केरल ‘ब्लैक मनी केस’ में क्या बीजेपी के नेता शामिल हैं?

    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बेंगलुरु से, बीबीसी हिन्दी के लिए
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

केरल के 'ब्लैक मनी केस' में गिरफ़्तार हुए 21 लोगों में से कुछ लोग बीजेपी नेताओं के क़रीबी बताये जा रहे हैं, जिनसे एक विशेष जाँच दल (एसआईटी) ने पूछताछ की है. इनमें बीजेपी के एक ज़िलास्तर के पदाधिकारी भी शामिल हैं.

यह केस कथित तौर पर राहजनी की एक घटना पर आधारित है जिसमें एक फ़र्जी कार दुर्घटना के बाद 3.5 करोड़ रुपये की चोरी कर ली गई थी.

इस मामले के शिक़ायतकर्ताओं में से एक बीजेपी को चुनाव सामग्री उपलब्ध कराने वाले ए के धर्मराजन हैं जो आरएसएस के कार्यकर्ता भी हैं.

पुलिस के अनुसार, यह घटना केरल चुनाव से तीन दिन पहले, यानी 3 अप्रैल को हुई थी.

लेकिन अब इस मामले की जाँच में एक ऐसा मोड़ आ गया है कि जल्द ही केरल बीजेपी अध्यक्ष के सुरेंद्रन के बेटे से भी पुलिस पूछताछ कर सकती है.

वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इसे पार्टी की छवि ख़राब करने का एक षड्यंत्र बताया है.

हालांकि, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने सोमवार को विधानसभा में बताया कि "ईडी ने कोच्चि ज़ोन ऑफ़िस को इस जाँच से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए एक पत्र लिखा है." उन्हें यह जानकारी एक जून को मिली थी.

तो, ब्लैक मनी केस या हवाला केस आख़िर है क्या, जिसके बारे में केरल में चर्चा हो रही है.

ब्लैक मनी केस - घटना क्या थी?

पुलिस के एक अधिकारी ने बीबीसी को नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि ये पैसा शायद कर्नाटक से लाया गया था जिसे त्रिसूर से एर्नाकुलम ले जाते समय ये कथित कार हादसा हुआ. यह दुर्घटना त्रिसूर-कोडाकारा जंक्शन के पास हुई थी.

ए के धर्मराजन के ड्राइवर, शमजीर ने इस घटना की शिक़ायत लिखवाई. उन्होंने पुलिस को बताया कि जंक्शन पर कार दुर्घटना के बाद, गाड़ी से 25 लाख रुपये चोरी कर लिये गए. हालांकि, बाद में चोरी की रकम बदल दी गई.

पुलिस अधिकारी बताते हैं कि "उस गाड़ी में साढ़े तीन करोड़ रुपये थे, धर्मराजन ने पुलिस को अपने बयान में यही कहा था. अब तक हुईं गिरफ़्तारियों के बाद, हमने 1.12 करोड़ रुपये अभियुक्तों से बरामद किये हैं. गिरफ़्तार किये गए सभी 21 लोग कार दुर्घटना में शामिल नहीं थे, बल्कि कुछ लोग इसके पीछे के षड्यंत्र में शामिल थे."

उन्होंने यह भी बताया कि ये पैसा अलाप्पुझा में किसी 'करता' नामक पार्टी वर्कर को दिया जाना था.

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने विधानसभा को बताया कि इस केस में अब तक 96 गवाहों के बयान दर्ज किये गए हैं.

पुलिस के अनुसार, अभियुक्तों ने इस 1.12 करोड़ रुपये का इस्तेमाल 347 ग्राम गोल्ड खरीदने के लिए किया था. उन्होंने कुछ मोबाइल फ़ोन ख़रीदे और कुछ घड़ियाँ भी. इन सभी चीज़ों को पुलिस ने ज़ब्त कर लिया है.

