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प्रशांत भूषण को अवमानना मामले में आज सज़ा सुना सकता है सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट अवमानना मामले में दोषी ठहराए गए जाने-माने वकील प्रशांत भूषण को आज सज़ा सुना सकता है.
न्यायालय ने भूषण के ट्वीट्स का स्वत: संज्ञान लेते हुए उन्हें भारत के चीफ़ जस्टिस एस.ए. बोबडे और सुप्रीम कोर्ट की आलोचना करने का दोषी क़रार देने के बाद उनकी सज़ा पर फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था.
भूषण ने यह कहते हुए अदालत से माफ़ी मांगने या अपनी टिप्पणी वापस लेने से इनकार कर दिया था कि ऐसा करना उनकी 'अंतरात्मा और कोर्ट की अवमानना के समान' होगा.
सुप्रीम कोर्ट के सामने भूषण के वकील ने तर्क दिया था कि कोर्ट को अपनी आलोचना स्वीकार करनी चाहिए. वहीं अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगापोल ने सुप्रीम कोर्ट से भूषण को सज़ा न देने की अपील की थी.
मगर अवमानना मामले के तहत कार्रवाई करने की वजह को लेकर सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि जज अपना पक्ष रखने के लिए मीडिया का सहारा नहीं ले सकते.
क्या है मामला
प्रशांत भूषण को सुप्रीम कोर्ट ने दो ट्वीट्स को लेकर अवमानना का दोषी पाया था. 29 जून को किए गए इन ट्वीट्स में उन्होंने महंगी बाइक पर बैठे चीफ़ जस्टिस बोबडे की तस्वीर ट्वीट करते हुए टिप्पणी की थी.
दूसरे ट्वीट में उन्होंने भारत के हालात के संदर्भ में पिछले चार मुख्य न्यायाधीशों की भूमिका पर अपनी राय प्रकट की थी.
सुप्रीम कोर्ट ने इसी को लेकर प्रशांत भूषण को अवमानना का दोषी पाया था. बाद में जस्टिस अरुण मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने 25 अगस्त को सज़ा पर अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था.
फ़ैसला सुरक्षित रखने के दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा था कि 'अगर ग़लती की गई हो तो माफ़ी मांग लेने में कोई नुक़सान नहीं है.'
मगर भूषण की ओर से पेश वकील डॉक्टर राजीव धवन ने कहा कि भूषण कोर्ट का सम्मान करते हैं मगर पिछले चार चीफ़ जस्टिस को लेकर उनकी अपनी एक राय है.
उधर मोदी सरकार के सबसे बड़े वकील के.के. वेणुगोपाल ने अदालत में कहा था कि 'हायर जूडिशरी में भ्रष्टाचार को लेकर कई मौजूदा और रिटायर्ड जजों ने टिप्पणी की है. ऐसे में भूषण अगर अपने शब्दों पर खेद प्रकट करते हैं तो उन्हें चेतावनी देकर छोड़ा जा सकता है.'
क़ानून के छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट को लिखी चिट्टी
विभिन्न लॉ कॉलेजों के छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और अन्य जजों से वकील प्रशांत भूषण को लकर किए अपने फ़ैसले पर पनुर्विचार की अपील की है.
बीबीसी के सहयोगी पत्रकार सुचित्र मोहंती के मुताबिक़, देश के विभिन्न कॉलेजों के 122 छात्रों ने एक 'इमोशनल' लेटर में चीफ़ जस्टिस बोबडे और सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि अवमानना मामले में भूषण को सज़ा सुनाए जाने पर फिर से विचार किया जाए.
इस खुले पत्र में लिखा गया है, "हमने भूषण को अदालतों में पारदर्शिता, पर्यावरण संरक्षण और मानवाधिकारों के लिए लड़ते हुए देखा है. हमारी बिरादरी और देश के लिए उनका योगदान अहम है."
पत्र में लिखा गया है कि 'जजों की सही ढंग से आलोचना करना अपराध नहीं, बल्कि ज़रूरी अधिकार है.'
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