राम सिंह: किसानों के दुख से दुखी होकर जान देने वाले सिख प्रचारक

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- Author, सत सिंह
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, करनाल (हरियाणा) से
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 4 मिनट
कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ जारी किसान आंदोलन के बीच बुधवार को 65 वर्षीय सिख प्रचारक राम सिंह सिंघड़ा ने आत्महत्या कर ली थी. अपने अनुयायिओं के बीच वो संत बाबा राम सिंह जी नाम से भी जाने जाते थे.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ उनके पास से पंजाबी भाषा में लिखी एक चिट्ठी मिली थी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह चिट्ठी राम सिंह ने ही लिखी थी. उन्होंने चिट्ठी में कहा था कि "उनसे किसानों का दुख नहीं देखा जा रहा है".
पुलिस इस पर्ची की सत्यता की जाँच कर रही है.
राम सिंह हरियाणा के करनाल ज़िले के सिंघड़ा में रहते थे. वो हरियाणा में तो मशहूर थे ही, साथ ही अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में भी उनकी लोकप्रियता कम नहीं थी. उनके दो फ़ेसबुक पेज भी हैं, जिसके जरिए विदेशी श्रद्धालु उनसे जुड़ते थे.
सिंघड़ा के गुरुद्वारे में नियमित रूप से जाने वाले श्रद्धालु मुख्तयार सिंह ने कहा, "बाबा जी बहुत दयालु और मृदुभाषी थे. उनका स्वभाव दोस्ताना था. उन्होंने गुरुद्वारा आने वाले लोगों में कभी जाति, रंग, धर्म या लिंग के आधार पर भेद नहीं किया."
राम सिंह 1990 की शुरुआत में लुधियान के प्रमुख गुरुद्वारे से सिंघड़ा सेवा करने आए थे. उनके नेतृत्व में छोटा सा सिंघड़ा गुरुद्वारा 12 एकड़ में बने शानदार गुरुद्वारे में तब्दील हो गया.

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आख़िरी शब्द-'अत्याचार सहना पाप है'
राम सिंह को सुनने आने वालों में ज़्यादातर लोग करनाल, कैथल और कुरुक्षेत्र जिलों के सिख बहुल गाँवों से थे. उनके प्रवचन सिख धर्म की सीखों पर आधारित हुआ करते थे.
राम सिंह के 'संत राम सिंह जी' नाम के फ़ेसबुक पेज के पोस्ट्स पर पांच हज़ार से ज़्यादा लाइक्स हैं. इन पर उनके कीर्तन से जुड़ी जानकारियाँ शेयर की जाती थीं.
मुख्तयार सिंह ने बताया कि वो राम सिंह को उस दिन से जानते थे जिस दिन वो सिघड़ा गुरुद्वारे आए थे. मुख्तयार याद करते हैं, "बाबा जी दूसरों का दुख देखकर पिघल जाया करते थे."
राम सिंह किसानों के प्रदर्शन में दो बार गए थे. उन्होंने आंदोलन के लिए पाँच लाख रुपये और सैकड़ों कंबल बाँटे थे. गुरुद्वारे की देखभाल करने वाले अमरजीत सिंह भोला ने बताया कि 16 दिसंबर की शाम को वो अपने कुछ अनुयायिओं और कार ड्राइवर के साथ सिंघु बॉर्डर पर थे.
ख़ुदकुशी से पहले राम सिंह ने अपने सभी अनुयायिओं को प्रदर्शन के मंच पर जाने को कहा और कार लॉक करके ड्राइवर को भी दूर जाने को कहा.
रिपोर्ट्स के अनुसार संत राम सिंह ने दो सुसाइड नोट छोड़े हैं जिनमें से एक पुलिस के पास है. दूसरा सुसाइड नोट 10 पन्नों का है. सुसाइड नोट में राम सिंह के आख़िरी शब्द थे, "दूसरों पर अत्याचार करना पाप है और ख़ुद पर होने वाले अत्याचार को बर्दाश्त करना भी पाप है."
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राम सिंह के साथी जोगा सिंह ने बीबीसी पंजाबी सेवा के संवाददाता ख़ुशहाल लाली को बताया कि उन्होंने किसानों की हालत से दुखी होकर ख़ुदकुशी कर ली.
जोगा सिंह ने कहा, "वो दूसरी बार धरना स्थल पर गए थे. वो किसानों की परेशानी को देखकर काफ़ी दुखी थे."
सिंघड़ा गाँव के सरपंच नवदीप सिंह ने बताया कि बाबा राम सिंह के बड़ी संख्या में समर्थक थे और वो गुरद्वारे में ही रहते थे.
उन्होंने बताया, "वो दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर लगातार धरने के लिए जा रहे थे और किसानों के चल रहे इस संघर्ष को लेकर काफ़ी दुखी थे."
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कांग्रेस नेता राहुल गाँधी, कैप्टन अमरिंदर सिंह और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत कई नेताओं ने राम सिंह की मौत पर दुख ज़ाहिर किया है.
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि "सिंघु बॉर्डर पर चल रहे किसानों के संघर्ष के दौरान संत राम सिंह जी की ये ख़बर हैरान कर देने वाली है."
वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी ट्वीट कर लिखा, "संत बाबा राम सिंह जी की खुदकुशी की ख़बर बहुत दुख की बात है. हमारे किसान केवल अपना हक़ माँग रहे हैं, सरकार को उनकी बातें सुननी चाहिए और तीनों काले क़ानूनों को वापस ले लेना चाहिए."
अकाली दल ने भी राम सिंह की मौत पर दुख ज़ाहिर किया है. अकाली दल से जुड़े दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि राम सिंह की मौत ने सभी को झकझोर दिया है.
वहीं राम सिंह की मौत के लिए सरकारी उदासीनता को ज़िम्मेदार ठहराते हुए विपक्षी नेता राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को तुरंत क़ानून रद्द करने चाहिए.
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