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हरियाणाः मुस्लिम युवक की लिंचिंग पर हिंदू महापंचायत, भड़काऊ भाषा पर हुआ विवाद
- Author, अरविंद छाबड़ा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
"आसिफ़ का मर्डर पटवारी ने और आडवाणी ने कर दिया! अरे सुनो भइया. मैंने आडवाणी जी को फ़ोन लगाया दिल्ली में. मैंने कहा आडवाणी जी बुढ़ापे में मर्डर कर रहे हो..." - करणी सेना के नेता सूरज पाल ने जब अपने भाषण में ये कहना शुरू किया तो हरियाणा के इंद्री गाँव में हो रही इस महापंचायत में पहले तो कुछ लोग हँसे. कुछ चुपचाप ही रहे.
सूरज पाल ने अपने फ़ेसबुक पेज पर इस महापंचायत के वीडियो को शेयर किया है जिसमें वो आक्रामक होते हुए कहते हैं "ना पटवारी ने मर्डर किया. ना आडवाणी ने मर्डर किया. अगर उसकी हत्या हुई है तो उसके कर्मों के कारण हुई है. यह कहने की जुर्रत करें आप लोग. और कहें हम नहीं हैं दोषी. नहीं है हमारे बच्चे दोषी. हमारी बहन बेटियों की नंगी पिक्चर बनाते हैं. हम उनका मर्डर भी न करें...."
मुस्लिम संगठनों का आरोप है कि 30 मई को हरियाणा के नूह ज़िले में हुई इस महापंचायत में सूरज पाल की ही तरह कई नेताओं ने भड़काऊ भाषण दिए. उनका दावा है कि उन्होंने पुलिस से इसकी शिकायत भी की लेकिन अभी तक उसने कोई कार्रवाई नहीं की है.
जब हमने सूरज पाल से उनके भाषण के बारे में सवाल किया तो उनका कहना था, "सेल्फ डिफ़ेंस में हम क्या करें? अगर मैंने यह कह दिया कि वो मेरी बहन की गंदी फ़िल्में बनाएगा तो अपने बचाव में हम क्या करें? उन्हें आम का अचार दें?"
जब उनसे यह पूछा कि वो इस हत्या को जायज़ ठहरा रहे थे तो उन्होने कहा, "कोई मेरी बहन को छेड़कर दिखाए मैं दिखाता हूँ उसका इलाज क्या होता है. आप पत्रकार हैं आपकी बहन को कोई छेड़ेगा तो आप क्या कहोगे कि छेड़ लो मैं पुलिस के पास से होकर आता हूँ. निकिता तोमर को सरेआम गोलियों से मार दिया और हम विरोध भी न करें."
21 साल की निकिता तोमर को पिछले साल 26 अक्टूबर को हरियाणा के फ़रीदाबाद ज़िले के बल्लभगढ़ में दिनदहाड़े गोली मार दी गई थी. इस घटना की तब काफ़ी चर्चा हुई थी.
फ़रीदाबाद की एक स्थानीय अदालत ने मार्च में निकिता तोमर हत्याकांड के दो प्रमुख आरोपियों - तौसीफ़ और उसके सहयोगी रेहान को दोषी ठहराया था.
क्यों हुई थी यह महापंचायत
आसिफ़ जिम ट्रेनर थे. 16 मई को जब वह अपने घर को लौट रहे थे तभी कुछ लोगों ने उन पर हमला कर दिया.
हरियाणा के नूह ज़िले के गांव खेरा खलीलपुर निवासी आसिफ़ ख़ान के परिवार का आरोप है कि भीड़ ने आसिफ़ को लाठियों और पत्थरों से पीट-पीट कर मार डाला.
इसके बाद स्थानीय लोगों ने हमलावरों की गिरफ़्तारी की मांग को लेकर सड़क जाम भी किया था. बाद में जब पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे स्थानीय लोगों को हटाने की कोशिश की तो उन्होंने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों पर पथराव कर दिया.
आसिफ़ की हत्या के कुछ दिन बाद हुई इस महापंचायत के आयोजकों में से एक इंद्री गांव के सरपंच कमल सिंह ने बीबीसी को बताया, "इस विरोध और सड़क जाम के बाद हिंदू बुद्धिजीवियों ने अपनी एकता दिखाने के लिए महापंचायत को आयोजित करने का फ़ैसला किया."
