पाकिस्तानी पत्रकार अरूसा आलम और कैप्टन अमरिंदर सिंह को लेकर क्या विवाद है?

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पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने शुक्रवार को पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की दोस्त अरूसा आलम के पाकिस्तानी खुफ़िया एजेंसी आईएसआई से संबंधों को लेकर जाँच के आदेश दे दिए.

अरूसा आलम पाकिस्तानी पत्रकार हैं, जो रक्षा संबंधी मामलों को कवर करती हैं. अरूसा आलम का मामला पहले भी उठता रहा है लेकिन इस बार जाँच के आदेश आने के बाद सुखजिंदर सिंह और अमरिंदर सिंह के बीच ट्विटर पर बहस छिड़ गई.

कैप्टन अमरिंदर सिंह के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल ने अपने ट्विटर हैंडल पर कैप्टन अमरिंदर सिंह के हवाले से ट्वीट किया.

उन्होंने सुखजिंदर सिंह के लिए लिखा, "तो अब आप व्यक्तिगत हमलों का सहारा ले रहे हैं. पद संभालने के एक महीने बाद आपके पास लोगों को दिखाने के लिए सिर्फ़ यही है. बरगाडी और ड्रग मामलों को लेकर आपके बड़े-बड़े वादों का क्या हुआ? पंजाब उन वादों के पूरा होने का इंतज़ार कर रहा है."

अमरिंदर सिंह ने कहा, "मेरी कैबिनेट में आप मंत्री थे. आपने कभी अरूसा आलम को लेकर शिकायत नहीं की. वह 16 सालों से भारत सरकार से मंज़ूरी लेकर आ रही हैं. या आप ये आरोप लगा रहे हैं कि इस दौरान एनडीए और कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की आईएसआई से मिलीभगत थी."

उन्होंने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और अरूसा आलम की हाथ मिलाते हुए एक पुरानी तस्वीर भी पोस्ट की.

कैप्टन अमरिंद ने कहा कि राज्य की सुरक्षा की क़ीमत पर पंजाब पुलिस को इस आधारहीन जाँच में लगाया जा रहा है.

उन्होंने ट्वीट किया, "मुझे इस बात की चिंता है कि जब आतंकवाद का ख़तरा ज़्यादा है और त्योहार नज़दीक हैं, तब क़ानून और व्यवस्था बनाए रखने पर ध्यान देने की बजाय आपने पंजाब की सुरक्षा की क़ीमत पर डीजीपी को आधारहीन जाँच में लगा दिया है."

ये बहस यहीं तक नहीं रुकी और सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी चार ट्वीट करके कैप्टन अमरिंदर सिंह को जवाब दिया.

उन्होंने लिखा, "मैं एक सच्चा राष्ट्रवादी हूँ और आप बेहतर जानते हैं कि किस बिंदु से हमारे मतभेद पैदा हुए थे. आपको क़ानून और व्यवस्था के लिए चिंता करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि मौजूदा सरकार ने पंजाब सरकार को किसी बाहरी के हवाले नहीं किया है. अब पुलिस लोगों की सुरक्षा कर रही है, चीकू और सीताफल की नहीं."

उन्होंने लिखा, "वैस सर, आप अरूसा और आईएसआई लिंक को लेकर पेरशान क्यों हैं? उनका वीज़ा किसने प्रायोजित किया और उनसे जुड़ी हर चीज़ की पूरी जाँच की जाएगी. मुझे उम्मीद है कि संबंधित सभी लोग जाँच में पुलिस को सहयोग करेंगे."

सुखजिंदर सिंह रंधावा पंजाब कांग्रेस के उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने पार्टी के चुनावी वादों को पूरा करने को लेकर कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व पर अविश्वास जताया था.

इस पर कैप्टन अमरिंदर सिंह के जवाब दिया, "क्या आपने इतने सालों में मुझे कभी परेशान देखा है? बल्कि आप परेशान और उलझन में लग रहे हैं. आप इस तथाकथित जाँच को लेकर अपना मन क्यों नहीं बना लेते? जहाँ तक अरूसा का वीज़ा प्रायोजित करने की बात है तो बिल्कुल पिछले 16 सालों से मैं ऐसा कर रहा हूँ. ऐसे वीज़ा के लिए भारतीय उच्चायोग को अनुरोध भेजे जाते हैं, जिन्हें पहले रॉ और आईबी से मंज़ूरी दी जाती है. इस मामले में हर बार यही हुआ है."

दिग्विजय सिंह ने कसा तंज

वहीं, इस पर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इस मसले पर देर से जागने को लेकर पंजाब कांग्रेस के मंत्रियों पर तंज कसा है.

दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया, "कैप्टन अमरिंदर सिंह जी की कैबिनेट में मंत्री अब अरूसा आलम के साथ उनके संबंधों का मुद्दा उठा रहे हैं. इतनी देरी. दुखद है."

कौन हैं अरूसा आलम

अरूसा आलम एक पाकिस्तानी पत्रकार हैं जो रक्षा संबंधी मामले देखती हैं. उन्हें कैप्टन अमरिंदर सिंह की काफ़ी पुरानी दोस्त बताया जाता है.

वह अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्री पद के शपथग्रहण समारोह के दौरान भी विशेष अतिथि के तौर पर मौजूद थीं.

साल 2004 में जब कैप्टन अमरिंदर सिंह पाकिस्तान गए थे तब उनकी मुलाक़ात अरूसा आलम से हुई थी.

अरूसा आलम की माँ अकलीम अख़्तर का भी 1970 में पाकिस्तान की राजनीति में गहरा प्रभाव रहा है. उन्होंने पाकिस्तानी सेना के काफ़ी क़रीब माना जाता था.

अमरिंदर सिंह से उनकी दोस्ती को लेकर चर्चा तब शुरू हुई जब अगस्त 2018 में पंजाब सरकार में तत्कालीन मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने पाकिस्तान दौरे में पाकिस्तानी सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा को गले लगाया था.

इसे लेकर सिद्धू को जबरदस्त आलोचना का सामना करना पड़ा था. कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी इस पर सवाल उठाते हुए इसे ग़लत बताया था.

इसके बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह के अरूसा आलम से संबंधों और अरूसा आलम के आईएसआई से लिंक को लेकर सवाल उठने लगे थे.

कैप्टन अमरिंदर सिंह के पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने और अलग पार्टी बनाने की घोषणा करने के बाद से ये मामला फिर से तूल पकड़ने लगा है.

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