नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में ताज़ा वीडियो से उठे सवाल, आत्महत्या पर संदेह गहराया

    • Author, समीरात्मज मिश्र
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
  • प्रकाशित

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत की सीबीआई जांच के लिए राज्य सरकार ने सिफ़ारिश की है लेकिन उनकी मौत का रहस्य गहराता ही जा रहा है.

महंत नरेंद्र गिरि की मौत के तुरंत बाद के एक वीडियो से उनके आत्महत्या करने पर संदेह और गहरा हो गया है. महंत को क़रीब से जानने वाले और अखाड़ों से जुड़े साधु-संत पहले से ही इस पर संदेह जता रहे थे और उनकी हत्या की आशंका जता रहे थे.

महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत के बाद का क़रीब एक मिनट 45 सेकंड के इस वीडियो के बारे में दावा किया जा रहा है कि यह ठीक उस समय का है जब पुलिस वहां पहुंची थी.

उससे पहले वहां मौजूद लोगों ने कमरे का दरवाज़ा तोड़कर कथित तौर पर फांसी पर लटके महंत को नीचे उतार लिया था.

प्रयागराज में पुलिस के अधिकारी आधिकारिक रूप से इस वीडियो के बारे में कोई टिप्पणी नहीं कर रहे हैं लेकिन एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर वीडियो के प्रामाणिक और सही होने की पुष्टि करते हैं.

कमरे के अंदर वीडियो में क्या दिखा?

महंत नरेंद्र गिरि का शव जिस कमरे में लटका मिला था, उस कमरे का पंखा तेज़ी से चल रहा था और उसके ऊपर नायलॉन की पीली रस्सी का एक टुकड़ा लटका हुआ है जबकि रस्सी का बाक़ी हिस्सा टूटा हुआ है.

वीडियो में पुलिस के अधिकारी कमरे के दरवाज़े पर खड़े महंत के शिष्यों से इस बारे में पूछताछ कर रहे हैं और यह भी कह रहे हैं कि दरवाज़ा खोलकर शव उतारा क्यों?

वीडियो में महंत नरेंद्र गिरि का शव फ़र्श पर रखा दिख रहा है और गर्दन में नायलॉन की पीली रस्सी का टुकड़ा भी फंसा हुआ दिख रहा है. रस्सी का एक टुकड़ा पास में ही पड़ी मेज पर रखा हुआ है.

पुलिस से पूछताछ में वहां मौजूद सेवादारों ने बताया था कि उन्होंने शव को इसलिए पंखे से उतारा ताकि अस्पताल ले जा सकें, लेकिन उन्हें न तो अस्पताल ले जाया गया और न ही किसी डॉक्टर को बुलाया गया. वहां मौजूद लोगों ने ही उनकी मौत की पुष्टि कर ली और फिर पुलिस को सूचना दी.

सवाल यह भी उठ रहे हैं कि यदि पंखे को बाद में भी चलाया गया तो भी इतने भारी-भरकम व्यक्ति के फांसी लगाने के बावजूद न तो पंखे में और न ही जिस लोहे की छड़ से पंखा टँगा है, उसे कोई नुक़सान नहीं हुआ. यहां तक कि शव को उतारने में भी पंखे को किसी तरह का कोई नुक़सान नहीं हुआ.

महंत के जिस कथित सुसाइड नोट की चर्चा हो रही है, वह भी वीडियो में नज़र आ रहा है कि महंत के शव के पास ही उनका कथित सुसाइड नोट भी पड़ा है. वीडियो में गेरुआ वस्त्रों में लंबी कद काठी के एक संन्यासी दिख रहे हैं. बताया जा रहा है कि ये वही बलवीर हैं जिन्हें कथित सुसाइड नोट में महंत नरेंद्र गिरि ने अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है. हालांकि इस बात की किसी ने पुष्टि नहीं की है.

उत्तराधिकारी कौन बनेगा? हो रही चर्चा...

