोगों को इसलिए छोड़ दिया गया क्योंकि उनमें से एक शख़्स बीजेपी के वरिष्ठ नेता का रिश्तेदार था.

वहीं नवाब मलिक पर यह आरोप लगे कि उनके दामाद समीर ख़ान को एनसीबी ने ड्रग्स मामले में गिरफ़्तार किया था, इस कारण वो व्यक्तिगत रूप से एनसीबी पर हमलावर हैं.

इन आरोपों के बाद मलिक एक बार फिर ट्विटर पर सामने आए और उन्होंने ट्वीट किया कि कोर्ट ने उनके दामाद को यह कहते हुए ज़मानत दी है कि उनके पास से ड्रग्स के कोई सबूत नहीं मिले थे.

इसके बाद से लगातार नवाब मलिक खुलकर वानखेड़े समेत बीजेपी पर हमलावर हैं. उन्होंने उनकी पहली शादी समेत कई निजी तस्वीरों को ट्वीट किया है.

चर्चा में एनसीबी

पिछले कुछ समय से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो काफी चर्चा में रहा है. पिछले साल बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद एक कथित ड्रग रैकेट के खुलासे की जांच के तहत एनसीबी ने कई बॉलीवुड अभिनेताओं और अभिनेत्रियों से पूछताछ की थी.

कई दिनों चली पूछताछ के बाद एनसीबी ने बॉलीवुड अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को ड्रग्स से जुड़े एक मामले में पिछले साल सितंबर में गिरफ्तार भी किया था. इसी कथित ड्रग्स केस की जांच के दौरान अभिनेत्री दीपिका पादुकोण से भी पूछताछ की गई थी.

फ़िल्म और टीवी जगत से जुड़े कई बड़े नामों को एनसीबी ने अपनी जांच के दौरान पेश होने के लिए कहा था. कई दिनों तक हर रोज़ एनसीबी दफ्तर में इन सेलिब्रिटीज से पूछताछ चलती रही लेकिन धीरे-धीरे मामला ठंडा पड़ गया. पिछले साल 28 दिन हिरासत में रहने के बाद रिया चक्रवर्ती को बॉम्बे हाई कोर्ट ने ज़मानत पर रिहा कर दिया था.

इसी बीच कांग्रेस ने यह आरोप लगाया है कि एनसीबी की क्रूज़ पर की गई छापेमारी गुजरात की मुंद्रा बंदरगाह पर हुई ड्रग्स की ज़ब्ती के मुद्दे से ध्यान हटाने की एक कोशिश है.

16 सितंबर को राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने गुजरात के कच्छ जिले में अडानी समूह के मुंद्रा पोर्ट पर दो कंटेनरों से करीब तीन हज़ार किलो हेरोइन ज़ब्त की थी जिसकी कीमत वैश्विक बाज़ार में क़रीब 21 हज़ार करोड़ रुपए बताई जा रही है.

विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि एनसीबी ड्रग्स कारोबार में लगे बड़े सौदागरों को छोड़कर छोटे-मोटे मामलों पर ध्यान लगा रहा है.

बहरहाल, गृह मंत्रालय से हरी झंडी मिलने के बाद छह अक्टूबर को मुंद्रा पोर्ट से ड्रग्स की ज़ब्ती का मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अपने हाथ में ले लिया है.

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