किसान दिल्ली-जयपुर हाइवे करेंगे बंद, टकराव बढ़ने की आशंका

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मोदी सरकार के कृषि क़ानून के ख़िलाफ़ दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर बीते 17 दिनों से किसान डटे हुए हैं.

किसानों और सरकार के बीच पाँच दौर की बात बेनतीजा रही है और किसानों का प्रदर्शन अब भी जारी है. इसी क्रम में उन्होंने आज (शनिवार को) दिल्ली-जयपुर हाइवे को बंद करने का आह्वान किया है.

सिंघु बॉर्डर से किसान नेता बलवीर सिंह राजेवाल ने प्रदर्शन की आगे की रणनीति बताते हुए कहा कि कई लोग कह रहे हैं कि किसान ट्रेन रोकने की योजना बना रहे हैं लेकिन अभी तक हमने ऐसा कुछ भी नहीं तय किया है.

राजेवाल ने कहा कि दिल्ली-जयपुर हाइवे को ब्लॉक करने के लिए प्रदर्शनकारी सिंघु बॉर्डर से नहीं जाएंगे बल्कि राजस्थान से लोग आकर दिल्ली-जयपुर हाइवे को बंद करेंगे. यहां पर जो लोग बैठे हैं वो ऐसे ही बैठे रहेंगे.

दिल्ली-जयपुर हाइवे के अलावा क्या कोई और भी हाई-वे बंद किया जाएगा?

इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में किसान पलवल और नोएडा बॉर्डर पर बैठे हुए हैं. किसान नेता राजेवाल ने यह भी बताया कि प्रस्ताव भेजने के बाद से सरकार की ओर से बातचीत का कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है.

नौ दिसंबर को सरकार के भेजे ड्राफ़्ट को अस्वीकार करने के साथ ही किसान नेताओं ने स्पष्ट कर दिया था कि आने वाले दिनों में संघर्ष को और तेज़ किया जाएगा.

इसी क्रम में किसान मज़दूर संघर्ष कमिटी के एस एस पंधेर ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि 'संघर्ष कमिटी के क़रीब 700 ट्रैक्टर अमृतसर से दिल्ली के लिए निकल चुके हैं. ये दिल्ली बॉर्डर पर पहुँचकर बाक़ी किसानों का साथ देंगे.'

किसान नेताओं और सरकार के बीच पाँच चरण की बातचीत के विफल होने के बाद आठ दिसंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और 13 किसान नेताओं के बीच भी मुलाक़ात हुई थी लेकिन यह बातचीत भी बेनतीजा रही थी.

इसके बाद नौ दिसंबर को सरकार ने 20 पन्नों का एक प्रस्ताव प्रदर्शन कर रहे किसानों को भेजा था लेकिन किसान नेताओं ने उसे स्वीकार करने से मना कर दिया.

प्रस्ताव को ख़ारिज करने के साथ ही किसान नेताओं ने अपनी आगे की रणनीति की घोषणा की थी और ये भी स्पष्ट कर दिया था कि जब तक सरकार उनकी सभी मांगे नहीं मान लेती और कृषि क़ानून को वापस नहीं ले लेती, उनका प्रदर्शन जारी रहेगा.

अपनी आगे की रणनीति की घोषणा करते हुए किसान नेताओं ने आज दिल्ली-जयपुर हाइवे एक्स्प्रेस-वे को बंद करने की बात कही थी.

तो क्या सरकार से बातचीत के सभी रास्ते बंद हो चुके हैं?

शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा है कि उन्होंने बातचीत का रास्ता बंद नहीं किया है और सरकार उन्हें चर्चा के लिए आमंत्रित करेगी तो वो जाएंगे.

दिल्ली-हरियाणा सिंघु बॉर्डर पर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि हमने सरकार के साथ बातचीत से इनकार नहीं किया है.

उन्होंने कहा, "हम अपनी तरफ़ से सरकार को आमंत्रित नहीं करेंगे लेकिन अगर वो हमें बातचीत के लिए बुलाते हैं तो हम ज़रूर जाएंगे."

वहीं भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार और किसान दोनों को पीछे हटना होगा, सरकार क़ानून वापस ले और किसान अपने घर चला जाएगा.

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने दिया दिल्ली वासियों की परेशानी का वास्ता

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को कहा, 'सरकार का भेजा प्रस्ताव किसानों के पास है लेकिन उन लोगों की कोई टिप्पणी हमारे पास नहीं आयी है. हां, लेकिन मीडिया से पता चला कि उन लोगों ने प्रस्ताव को ठुकरा दिया है. अभी उनकी तरफ़ से बातचीत का कोई प्रस्ताव नहीं आया है, जैसे ही प्रस्ताव आएगा हम बातचीत के लिए तैयार हैं."

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, "उन्हें गतिरोध तोड़ना चाहिए. उन्हें आंदोलन समाप्त करके वार्ता का रास्ता अपनाना चाहिए. सर्दी का मौसम है और कोरोना महामारी का संकट भी बना हुआ है. किसान ख़तरे में पड़े हुए हैं. आंदोलन से जनता को भी परेशानी होती है. दिल्ली की जनता परेशान हो रही है, इसलिए जनता के हित में, किसानों के हित में उनको अपने आंदोलन को समाप्त करना चाहिए."

दिल्ली-जयपुर हाईवे के बाद आगे क्या है योजना

नौ दिसंबर को किसानों ने संवाददाता सम्मेलन में आगे की रणनीति की जानकारी दी थी.

  • एक दिन के लिए पूरे देश के टोल प्लाज़ा फ्री कर दिए जाएंगे.
  • बीजेपी के जितने मंत्री हैं उनका घेराव किया जाएगा और पूरी तरीक़े से उनका बहिष्कार किया जाएगा.
  • पंजाब, हरियाणा, यूपी, राजस्थान और मध्य प्रदेश में 14 तारीख़ को धरने लगाए जाएंगे, जो धरने नहीं लगाएगा वो दिल्ली को कूच करेगा. अंबानी और अडानी का कड़ा विरोध होगा.

किन किन क़ानूनों का विरोध कर कहे हैं किसान

पहला - द फ़ार्मर्स प्रोड्यूस ट्रेड एंड कॉमर्स (प्रमोशन एंड फ़ैसिलिटेशन), 2020 क़ानून के मुताबिक़, किसान अपनी उपज एपीएमसी यानी एग्रीक्लचर प्रोड्यूस मार्केट कमिटी की ओर से अधिसूचित मण्डियों से बाहर बिना दूसरे राज्यों का टैक्स दिए बेच सकते हैं.

दूसरा - फ़ार्मर्स (एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन) एग्रीमेंट ऑन प्राइस एश्योरेंस एंड फ़ार्म सर्विस क़ानून, 2020. इसके अनुसार, किसान अनुबंध वाली खेती कर सकते हैं और सीधे उसकी मार्केटिंग कर सकते हैं.

तीसरा - इसेंशियल कमोडिटीज़ (एमेंडमेंट) क़ानून, 2020. इसमें उत्पादन, स्टोरेज के अलावा अनाज, दाल, खाने का तेल, प्याज की बिक्री को असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर नियंत्रण-मुक्त कर दिया गया है.

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