इस मामले की पहली शिकायत में कहा गया था कि दुर्घटना में 25 लाख रुपये की डकैती हुई, जिसके बाद पुलिस ने आईपीसी की धारा-395 (डकैती) के तहत केस दर्ज किया था. लेकिन धर्मराजन के बयान के बाद, इस केस में धारा-412, 212 और 120-बी भी जोड़ दी गईं.

अब तक दर्ज हुए बयानों के आधार पर, जिनमें शिकायतकर्ताओं और अभियुक्तों के बयान शामिल हैं, एसआईटी ने केरल बीजेपी अध्यक्ष के सुरेंद्रन के सचिव दिपिन और उनके ड्राइवर लिबीश से पूछताछ की है. हालांकि, दोनों ने ही पैसे की इस आवाजाही के बारे में कोई जानकारी होने से इनकार किया है.

एसआईटी ने त्रिसूर ज़िले के अध्यक्ष के के अनीश और महासचिव के गणेशन से भी पूछताछ की है.

हालांकि, बीजेपी के प्रवक्ता बी गोपालकृष्णन के पास एसआईटी द्वारा बीजेपी नेताओं से की जा रही गहन पूछताछ का स्पष्टीकरण मौजूद है.

बीजेपी का क्या कहना है?

बीबीसी से बातचीत में गोपालकृष्णन ने कहा, "जिस रात यह घटना हुई, तब धर्मराजन ने जितने भी बीजेपी नेताओं को हो पाया, फ़ोन किया था. उन्होंने पार्टी अध्यक्ष सुरेंद्रन को भी फ़ोन किया था कि हाइवे पर उनकी कार और पैसा, दोनों लूट लिये गए हैं. चौथे-पाँचवे दिन, वे इसकी शिकायत लिये बीजेपी के त्रिसूर ज़िला कार्यालय में भी आये थे और उन्होंने ज़िला अध्यक्ष से मुलाक़ात की थी."

"वहीं, हमारी पार्टी के नेता भी चुनाव सामग्री के लिए लगातार धर्मराजन से संपर्क कर रहे थे. अब पुलिस की जाँच इस बात पर टिकी है कि घटना की रात धर्मराजन और उनके ड्राइवर ने किस-किस से फ़ोन पर बात की. पुलिस फ़ोन कॉल के रिकॉर्ड देख रही है, इसी वजह से कुछ लोग कह रहे हैं कि बीजेपी नेताओं का इस घटना से वास्ता है, जबकि ऐसा है नहीं."

गोपालकृष्णन बोले, "फ़ोन रिकॉर्ड के आधार पर ही सुंरेंद्रन के बेटे, हरिकृष्णन का नाम इस जाँच में आया है. हो सकता है कि एसआईटी उन्हें समन भेजे."

उन्होंने कहा, "केरल के मुख्यमंत्री और कांग्रेस से गठबंधन वाला यूडीएफ़ (यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ़्रंट) इस मौक़े को पार्टी की छवि ख़राब करने के लिए इस्तेमाल कर रहा है."

मगर जैसे-जैसे पुलिस की जाँच में नये मोड़ आ रहे हैं और कुछ-कुछ चीज़ें निकलकर सामने आ रही हैं, वैसे-वैसे बीजेपी के अपने सर्किल में भी तू-तू मैं-मैं की ख़बरें सुनने को मिल रही हैं.

जैसे, बीजेपी ओबीसी मोर्चा के पदाधिकारी रिषी पल्पू की प्राथमिक सदस्यता रद्द कर दी गई है क्योंकि उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था कि ज़िला कमेटी को इस मामले के सामने आने के बाद अपने पदों से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.

बी गोपालकृष्णन के अनुसार, पल्पू के ख़िलाफ़ कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि वे विपक्ष की भाषा बोल रहे थे. उन्होंने कहा, "ऐसे समय में, जब हमें सामंजस्य बनाये रखने की ज़रूरत है, उनका पार्टी के ख़िलाफ़ बोलना सही नहीं माना जा सकता."