इस बीच, जेल भेजे गए महंत के शिष्य आनंद गिरि और बड़े हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी को नैनी सेंट्रल जेल में हाई सिक्योरिटी में रखा गया है.

स्थानीय पत्रकारों के मुताबिक, आनंद गिरि बार-बार अपने गुरु महंत नरेंद्र गिरि के अंतिम दर्शन की मांग करते रहे लेकिन पुलिस अधिकारियों ने उन्हें अनसुना कर दिया.

इस बीच, अखाड़ा परिषद ने बलवीर गिरि को नरेंद्र गिरि का उत्तराधिकारी और बाघंबरी मठ का अध्यक्ष मानने से इनकार कर दिया है.

बीबीसी से बातचीत में अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरी ने कहा, "हमें नरेंद्र गिरि जी की आत्महत्या पर शुरू से ही संदेह है. अब सरकार ने भी सीबीआई जांच की सिफ़ारिश की है. दूसरी बात, जब सुसाइड नोट ही फ़र्जी है तो बलवीर गिरि को उत्तराधिकारी मानने का सवाल ही नहीं उठता. इस बारे में होने वाली पंच परमेश्वर की बैठक भी स्थगित कर दी गई है."

सुसाइड नोट में बलवीर गिरि को उत्तराधिकारी घोषित करने की बात पर मठ के ही कई लोग हैरान थे.

बाघंबरी मठ के एक सेवादार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बलवीर गिरि को उत्तराधिकारी बनाए जाने की बात किसी के गले नहीं उतर रही थी.

उनके मुताबिक, "आनंद गिरि को उन्होंने भले ही मठ से निष्कासित कर दिया था लेकिन बलवीर गिरि से ज़्यादा योग्य और महंत जी के क़रीबी दूसरे लोग भी थे जिन्हें वो अपना उत्तराधिकारी घोषित कर सकते थे. इसी बात से तो सुसाइड नोट पर संदेह पैदा हुआ है और इसीलिए आत्महत्या की बात पर भी किसी को भरोसा नहीं हो रहा है."

दूसरी ओर, बलवीर गिरि ने पुलिस और एसआईटी की पूछताछ में महंत नरेंद्र गिरि के पास मिले कथित सुसाइड नोट को नरेंद्र गिरि की ही हैंड राइटिंग बताया था जबकि अगले दिन वे अपने इस बयान से मुकर गए.

बुधवार को उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह पुलिस की जांच का विषय है कि लिखावट किसकी है.

बाघंबरी मठ से जुड़े तमाम लोगों ने इस बात पर सवाल उठाए हैं कि महंत नरेंद्र गिरि ने ये सुसाइड नोट अपने हाथ से लिखा है.

बाघंबरी मठ जिस निरंजनी अखाड़े से संबद्ध है, उसके आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद महाराज ने दावा किया है कि पुलिस को जो सुसाइड नोट मिला है, उसमें महंत नरेंद्र गिरि की लिखावट नहीं है.

पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, "मैं उन्हें 20 साल से जानता हूं, नरेंद्र गिरि जी लिखते नहीं थे. यदि उनका लिखा हुआ किसी के पास कुछ है तो वह दिखाए. मुझसे अधिक उन्हें कोई नहीं जानता. मैं साल 2003 से उनसे और इस मठ से जुड़ा हुआ था. हर परिस्थिति में मैंने उनका साथ दिया. वह हस्ताक्षर भी बहुत मुश्किल से करते थे."

मंगलवार को पांच डॉक्टरों की टीम ने महंत नरेंद्र गिरि का पोस्टमॉर्टम किया लेकिन अभी तक पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है.

हालांकि स्थानीय अख़बारों ने पोस्टमॉर्टम से संबद्ध डॉक्टरों और अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि 'उनकी मौत हैंगिंग की वजह से हुई है लेकिन फ़ोरेंसिक जांच के लिए विसरा सुरक्षित रख लिया गया है.'

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