बिहार चुनाव: मतदान संपन्न, 10 नवंबर को आएंगे नतीजे

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बिहार में सात नवंबर को तीसरे और आख़िरी चरण के लिए वोटिंग हुई जिसमें 16 ज़िलों की 78 सीटों पर मतदान हुए. इसमें मुख्य तौर पर सीमांचल और मिथिलांचल के इलाक़े शामिल हैं.

इसी के साथ तीन चरणों में होने वाले बिहार चुनाव का मतदान संपन्न हो गया. नतीजे 10 नवंबर को आएंगे.

चुनाव आयोग का कहना है कि तीसरे चरण में ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक 55.22 प्रतिशत वोटिंग हुई. चुनाव आयोग के मुताबिक़, अंतिम आंकड़े इससे अधिक होंगे.

28 नवंबर को हुए पहले चरण के चुनाव में 55.68 प्रतिशत और 3 नवंबर को हुए दूसरे चरण में 55.70 प्रतिशत वोटिंग हुई थी.

चुनाव आयोग के चंद्र भूषण कुमार के मुताबिक़, "2015 के विधानसभा चुनाव में 56.66 प्रतिशत पोलिंग हुई थी, इस साल जो आंकड़ा आएगा, कोविड-19 के परिपेक्ष्य में सम्मानजनक होगा."

तीसरे चरण का मतदात क्यों था ख़ास?

बिहार की लगभग आधी मुस्लिम जनसंख्या इस तीसरे चरण के विधानसभा क्षेत्रों में रहती है.

लेकिन ये चरण इसलिए भी ख़ास था क्योंकि यहां की कई सीटों पर मुक़ाबला दो मुख्य पर्टियों के बीच या त्रिकोणीय नहीं बल्कि बहुकोणीय था.

तीसरे चरण में उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी, असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम, मायावती की बीएसपी और पूर्व सांसद पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी भी मुक़ाबले में थी.

साल 2015 में इन 78 सीटों में से 54 सीटें जनता दल यूनाइटेड, राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस गठबंधन को मिली थी. वहीं एनडीए का हिस्सा थे बीजेपी, एलजेपी, आरएलएसपी और जीतन राम मांझी की हिंदुस्तान आवाम मोर्चा जो 24 सीटें जीत पाए थे. लेकिन इसमें सबसे ज़्यादा 19 सीटें बीजेपी को मिली थीं.

इस बार महागठबंधन में जेडीयू नहीं है और एलजेपी एनडीए के साथ चुनाव नहीं लड़ी.

तीसरे चरण के लिए बीजेपी ने 35 उम्मीदवार और जेडीयू ने 37 उम्मीदवार खड़े किए थे. साथ ही मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी के भी पाँच उम्मीदवार अपनी किस्मत आज़मा रहे थे.

वहीं राजद ने 46 और कांग्रेस ने 25 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे.

नीतीश सरकार की कैबिनेट के 12 मंत्री तीसरे चरण के चुनाव में उम्मीदवार के तौर पर उतरे. सरायरंजन से विधानसभा स्पीकर रहे विजय कुमार चौधरी, सुपौल से बिजेंद्र प्रसाद यादव, प्रमोद कुमार मोतिहारी से लड़ रहे हैं.

वहीं बिहारीगंज से पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव की बेटी सुभाषिनी यादव कांग्रेस की टिकट पर लड़ रही थीं.

तीसरे चरण में सीमांचल इलाक़ा केंद्र में रहेगा जहां राजद के पारंपरिक वोटर काफ़ी संख्या में है यानी यादव और मुसलमान. लेकिन इस बार कुशवाहा, ओवैसी और पप्पू यादव के गठबंधन ने इस इलाक़े में राजद के लिए थोड़ी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं.

2010 के विधानसभा चुनावों में जेडीयू और बीजेपी ने मिलकर 243 में से 206 सीटें जीती थीं लेकिन सीमांचल के किशनगंज में जगह नहीं बना पाए थे. तब राजद और कांग्रेस को किशनगंज से चार सीटें मिली थीं.

पिछले साल किशनगंज में हुए उपचुनाव में एआईएमआईएम को बिहार में अपनी पहली जीत मिली थी.

वहीं मिथिलाचंल के दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल और सीतामढ़ी ज़िलों की 34 सीटों पर चुनाव हुआ. मुज़फ़्फ़रपुर, वैशाली की भी छह सीटों पर मतदान हुआ. वहीं, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण की 12 सीटों पर भी वोट डाले गए.

पिछली बार मिथिलाचंल से बीजेपी सिर्फ़ छह सीटें जीत पाई थी. इसलिए यहां मुक़ाबला बीजेपी के लिए भी कड़ा है.

इस चरण से पहले बीजेपी ने अपने स्टार प्रचारकों को भरपूर इस्तेमाल किया जिसमें राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा से लेकर योगी आदित्यनाथ भी प्रचार करने के लिए आए.

जेडीयू ने तीसरे चरण से पहले पार्टी-विरोधी गतिविधियों की वजह से 33 नेताओं को निकाल दिया था. साथ ही नीतीश कुमार ने एक रैली से ये एलान भी किया कि ये उनका 'आख़िरी चुनाव' है.

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