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किसानों का चक्का जामः 3 घंटों के दौरान देशभर में कहां-कहां, क्या-क्या हुआ
तीन कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे 40 से अधिक किसान संगठनों का देशभर में बुलाया गया तीन घंटे का 'चक्का जाम' समाप्त हो गया है.
दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में चक्का जाम नहीं बुलाया गया था.
सामाचर एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, राजधानी दिल्ली में शहीद पार्क के पास प्रदर्शन के दौरान क़रीब 50 लोगों को हिरासत में लिया गया है. वहीं दिल्ली मेट्रो ने दस मेट्रो स्टेशनों के दरवाज़ें चक्का जाम के मद्देनज़र बंद रखे थे.
चक्का जाम का सबसे ज़्यादा असर हरियाणा और पंजाब में दिखाई दिया जहां अधिकतर राज्य और राष्ट्रीय राजमार्ग बंद रहे.
26 जनवरी की ट्रैक्टर परेड के बाद से ये किसान संगठनों का पहला बड़ा प्रदर्शन था.
किसान संगठनों और सरकार के 11 दौर की वार्ता के बाद बातचीत टूट गई है और तीनों क़ानूनों को लेकर गतिरोध बना हुआ है.
चक्काजाम के दौरान देश के कई हिस्सों से पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों की रिपोर्टें भी आई हैं.
वहीं दक्षिण भारत के कर्नाटक और तेलंगना में पुलिस ने सुबह से ही किसान नेताओं को नज़रबंद करना शुरू कर दिया था.
बावजूद इसके बैगंलुरू, हैदराबाद, विजयवाड़ा, कोच्ची और चैन्नई जैसे शहरों में प्रदर्शन हुए.
दक्षिण भारत के किसान संगठन भी तीन कृषि क़ानूनों को रद्द करने की मांग का समर्थन कर रहे हैं.
उधर महाराष्ट्र में भी किसान संगठनों ने चक्का जाम में हिस्सा लिया. सतारा ज़िले के कराड़ शहर में कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण और उनकी पत्नी सत्वाशीला चव्हाण समेत कम से कम चालीस प्रदर्शनकारियों को एक व्यस्त सड़क मार्ग जाम करने के कारण हिरासत में लिया गया.
राजस्थान के हर ज़िले में हाइवे किए जाम, कहीं ट्रैक्टर रैलियां निकालीं तो कहीं सभाएं हुईं
मोहर सिंह मीणा, जयपुर से
किसान आंदोलन के समर्थन में शनिवार को तीन घण्टे के चक्के जाम का व्यापक असर पूरे राजस्थान में देखने को मिला.
जयपुर-दिल्ली हाइवे पर शाहजहांपुर में किसान दो महीने से हाइवे जाम कर बैठे हैं, यहां सर्विस लेन को भी बंद कर दिया गया. जबकि शाहजहांपुर टोल पर किसानों ने हाइवे जाम किया.दौसा, धौलपुर, उदयपुर, सीकर समेत सभी ज़िलों से गुज़रने वाले हाइवे पर सुबह ही किसानों का पहुंचना शुरू हो गया. किसानों ने वाहनों और ट्रैक्टर लगा कर हाइवे जाम कर वहां बैठ गए.
इस दौरान किसानों के चक्का जाम में सत्तादल कांग्रेस के विधायक और पदाधिकारी भी किसानों के बीच पहुंचे और केंद्र के कृषि क़ानून का विरोध किया.कांग्रेस नेता डॉ अर्चना शर्मा ने कहा, "जहां आंदोलन हो रहा है वहां क्षेत्रीय प्रतिनिधि मौजूद हैं. किसान आंदोलन के समर्थन में देश के लोग आ रहे हैं, कांग्रेस भी अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी मानती है."डॉ शर्मा का कहना है कि, "केंद्र की सरकार किसानों के साथ अन्याय कर रही है. हम किसानों की आवाज़ को बुलंद कर रहे हैं. किसानों को न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस हमेशा साथ है."
किसानों के चक्का जाम में कांग्रेस का खुलकर समर्थन करने पर राजस्थान भाजपा अध्यक्ष डॉ सतीश पुनिया का कहना है कि, "कांग्रेस को वैसे तो नैतिक अधिकार नहीं है, उनको किसानों का कल्याण करने के लिए पचास बरस मिले थे. यहां उन्होंने सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल करके इस आंदोलन को अराजक बनाने की कोशिश की है."
