किसान आंदोलनः सिंघु बॉर्डर पर सिख प्रचारक ने कथित तौर पर की ख़ुदकुशी

सिख प्रचारक ने की कथित खुदकुशी

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बुधवार शाम को सिंघु बॉर्डर पर 65 वर्षीय सिख प्रचारक राम सिंह सिंघड़ा ने कथित तौर पर ख़ुद को गोली मार ली. इसके बाद उनकी मौत हो गई.

वे हरियाणा के करनाल ज़िले के एक गाँव, सिंघड़ा के थे.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार हाथ से पंजाबी में लिखी एक पर्ची मिली है जो बताया जा रहा है कि मृतक ने लिखी. इसमें लिखा है कि वो 'किसानों के दर्द को सहन नहीं कर पा रहे हैं'. पुलिस इस पर्ची की सत्यता की जाँच कर रही है.

वहीं बीबीसी पत्रकार अरविंद छाबड़ा को एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उन्हें इस घटना की जानकारी मीडिया के ज़रिए ही मिली है.

उन्होंने कहा, "हमारे पास अभी तक ऐसी कोई भी आधिकारिक जानकारी नहीं आई है. पूछताछ के दौरान पता चला है कि उन्हें करनाल के सिविल अस्पताल ले जाया गया था. वहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. पुलिस बयान दर्ज कर रही है."

बीबीसी के सहयोगी सत सिंह के अनुसार करनाल के एसपी गंगा राम पूनिया ने कहा कि शव करनाल के सिविल अस्पताल पहुंच चुका है और पोस्टमॉर्टम हो रहा है.

मृतक के साथी जोगा सिंह ने बीबीसी पत्रकार ख़ुशहाल लाली को बताया कि उन्होंने ख़ुद को गोली मार ली थी.

जोगा सिंह ने कहा, "वे दूसरी बार धरना स्थल पर गए थे. वे किसानों की परेशानी को देखकर काफ़ी दुखी थे."

सिंघड़ा गाँव के सरपंच नवदीप सिंह ने बताया कि बाबा राम सिंह के बड़ी संख्या में समर्थक थे और वो गुरद्वारे में ही रहते थे.

उन्होंने बताया, "वे लगातार दिल्ली-हरियाणा के बॉर्डर पर धरने के लिए जा रहे थे और किसानों के चल रहे इस संघर्ष को लेकर काफ़ी दुखी थे."

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नेताओं ने जताया दुख

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि 'सिंघु बॉर्डर पर चल रहे किसानों के संघर्ष के दौरान संत राम सिंह जी की ये ख़बर हैरान कर देने वाली है.'

वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी ट्वीट कर लिखा - "संत बाबा राम सिंह जी की खुदकुशी की ख़बर बहुत दुख की बात है. हमारे किसान केवल अपना हक़ माँग रहे हैं, सरकार को उनकी बातें सुननी चाहिए और तीनों काले क़ानूनों को वापस ले लेना चाहिए."

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अकाली दल ने भी राम सिंह की मौत पर दुख ज़ाहिर किया है.

अकाली दल से जुड़े दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि राम सिंह की मौत ने सभी को झकझोर दिया है.

वहीं राम सिंह की मौत के लिए सरकारी उदासीनता को ज़िम्मेदार ठहराते हुए विपक्षी नेता राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को तुरंत क़ानून रद्द करने चाहिए.

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