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पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैय्यबा के चार चरमपंथी टेरर फ़ंडिंग के दोषी क़रार- आज की बड़ी ख़बरें
पाकिस्तान में लाहौर की एक अदालत ने प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा के चार अधिकारियों को ग़ैर-क़ानूनी फ़ंडिंग का दोषी क़रार दिया है और उन्हें क़ैद और जुर्माने की सज़ा सुनाई है.
आतंकवाद निरोधी अदालत ने पिछले साल दर्ज किए गए मुक़दमे की सुनवाई पूरी होने के बाद गुरुवार को अपना फ़ैसला सुनाया.
लश्कर-ए-तैय्यबा के प्रोफ़ेसर ज़फ़र इक़बाल और यहया अज़ीज़ उर्फ़ यहया मुजाहिद को पाँच-पाँच साल की क़ैद और 50 हज़ार रुपए जुर्माने की सज़ा सुनाई गई है, जबकि प्रोफ़ेसर हाफ़िज़ अब्दुर्रहमान मक्की और हाफ़िज़ अब्दुस्सलाम बिन मोहम्मद को एक साल क़ैद और 20 हज़ार रुपए जुर्माने की सज़ा सुनाई गई है.
हाफ़िज़ अब्दुर्रहमान मक्की प्रतिबंधित संगठन के राजनीतिक मामलों को देखते थे, जबिक यहया अज़ीज़ उर्फ़ यहया मुजाहिद संगठन के प्रवक्ता रहे हैं.
नेपाल की राष्ट्रपति ने नए नक़्शे को मंज़ूरी दी
नेपाल की राष्ट्रपति विद्दा देवी भंडारी ने नेपाल के नक़्शे को बदलने संबंधी संविधान संशोधन बिल पर हस्ताक्षर कर दिया है.
उनके हस्ताक्षर के बाद नेपाल के नए नक़्शे को सरकारी मंज़ूरी मिल गई है और अब नेपाल आधिकारिक रुप से अपने नक़्शे में कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को दिखा सकता है.
ये तीनों जगहें फ़िलहाल भारत के उत्तराखंड में हैं और इस पर भारत का क़ब्ज़ा है. नेपाल इसे अपना क्षेत्र मानता है लेकिन ये पहली बार हुआ है जब नेपाल ने इन इलाक़ों को अपने आधिकारिक नक़्शे में शामिल करने का फ़ैसला किया है.
भारत इन दावों का ख़ारिज करता है और इसे अपना इलाक़ा मानता है.
इससे पहले गुरुवार को ही नेपाली संसद के ऊपरी सदन ने भी देश के नए नक़्शे को सर्वसम्मति से पारित कर दिया था.
नए नक़्शे में लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को नेपाल की सीमा के अंदर दिखाया गया है. इससे पहले संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा ने भी सर्वसम्मति से नए नक़्शे को मंज़ूरी दे दी थी.
काठमांडू स्थित पत्रकार सुरेंद्र फ़ुयाल ने बताया है कि नए नक़्शे और नए राष्ट्रीय प्रतीक को संसद में मौजूद 57 सदस्यों ने मंज़ूरी दी है. नेपाल के ऊपरी सदन में कुल 58 सदस्य होते हैं. संसद के दोनों सदनों में पारित होने के बाद अब इसे मंज़ूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा.
राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिलने के बाद नए नक़्शे को आधिकारिक तौर पर नेपाल के राष्ट्रीय प्रतीक में इस्तेमाल किया जाएगा.
इसके बाद नेपाल सरकार के आधिकारिक लेटर हेड पर इसी नए प्रतीक का इस्तेमाल किया जाएगा. इसमें नेपाल के कूटनीतिक अभियानों में भी इस्तेमाल किया जाएगा.
सुरेंद्र फ़ुयाल ने बताया है कि सदन में बहस से पहले नेपाली कांग्रेस के एक सांसद राधेश्याम अधिकारी ने सरकार से आग्रह किया कि भारत के साथ कूटनीतिक बातचीत की शुरू की जाए ताकि सीमा विवाद को सुलझाया जा सके.