कोटा, नागौर समेत कई ज़िलों में किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकाली. यहां बड़ी संख्या में किसान एकजुट हुए, भरतपुर में किसानों के समर्थन में सभा बुलाई गई. राज्य में चक्का जाम शांतिपूर्ण रहा. कहीं से भी किसी तरह के उपद्रव की जानकारी नहीं आई है.
राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एमएल लाठर का कहना है कि किसानों के चक्का जाम के दौरान किसी भी तरह की घटना की सूचना नहीं आई है.
अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमराराम ने कहा कि, "आज 12 बजे से 3 बजे तक किसानों ने ऐतिहासिक चक्का जाम करके मोदी के मनसूबों को धराशायी कर दिया है. कश्मीर से कन्याकुमारी और नागालैंड से गुजरात तक चक्का जाम करके सरकार को जवाब दिया है."
मध्य प्रदेश में कई जगह किसानों ने सड़कें जाम कीं
शुरैह नियाज़ी, भोपाल से
मध्य प्रदेश में कृषि कानूनों को लेकर शनिवार को किये जा रहे किसानों के चक्का जाम को विपक्षी काग्रेंस पार्टी ने भी अपना समर्थन दिया.
भोपाल में काग्रेंस नेताओं ने भी बढ़ चढ़ कर चक्काजाम में हिस्सा लिया. उन्होंने हाइवे पर काफी देर तक ट्रैफिक जाम किया. पुलिस प्रशासन ने दबाव बना कर रखा था इसकी वजह से शहर में प्रदर्शन नही हो पाया. शहर के बाहर पार्टी ने ज़रूर प्रदर्शन किए.
उज्जैन में किसानों ने चक्का जाम करके सड़कों पर ट्रैफिक को रोका. चक्का जाम करने पहुंचे किसानों ने रोड पर ही रोटी बनाई.
वही जबलपुर में भी किसानों ने कुछ वक़्त के लिये चक्का जाम किया और उसके बाद एसडीएम को ज्ञापन सौंप कर आंदोलन ख़त्म कर दिया.
इस चक्काजाम में स्कूल बसों और एंबुलेंस को छूट दी गई थी. वही दतिया में भी किसानों ने प्रदर्शन कर कई घंटों तक चक्काजाम किया.
छत्तीसगढ़ में भी चक्काजाम का असर
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में राष्ट्रीय राजमार्ग पर दोपहर बाद से गाड़ियों के पहिये थमे रहे. राजमार्ग के लाखौली इलाके में बडी संख्या में किसानों ने सड़कों पर प्रदर्शन किया.
भुवनेश्वर में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाया
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में नवनिर्मण कृषक संगठन के कार्यकर्ताओं ने हंसपाल चौक पर जाम लगाया. यहां पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को ज़बरदस्ती हटा दिया.
पटना में भी हुए प्रदर्शन
वामपंथी संगठनों ने बिहार की राजधानी पटना के डाकबंगाला चौक पर जाम लगाया. ऑल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर बिहार में जगह जगह राष्ट्रीय राजमार्ग, स्टेट हाइवे व अन्य सड़कों का चक्का जाम किया गया.
झारखंड में ढाई घंटे ठप्प रहा यातायात
आनंद दत्त, रांची से
कृषि क़ानूनों के विरोध में शनिवार को बुलाए गए देशव्यापी चक्का जाम का झारखंड में ठीक-ठाक असर रहा.
राजधानी रांची के बूटी मोड़ पर राज्य के कृषि मंत्री बादल पत्रलेख खुद चक्का जाम कराने पहुंचे. कांग्रेस, जेएमएम सहित अन्य राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने लगभग ढाई घंटे तक मुख्य मार्ग को जाम रखा. इसका असर ये हुआ कि रांची से रामगढ़, हज़ारीबाग, जमशेदपुर, बोकारो सहित अन्य जगहों पर जाने-वाली बसों की लंबी कतार लग गई.
इस मौके पर कृषि मंत्री ने कहा कि,"केंद्र सरकार जब तक इस क़ानून को वापस नहीं लेती, विरोध होता रहेगा. उन्होंने कहा कि यह कृषि क़ानून नहीं, किसानों का डेथ वारंट है. इस क़ानून पर राज्यों की विधानसभाओं में भी बहस होनी चाहिए थी, जो कि नहीं हुई."
इसके अलावा गोड्डा के कारगिल चौक, पलामू के रड़मा चौक, गढ़वा के एनएच343 पर जाम से छत्तीसगढ़ जाने वाले ट्रकों की लंबी कतार लग गई. हालांकि इस दौरान राज्य भर में कहीं भी किसी की गिरफ्तारी की कोई सूचना नहीं है.
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