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योगी सरकार ने कफ़ील ख़ान के ख़िलाफ़ दोबारा जांच के आदेश वापस लिए, हाईकोर्ट में दी जानकारी - प्रेस रिव्यू
गोरखपुर के निलंबित बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर कफ़ील ख़ान के ख़िलाफ पिछले साल जारी किए गए विभागीय पुन: जांच का आदेश वापस ले लिया गया है. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार तीन महीने में उनके निलंबन पर फ़ैसला ले सकती है.
अंग्रेज़ी अख़बर द इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि एडिशनल एडवोकेट जनरल मनीष गोयल ने शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया, "इस याचिका में लगाए गए 24 फरवरी 2020 के आदेश को वापस ले लिया गया है, क्योंकि प्रतिवादी (राज्य) मामले में नए सिरे से आगे बढ़ने के लिए स्वतंत्र है."
गोरखपुर के एक सरकारी अस्पताल में ऑक्सीजन की कथित कमी के कारण कई बच्चों की मौत के मामले में 22 अगस्त, 2017 को किए गए निलंबन के ख़िलाफ़ ख़ान ने एक याचिका दायर की थी.
पिछले साल 24 फरवरी को अनुशासनात्मक प्राधिकरण ने ख़ान के खिलाफ एक और जांच का आदेश दिया था, उसे भी ख़ान ने अदालत में चुनौती दी थी.
हाईकोर्ट ने 29 जुलाई को याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से जवाब मांगा था. एएजी ने कहा कि "तीन महीने की अवधि के अंदर अनुशासनात्मक कार्यवाही (डॉक्टर ख़ान के ख़िलाफ़) को ख़त्म करने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे".
त्रासदी के बाद अगस्त 2017 में ख़ान को निलंबित कर दिया गया था लेकिन बाद में उन्हें सभी आपराधिक चार्ज से मुक्त कर दिया गया था.
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने कहा कि अब अदालत को "याचिकाकर्ता के निलंबन को जारी रखने के औचित्य पर विचार करना होगा जो 22 अगस्त 2017 को पारित एक आदेश के अनुसार था."
कोर्ट ने कहा कि "याचिकाकर्ता के साथ निलंबित किए गए लोगों में से सात को अनुशासनात्मक कार्यवाही समाप्त होने तक बहाल कर दिया गया है."
गोयल ने अदालत से कहा कि उन्हें "इस संबंध में उन्हें आवश्यक निर्देश प्राप्त करने दिया जाए."
मामले पर अगली सुनवाई अब 10 अगस्त को होगी.
पिछले साल 29 जनवरी को, डॉक्टर ख़ान को मुंबई हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था, पुलिस ने आरोप लगाया था कि दिसंबर 2019 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में विवादास्पद नागरिकता कानून के ख़िलाफ़ छात्रों के विरोध के दौरान उन्होंने भड़काऊ भाषण दिया था.
दो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने सहित अलग-अलग आरोपों के तहत एक मामला दर्ज किए जाने के बाद उन्हें मथुरा जेल में रखा गया था.
अलीगढ़ ज़िला प्रशासन ने 13 फरवरी को उनके ख़िलाफ़ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) लगाया. महीनों बाद, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 1 सितंबर को एक फैसले में उन्हें हिरासत में रखने को "कानून की नज़र में सही नहीं" बताते हुए रिहा कर दिया.
पीएम केयर्स फंड की वैधता को चुनौती
सुप्रीम कोर्ट में पीएम केयर्स फंड की वैधता को चुनौती देने वाली एक अपील में आरोप लगाया गया है कि मंत्रालयों, सरकारी एजेंसियों, विभागों आदि से "बड़ी मात्रा में धन" को हर दिन "दान" के रूप में इस फंड में भेजा जा रहा है.
अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू ने लिखा है कि उत्तर प्रदेश की रहने वाली याचिकाकर्ता दिव्या पाल सिंह ने आरोप लगाया कि "जनता के पैसे की अकल्पनीय और अथाह मात्रा हर रोज़, कोष के खज़ाने में डाली जाती है"
युवा वकील राजेश इनामदार, शाश्वत आनंद, जव्वाद उर रहमान, आशुतोष मणि त्रिपाठी, सैयद अहमद फैज़ान मोहम्मद कुमैल हैदर और अमित पई, जिन्होंने याचिका तैयार की है, उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कहा, "हैरानी की बात है कि भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के लिए 'भोपाल गैस रिसाव आपदा से संबंधित सहायता' जैसे सरकारी नियंत्रण वाले फंड से भी पैसा नहीं बख्शा गया है और उक्त फंड से भी पैसा डाला जा रहा है."
अपील में दावा किया गया है कि "अथाह धन को गुप्त रूप से पीएम केयर्स फंड में डाला गया है, इसकी शुरुआत 28 मार्च 2020 को फंड के निर्माण की आधिकारिक घोषणा से पहले 4 फरवरी 2020 को ही हो गई थी."
"यह दिलचस्प है कि एक तरफ, पीएम केयर्स फंड का ट्रस्ट डीड यह बताता है कि ट्रस्ट किसी सरकार या उसके किसी भी साधन द्वारा नियंत्रित या आर्थिक रूप से पोषित नहीं है, लेकिन ये पूरी तरह से झूठ है क्योंकि सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, एजेंसियों और विभागों से पीएम-केयर्स फंड में रोज़ाना अनगिनत रक़म डाली जा रही है."
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, भाषा को धर्म से नहीं जोड़ा जा सकता
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी विशेष भाषा को किसी धर्म विशेष से नहीं जोड़ा जा सकता है और उर्दू को एक भाषा के रूप में उन क्षेत्रों में भी पढ़ाया जा सकता है जहां मुस्लिम आबादी कम है.
अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदुस्तान टाइम्स ने लिखा है कि न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा ने एक सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में उर्दू शिक्षक सनोवर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, "प्रथम दृष्टया इस अदालत का विचार है कि किसी विशेष भाषा को किसी विशेष धर्म से नहीं जोड़ा जा सकता और उर्दू को उन क्षेत्रों में भी पढ़ाया जा सकता है जहाँ कम मुसलमान हैं."
न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, "एक धर्मनिरपेक्ष राज्य में पहली नज़र में ऐसी नीति बनाना सही नहीं है कि अगर मुस्लिम आबादी कम है, तो वहां उर्दू नहीं पढ़ाई जाए."
याचिकाकर्ता सनोवर एक सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में उर्दू शिक्षक थीं, लेकिन कथित तौर पर उनकी सेवा समाप्त कर दी गई थी क्योंकि संबंधित क्षेत्र में मुस्लिम आबादी 20% से कम थी.
भारत की नई सैटेलाइट चीन-पाक सीमा पर निगरानी में करेगी मदद
स्वतंत्रता दिवस से तीन दिन पहले भारत अपनी सबसे आधुनिक जीओ इमेजिंग सैटेलाइट लॉन्च करेगा. सैटेलाइट को 12 अगस्त सुबह 5 बजकर 34 मिनट पर श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा.
अंग्रेज़ी अख़बार द टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक, सैटेलाइट उपमहाद्वीप में, ख़ासतौर पर पाकिस्तान और चीन सीमा से इलाकों में बेहतर निगरानी में मदद करेगा और इलाकों की रियल टाइम मॉनिटरिंग जानकारी दे सकता है. इसके अलावा किसी प्राकृतिक आपदा से जुड़ी जानकारियां भी ये समय रहते दे सकता है.
सैटेलाइट को पहले 28 मार्च को लॉन्च किया जाना था लेकिन कुछ 'मामूली गड़बड़ियों' के कारण इसे लॉन्च नहीं किया जा सका. इसमें कोविड महामारी के कारण देरी हुई.
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