बताया गया है कि केरल के पुलिस चीफ़ द्वारा यह मामला एसआईटी को सौंपे जाने के बाद, बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व में भी हलचल देखी गई थी.

इसके बाद बीजेपी ने भी इस मामले की जाँच के लिए तीन सदस्यों की एक कमेटी गठित की जिसे मामले की जाँच कर, रिपोर्ट भेजने को कहा गया.

बीजेपी की इस कमेटी में 'मेट्रोमैन ऑफ़ इंडिया' के नाम से मशहूर ई श्रीधरन, पूर्व डीजीपी और चुनाव में बीजेपी के प्रत्याशी रहे जेकब थॉमस और एक अन्य सेवानिवृत्त सिविल अधिकारी शामिल हैं.

इस कमेटी ने कोई रिपोर्ट भेजी या नहीं, इसके बारे में बीजेपी के प्रवक्ता बी गोपालकृष्णन को कोई जानकारी नहीं है. वे कहते हैं, "केंद्रीय नेतृत्व को कमेटी से क्या जानकारी मिली, इसका हमें नहीं पता. इसलिए मैं कमेटी की कार्यशैली पर टिप्पणी नहीं करना चाहूँगा."

हमने इस मामले में श्रीधरन को फ़ोन किया लेकिन न ही वो फ़ोन उठाते हैं और ना ही उन्होंने मैसेज का जवाब दिया.

ये मामला उछला कैसे?

दरअसल पिछले सप्ताह दो तरह के आरोपों की चर्चा तेज़ हुई. एक ये था कि बीजेपी पैसे देकर किसी प्रत्याशी को रास्ते से हटाना चाहती थी. और दूसरा ये कि पार्टी (बीजेपी) पैसे देकर किसी उम्मीदवार को चुनाव में अपना सहयोगी बनाना चाहती थी.

इन दोनों ही आरोपों की वजह से इस मामले को फिर से उछाल मिला.

इनमें से एक आरोप आदिवासी नेता सीके जानू के एक क़रीबी ने लगाया था. सीके जानू केरल की जेआरएस पार्टी के एक सम्मानित नेता हैं. उनके एक क़रीबी ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने जानू को एनडीए के बैनर तले चुनाव लड़ने के लिए लाखों रुपये दिये थे. हालांकि, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्रन और जानू, दोनों ही इन आरोपों को निराधार बताते हैं.

दूसरा आरोप बीएसपी के उम्मीदवार के सुंदर ने लगाया जिन्होंने कहा कि नामांकन वापस लेने के लिए उन्हें बीजेपी ने दो लाख रुपये, एक मोबाइल फ़ोन और उनकी माँ को पचास हज़ार रुपये दिये थे. के सुंदर उसी विधानसभा क्षेत्र से बीएसपी के उम्मीदवार थे, जहाँ से बीजेपी अध्यक्ष के सुरेंद्रन चुनाव लड़े थे. हालांकि, सुरेंद्रन चुनाव हार गए थे.

मगर बीजेपी बीएसपी नेता के इस आरोप को भी एक 'फ़र्जी कहानी' बता रही है. लेकिन कसरगोड पुलिस ने ज़िला न्यायाधीश के आदेश पर बीजेपी चीफ़ के सुरेंद्रन के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 171-बी और 171-ई के तहत मामला दर्ज कर लिया है और पुलिस ने इस मामले में के सुंदर का बयान भी रिकॉर्ड किया है.

बीजेपी इस बार केरल में अपनी एकमात्र सीट को बचाने में भी नाकाम रही थी जो उसने 2016 में जीती थी. साथ ही 2019 के लोकसभा चुनाव की तुलना में पार्टी का वोट प्रतिशत भी पहले से कम रहा.

ब्लैक मनी केस का अंजाम क्या होगा, इसके बारे में अभी कहा नहीं जा सकता. लेकिन मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का कहना है कि "इस मामले की जाँच पूरी तेज़ी से चल रही है."

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