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हथिनी की मौत: गिरफ़्तार अभियुक्त ने कहा- विस्फोटक नारियल में था, अनानास में नहीं
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरु से, बीबीसी हिन्दी के लिए
- प्रकाशित
केरल में गर्भवती हथिनी की मौत के मामले में केरल पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने एक शख़्स को गिरफ़्तार किया है. एक पुलिस अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है और यह भी बताया है कि इस मामले में दो अन्य लोगों की तलाश जारी है.
पल्लकड़ ज़िले के पुलिस अधीक्षक जी सिवाविक्रम ने बीबीसी को बताया, ''अभियुक्त रबर की खेती में मज़दूरी का काम करता है. हालांकि उसने हथिनी के साथ ऐसा क्यों किया अब तक पता नहीं चल सकता है. इस मामले में फ़िलहाल जाँच की जा रही है.''
अभियुक्त को एक दिन पहले पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था और शुक्रवार को उसे गिरफ़्तार कर लिया गया. मामले की जाँच कर रहे अधिकारियों के मुताबिक़, इस मामले में दो संदिग्ध अभियुक्तों को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया था और एक शख़्स को पूछताछ के लिए हिरासत में रखा गया था. अभियुक्त को जाँच टीम घटनास्थल पर ले गई और वहां से मिली जानकारी से बाद उसे गिरफ़्तार कर लिया गया.
पुलिस अधिकारी ने कहा, ''अभियुक्त ने इस बात की पुष्टि की है कि जिस चीज़ में विस्फोटक रखा गया था वो अनानास नहीं नारियल था. उसका नाम विल्सन है.''
हालांकि पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उसका पूरा नाम यही है या कुछ और.
सिवाविक्रम ने कहा, ''जानवरों को खेतों से दूर रखने के लिए इस क्षेत्र में लोगों के लिए यह बेहद आम बात है कि वो अनानास, नारियल या कटहल का इस्तेमाल करते हैं.''
केरल के मुख्य वाइल़्डलाइफ़ वार्डन आईएफएस सुरेंद्र कुमार ने बीबीसी को बताया, ''ऐसा लग रहा है कि विस्फोटक रखने का मुख्य मक़सद जंगली सुअरों को खेतों से दूर करना था. हालांकि दो अन्य अभियुक्तों की गिरफ़्तारी के बाद ही स्थिति ज़्यादा स्पष्ट हो पाएगी.''
उन्होंने कहा, ''हमें तभी पता चलेगा कि विस्फोटक के लिए नारियल का इस्तेमाल किया गया था या अनानास का, जब दो अन्य अभियुक्त गिरफ़्तार होंगे. उनमें से एक फ़रार है. बताया जा रहा है कि वही है जिसने फल में विस्फोटक भरकर वहां रखा था. ''
तीन दिन बाद हुई मौत
केरल में पल्लकड़ ज़िले के मन्नारकड़ में विस्फोटक से भरा फल खाने की वजह से 27 मई को एक गर्भवती हथिनी की मौत हो गई थी. दर्द की वजह से हथिनी नदी में घुस गई और वहीं खड़े-खड़े उसकी मौत हो गई थी. अधिकारियों ने शुरुआत में हथिनी के जख़्मों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी क्योंकि नदी में खड़ी हथिनी किसी को अपने पास नहीं आने दे रही थी.
वन विभाग के कर्मचारियों ने जब उसे बाहर निकालने की कोशिश भी की तो वह अपनी जगह से हिली नहीं. तीन दिन तक पानी में खड़े रहने के बाद उसकी मौत हो गई.
यह मामले तब सामने आया जब वन विभाग की रैपिड रेस्क्यू टीम (RRT) के सदस्य मोहन कृष्णन ने फ़ेसबुक पर एक भावुक पोस्ट लिखी और बताया कि किस तरह हथिनी का ऊपरी और निचला जबड़ा गंभीर रूप से जख़्मी हो गया. इससे राहत पाने के लिए हथिनी पानी में मुंह डालकर खड़ी रही.
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और विस्फोटक कानून के तहत इस मामले में वन विभाग औ पुलिस विभाग में अलग-अलग केस दर्ज किए गए हैं.
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