उन्होंने कहा, "हमारा मुख्य उद्देश्य यह पक्का करना है कि कालापानी से भारतीय फ़ौज वापस हो जाए जो कि नेपाल का क्षेत्र है. इसके लिए आगे बातचीत करनी होगी."
लेकिन पूर्व विदेश मंत्री नारायण काजी श्रेष्ठ ने नेपाल के बातचीत के आग्रह को नज़रअंदाज़ करने के लिए भारत की आलोचना की. उन्होंने कहा कि भारत ने नवंबर 2019 में नया नक़्शा रिलीज़ किया था जिसके बाद नेपाल ने बातचीत का आग्रह किया था.
जगन्नाथ यात्रा पर इस साल रोक लगा दी सुप्रीम कोर्ट ने
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा के पुरी में 23 जून को होने वाली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा पर बैन लगा दिया है.
अदालत ने कहा है कि यदि कोरोना महामारी के बीच इस यात्रा की अनुमति दी गई तो भगवान जगन्नाथ हमें माफ़ नहीं करेंगे.
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में लाखों लोगों के जमान होने से संक्रमण की आशंका जताते हुए यात्रा पर रोक लगाने की मांग की गई थी.
कोयले को दशकों के लॉकडाउन से बाहर निकाला हैः मोदी
कॉमर्शियल खनन के लिए कोयला खदानों की नीलामी को लांच करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि ये फ़ैसला भारत के संसाधनों को अनलॉक करने की दिशा में उठाया गया क़दम है.
उन्होंने कहा, आज हम सिर्फ़ कोयले के व्यवसायिक खनन के लिए नीलामी ही शुरू नहीं कर रहे हैं बल्कि कोयला सेक्टर को कई दशकों के लॉकडाउन से बाहर निकाल रहे हैं.
प्रधानमंत्री ने ये भी कहा कि भारत का लक्ष्य दुनिया का सबसे बड़ा कोयल निर्यातक देश बनना है.
उन्होंने कहा कि भारतो ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उठाया गया ये बड़ा क़दम है.
उन्होंने कहा कि ये ऐतिहासिक निर्णय कोयला सेक्टर की तस्वीर बदल देगा.
प्रधानमंत्री ने कहा, 'आत्मनिर्भर भारत यानि भारत इम्पोरट पर अपनी निर्भरता कम करेगा. आत्मनिर्भर भारत यानि भारत इम्पोर्ट पर खर्च होने वाली लाखों करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा बचाएगा।
आत्मनिर्भर भारत यानि भारत को इम्पोर्ट न करना पड़े, इसके लिए वो अपने ही देश में साधन और संसाधन विकसित करेगा.'
वहीं कोल इंडिया के मज़दूर संगठनों ने इस नीलामी का विरोध किया है.
भारत बना संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य
भारत संयुक्त राष्ट्र की 193वीं आमसभा में 184 मत हासिल कर दो साल के लिए सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य नियुक्त हो गया है.
बुधवार को हुए सुरक्षा परिषद चुनाव में भारत के अलावा आयरलैंड, मेक्सिको, नॉर्वे ने भी जीत हासिल की है.
2021-22 कार्यकाल के लिए भारत एशिया प्रशांत क्षेत्र से उम्मीदवार था. भारत की जीत तय थी क्योंकि इस क्षेत्र से भारत इकलौता उम्मीदवार था. एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 55 सदस्यीय समूह ने भारत की सीट का एकमत से समर्थन किया.
इससे पहले भारत सात बार- 1950-1951, 1967-1968, 1972-1973, 1977-1978, 1984-1985, 1991-1992 और 2011-2012 - में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है.
बुधवार को संयुक्त राष्ट्र आम सभा में 75वें सत्र के लिए अध्यक्ष पद का चुना, सुरक्षा परिषद के पाँच अस्थायी सदस्यों का चुनाव और आर्थिक और सामाजिक परिषद के सदस्यों का चुनाव कोरोना वायरस महामारी की वजह से विशेष वोटिंग प्रावधानों के ज़रिए कराया गया.
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता को समर्थन देने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का आभार जताया है और कहा है कि भारत सभी देशों के साथ मिलकर शांति, सुरक्षा और समता को बढ़ावा देने के लिए काम करेगा.
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