वह कहते हैं, "इसमें केवल एक ही मुद्दा था: आसिफ़ मामले में दोषियों को गिरफ़्तार करो और निर्दोष लोगों को छोड़ो. किसी अन्य मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई."
मंच से भड़काऊ भाषणों के सवाल पर उन्होंने कहा कि लोगों के अपने विचार होते हैं, लेकिन जब उन्होंने ऐसी बातें कही गई तो उन्हें टोका गया था.
उनका कहना है कि इस महापंचायत में क़रीब 12,000 से 15,000 लोग पहुँचे थे.
कमल सिंह, "सभी हिंदू भाई थे और इसमें सभी बिरादरी के लोग थे क्योंकि इसे मेरे गाँव में रखा गया था तो मेरा काम था कि सभी के चाय-पानी और पार्किंग की व्यवस्था को देखना."
कई राजनीतिक पार्टियाँ एक मंच पर
इस महापंचायत में हरियाणा के कई ज़िलों के तो लोग थे ही, कुछ अन्य राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश और राजस्थान से भी लोग पहुँचे थे.
ख़ास बात यह थी कि इस सभा में विभिन्न पार्टियों से लोग पहुँचे थे. कांग्रेस, जननायक जनता पार्टी, इंडियन नेशनल लोक दल आदि, पर ज़्यादातर लोग भारतीय जनता पार्टी से जुड़े बताए जा रहे हैं.
एक ओर जहां छह महीनों से अधिक समय से हरियाणा-दिल्ली-यूपी की अलग-अलग सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं ऐसे में यह पहला मौक़ा भी रहा जब विभिन्न दलों के नेताओं को एक मंच पर देखा गया.
जननायक जनता पार्टी के नेता अनंत राम तंवर ने कहा "यहां ना तो मामला किसान का था और न ही कोई राजनीतिक. यह सब लोग एक ही मुद्दे पर एकत्र हुए थे."
भड़काऊ भाषणों पर उन्होंने कहा कि वो तो कुछ लोगों को आपस में अपना मन मुटाव है.
उन्होंने कहा, "ऐसे तो कई लोग कई कहानियाँ कहते हैं. वो लोग तो यह भी कहते हैं कि हम उनको ना मारते तो वह (आसिफ़) हमें मार देता."
वह कहते हैं, "मु्ख्य मुद्दा था कि आसिफ़ मामले में पहले जो नौ लोग पकड़े गए उनमें पाँच तो जायज़ हैं पर चार की गिरफ़्तारी नजायज़ है. सब का यही कहना था कि जो जायज़ हैं उन्हें पकड़ो और निर्दोष लोगों को छोड़ दो. बस इसके बारे में पंचायत थी. हमने ज़िला एसपी से बात की है और पुलिस ने हमें आश्वासन दिया है कि बेगुनाह लोगों को गिरफ़्तार नहीं किया जाएगा."
मुस्लिम समुदाय के आरोप
हालांकि भड़काऊ भाषण देने वालों के ख़िलाफ़ शिकायत करने वाले मुस्लिम रक्षा दल (हरियाणा) के अध्यक्ष तौसीफ़ अहमद इस तर्क से सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि इन लोगों ने दोषियों के हक में यह पंचायत की. वो भी ऐसे समय में जब कोरोना काल चल रहा है और धारा 144 है.
वह कहते हैं, "उन्होंने मुस्लिम समाज के बारे में इतना भद्दा कहा है और यह भी कहा कि आसिफ़ को सही मारा गया. यह आरोप कि वो उनकी बहन बेटियों के वीडियो बनाता था, वह भी ग़लत है. अगर वो ऐसा करता तो उसके ख़िलाफ़ कोई तो मामला दर्ज हुआ होगा."
तौसीफ़ अहमद कहते हैं कि एक जून को की गई शिकायत पर पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है.
हालांकि वह यह ज़रूर मानते हैं कि पुलिस ने आसिफ़ की हत्या के मामले में अधिकतर लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है.
ज़िले के एसपी नरेंद्र बिरजर्निया ने बीबीसी से बात करते हुए माना कि कुछ लोगों ने इस महापंचायत को लेकर शिकायत की है जिसकी जाँच की जा रही है.
लेकिन तौसीफ अहमद का आरोप है कि महापंचायत के दौरान के कई भाषण साफ़तौर पर दंगा भड़काने वाले हैं और अगर भड़काऊ भाषण देने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं की गई तो इससे ग़लत संदेश जाएगा.
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