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वेदांता स्टरलाइट केस: मद्रास हाई कोर्ट से वेदांता को झटका, बंद रहेगा प्लांट
मद्रास हाई कोर्ट ने स्टरलाइट कॉपर फ़ैक्ट्री को बंद करने के तमिलनाडु प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के फ़ैसले को जारी रखा है.
इस कंपनी के विरोध में हुई हिंसा में पुलिस फ़ायरिग के दौरान 13 लोगों की मौत हो गई थी.
वेदांता लिमिटेड ने कारखाने को फिर से खोलने के लिए रिट याचिका दायर की थी. हाई कोर्ट ने उन सभी याचिकाओं को ख़ारिज करते हुए यह फ़ैसला सुनाया.
फैक्ट्री परिसर में बिजली और पानी के कनेक्शन को बहाल करने के वेदांता लिमिटेड के अनुरोध को भी कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया.
तमिलनाडु के तटीय शहर तूतीकोरिन में वेदांत लिमिटेड के स्वामित्व वाली विवादास्पद स्टरलाइट फैक्ट्री के खिलाफ़ स्थानीय लोग और पर्यावरण के पैरोकार बीते दो दशक से प्रदर्शन और विरोध जताते आ रहे थे.
पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी मानकों की उपेक्षा करने के कारण कंपनी को काफ़ी विरोध का सामना करना पड़ा.
पुलिस फ़ायरिंग में 13 लोगों की मौत
यूं तो साल 1996 में कारखाने की स्थापना के बाद से ही इसे विरोध का सामना करना पड़ रहा था और समय-समय पर लोगों ने प्रदर्शन भी किए लेकिन मई साल 2018 में फैक्ट्री के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर विरोध हुए.
इस बार विरोध की आवाज़ अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंची. साल 2018 मई में प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोलीबारी में एक नाबालिग लड़की समेत 13 लोग मारे गए थे. सरकारी पक्ष की दलील थी कि पुलिस ने हिंसक हो चुकी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए फ़ायरिंग की थी. हिंसा और आगजनी के आरोप में क़रीब 200 से अधिक लोगों के ख़िलाफ़ मामला भी दर्ज किया गया था.
कारखाना बंद करना
इस घटना के बाद विरोध-प्रदर्शन और तेज़ हुआ. परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने 28 मई 2018 को कारखान बंद करने का आदेश दे दिया. वेदांता ने तमिलनाडु सरकार के आदेश के ख़िलाफ़ जाते हुए नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल से अपील की .
एनजीटी के विशेषज्ञों के एक पैनल का गठन हुआ जिसने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कंपनी को कुछ विशेष प्रतिबंधों और नियमों के साथ दोबारा से खोले जाने की अनुमति दी जा सकती है.
इसके बाद तमिलनाडु सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई जहां उसने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि किसी ट्राइब्यूनल को राज्य सरकार के आदेश को रद्द करने का अधिकार नहीं है.
इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ट्राइब्यूनल के आदेश को रद्द कर दिया और दोनों पक्षों को मद्रास हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया. इसी मामले की सुनवाई करते हुए मद्रास हाई कोर्ट ने मंगलवार यह फ़ैसला दिया है.
वेदांता ने कोर्ट से इस फ़ैसले पर दो सप्ताह का स्टे देने का अनुरोध किया था लेकिन हाई कोर्ट के न्यायाधीशों ने इस मामले पर कोई सुनवाई नहीं की.
महाराष्ट्र से बाहर जाना पड़ा
स्टरलाइट कारखाने को शुरू में महाराष्ट्र के रत्नागिरी में स्थापित किये जाने की योजना थी.
स्टरलाइट को लेकर तूतीकोरिन में जो हालात हुए हैं वो कई साल पहले महाराष्ट्र में भी हो सकते थे. 90 के दशक में महाराष्ट्र के रत्नागिरी में कंपनी ने कॉपर स्मलेटिंग प्लांट (तांबा पिघलाने का संयंत्र) लगाने का प्रस्ताव दिया था.
लेकिन कोंकणी के लोगों ने तब इसका इतना ज़बर्दस्त विरोध किया था कि कंपनी को वहां से जाना पड़ा.
जब स्टरलाइट कंपनी ने कोंकण में प्रवेश किया था तो एक लाख लोगों को नौकरी देने का वादा और शहर के विकास की बात की थी.
कंपनी ने रत्नागिरी के पास महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) के प्लॉट नंबर 'वाई1' को लेकर एमआईडीसी के साथ 5 अगस्त 1992 को एक समझौता किया था.
इस समझौते के मुताबिक़, कंपनी को 20,80,600 वर्ग मीटर ज़मीन 99 सालों के लिए लीज़ पर दी गई थी. स्टरलाइट कंपनी यहां कॉपर स्मेलटिंग प्रॉजेक्ट शुरू करना चाहती थी.
रत्नागिरी ज़िला कोंकण मंडल के अंतर्गत आता है. यह प्रॉजेक्ट रत्नागिरी में शुरू करने की योजना बनाई गई थी. लेकिन रत्नागिरी के लोगों का आरोप था कि कंपनी का ये प्रॉजेक्ट पर्यावरण के लिए नुक़सानदायक है. तब लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया और यह विरोध प्रॉजेक्ट के रद्द होने तक जारी रहा था.
बाद में राज्य सरकार ने 15 जुलाई 1993 को रत्नागिरी कारखाने की अनुमति को वापस ले लिया जिसके बाद निर्माण बंद कर दिया गया. बाद में वेगांता ने तूतीकोरिन में कारखाना शुरू करने के लिए नई योजना तैयार की.
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