चीन और भारत के बीच अभी भी विश्वास में कमीः जनरल नरवणे - प्रेस रिव्यू

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अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के अनुसार भारत के सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने कहा है कि पूर्वी लद्दाख के देपसांग इलाक़े के समाधान के लिए भारत ने अपनी रणनीति बना रखी है.

बुधवार को 'विवेकानंद इंटरनेशनल फ़ाउंडेशन' द्वारा आयोजित एक वेबिनार में सेना प्रमुख ने कहा कि पैगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारे से भारत और चीन की सेनाओं का पीछे हटना दोनों पक्षों के लिए लाभकारी स्थिति है. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को यह महसूस होना चाहिए कि उन्होंने कुछ हासिल किया है.

उन्होंने कहा कि पूर्वी लद्दाख में अन्य लंबित मुद्दों के समाधान के लिए भी रणनीति बनाई गई है.

सेना प्रमुख ने इस बात को स्वीकार किया कि चीन और भारत के बीच अभी विश्वास में कुछ कमी है. उनका कहना था, "दोनों के बीच विश्वास में कमी है और जब तक वो कमी दूर नहीं हो जाती, हम इस बात पर नज़र रखेंगे कि एलएसी के दोनों तरफ़ क्या गतिविधियां हो रहीं हैं. लेकिन कुल मिलाकर हमने काफ़ी कुछ हासिल किया है."

यह पूछे जाने पर कि क्या चीन पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत के ख़िलाफ़ दो मोर्चों पर लड़ाई की शुरुआत कर सकता है, जनरल नरवणे का कहना था, "इस तरह की साठगांठ के कोई संकेत नहीं मिले हैं लेकिन भारत ने केवल दो को नहीं बल्कि ढाई मोर्चों को ध्यान में रख दूरगामी योजना बना रखी है."

सेना प्रमुख ने आधे मोर्चे का हवाला आंतरिक सुरक्षा के लिए दिया.

उन्होंने कहा कि पूर्वी लद्दाख के देपसांग इलाक़े में, उत्तरी सीमा से लगे अन्य क्षेत्रों में कुछ मुद्दे बाक़ी हैं.

यह पूछे जाने पर कि क्या हमारे पास भविष्य में बातचीत करने के लिए कुछ बाक़ी है, जनरल नरवणे का कहना था, "देपसांग इलाक़े के लिए हमारे पास रणनीति है लेकिन वह रणनीति क्या होगी और समझौते पर क्या प्रगति होगी, यह देखना होगा."

ख़ामोश रहने का अधिकार वर्तमान दौर में सबसे ठीक: फ़ेसबुक इंडिया उपाध्यक्ष

हिंदुस्तान अख़बार में छपी ख़बर के अनुसार फ़ेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अजीत मोहन ने कहा है कि मौजूदा दौर में ख़ामोश रहने का अधिकार सबसे उपयुक्त है.

पिछले साल दिल्ली में हुए दंगों की जाँच-पड़ताल के सिलसिले में दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सद्धाव समिति ने अजीत मोहन को गवाह के तौर पर पेश होने के लिए समन जारी किया था. अजीत मोहन ने इसको चुनौती दी थी.

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में इसी मामले की सुनवाई के दौरान अजीत मोहन ने कहा कि दिल्ली विधानसभा को शांति एवं सद्भाव के मुद्दे की जाँच पड़ताल करने के लिए एक समिति गठित करने का कोई क़ानूनी अधिकार नहीं है.

फ़ेसबुक अधिकारी के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि शांति समिति का गठन दिल्ली विधानसभा का मुख्य कार्य नहीं है क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी में क़ानून और व्यवस्था का मुद्दा केंद्र के अधीन आता है.

सुनवाई के दौरान साल्वे ने कहा, "पिछले दरवाज़े के माध्यम से शक्ति के विस्तार की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और ख़ामोश रहने का अधिकार वर्तमान दौर में सबसे उपयुक्त है."

दिल्ली विधानसभा की समिति की तरफ़ से वकील एएम सिंघवी ने कहा कि विधानसभा को समन करने का पूरा अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने फ़ेसबुक अधिकारी, दिल्ली विधानसभा और केंद सरकार के वकीलों की दलील सुन ली है और फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है.

यूपी: धर्म परिवर्तन बिल विधानसभा में पारित

दैनिक जागरणकी ख़बर के अनुसार योगी आदित्यनाथ सरकार ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक-2021 को विधानसभा में पास करा लिया है.

बुधवार को यूपी विधानसभा में इस विधेयक को ध्वनि मत से पारित किया गया. 28 नवंबर, 2020 को राज्यपाल आनंदीबने पटेल की मंज़ूरी मिलने के साथ ही उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश-2020 लागू हो गया था.

योगी कैबिनेट ने पिछले साल 24 नवंबर को इसकी मंज़ूरी दी थी और चार दिनों बाद राज्यपाल ने इस पर हस्ताक्षर कर दिए थे और इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई थी.

नियम के अनुसार अध्यादेश को छह माह के भीतर विधानमंडल के दोनों सदनों में मंज़ूरी दिलानी होती है. अब सरकार इस विधेयक को विधान परिषद में ले जाएगी.

उसके बाद राज्यपाल के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा. राज्यपाल की मंज़ूरी के बाद यह क़ानून बन जाएगा.

फ़र्ज़ी मुठभेड़ के 51 साल बाद सरकार ने पीड़ित के परिवार को मुआवज़ा देने की घोषणा की

इंडियन एक्सप्रेस की एक ख़बर के अनुसार केरल पुलिस के ज़रिए किए गए एक फ़र्ज़ी मुठभेड़ के 51 साल बाद राज्य सरकार ने पीड़ित के परिवार को मुआवज़ा देने का फ़ैसला किया है.

ए वर्गीज़ नाम के एक माओवादी नेता को केरल पुलिस ने 18 फ़रवरी, 1970 को एक फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मार दिया था. पिछले महीने वर्गीज़ के भाई और बहन ने केरल होईकोर्ट में अपील दायर कर मुआवज़ा की माँग की थी.

सरकार ने अदालत से कहा था कि परिजन चाहें तो सरकार से इस बारे में बात कर सकते हैं और फिर सीपीएम के नेतृत्व वाली वाममोर्चे की सरकार ने 50 लाख रुपए का मुआवज़ा देने का फ़ैसला किया.

मुठभेड़ के बाद पुलिस की दलील को लगभग सभी लोगों ने स्वीकार कर लिया था लेकिन साल 1998 में एक सेवानिवृत्त सिपाही रामचंद्रन नायर ने क़बूल कर लिया था कि वो मुठभेड़ फ़र्ज़ी थी.

उसके बाद केस दर्ज किया गया. साल 2010 में सीबीआई की विशेष अदालत ने रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी के लक्ष्मण को दोषी पाते हुए सज़ा सुनाई थी. लक्ष्मण उस समय डिप्टी एसपी थे और उन्हीं के आदेश पर सिपाही रामचंद्रन ने वर्गीज़ को पुलिस हिरासत में गोली मारी थी.

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