कोरोना वायरस: भारत में क्या इन दवाओं के ट्रायल से उम्मीद जगेगी?

    • Author, ब्रजेश मिश्र
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 4 मिनट

केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद नाइक ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के उस बयान से असहमति जताई है जिसमें उन्होंने कहा था कि आयुष की कुछ दवाओं का ट्रायल कोरोना वायरस से लड़ रहे हाई रिस्क वर्कर्स पर किया जाएगा.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने सात मई को समाचार एजेंसी एएनआई को दिए एक बयान में कहा था कि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों पर अश्वगंधा, यष्टिमधु, गुडूची पिप्पली, आयुष-64 जैसी आयुष दवाओं का नैदानिक परीक्षण शुरू हो गया है.

डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि आयुष मंत्रालय इन दवाओं को हाईरिस्क वाले लोगों पर आजमाना चाहता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इन्हें आगे कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल किया जा सकता है. यानी इस ट्रायल में इनके असर को परखा जाएगा.

डॉ. हर्षवर्धन के इस बयान के बाद यह सवाल उठने लगे कि क्या स्वास्थ्यकर्मियों पर इन दवाओं का परीक्षण करना सही होगा? क्या इन दवाओं का कोई साइड-इफेक्ट हो सकता है या किसी की ज़िंदगी को ख़तरा हो सकता है?

आयुष की दवाओं के ट्रायल का प्रोटोकॉल

देश में फ़िलहाल कोरोना वायरस संक्रमण के कुल मामले क़रीब 60 हज़ार हैं और अब तक क़रीब दो हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है.

बीबीसी से बातचीत में आयुष मंत्री श्रीपद नाइक ने कहा- ऐसा कोई भी ट्रायल स्वास्थ्यकर्मियों पर नहीं किया जा रहा.

इसके बाद ईमेल पर भेजे गए कुछ सवालों पर उन्होंने विस्तार से जानकारी दी.

दवाओं के ट्रायल को लेकर उन्होंने बताया, ''किसी भी स्वास्थ्यकर्मी पर ऐसा कोई भी ट्रायल नहीं किया जा रहा. इस संबंध में क्लिनिकल प्रोटोकॉल तय किया जा चुका है और ट्रायल उसी के आधार पर होंगे.

दवाओं के ट्रायल को लेकर जो चीज़ें तय की गई हैं वो कुछ इस तरह हैं-

हाई रिस्क वाले व्यक्तियों पर अश्वगंधा और हाइड्रॉक्लोरोक्विन की रोग प्रतिरोधी क्षमता (प्रॉफिलैक्सिस) को लेकर तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा.

आयुष मंत्रालय के मुताबिक़-

  • अश्वगंधा, यष्टिमधु, गुडूची पिप्पली, आयुष-64 जैसी आयुष दवाओं की प्रॉफिलैक्सिस स्टडी अलग से हाईरिस्क वाले लोगों पर होगी. सभी चारों दवाओं का ट्रायल अलग-अलग लोकेशन पर मल्टीसेंटर ट्रायल के तौर पर होगा.
  • सभी चारों दवाओं को कोविड के हल्के लक्षणों वाले मरीजों या बिना लक्षण वाले मामलों में टेस्ट किया जाएगा ताकि पता लगाया जा सके कि क्या ये दवाएं इस्तेमाल के लिए सेवाओं में लाई जा सकती हैं या नहीं.
  • इसके अलावा अलग अलग दवाओं के प्रॉक्सिलैक्सिस अध्ययन के बाद देशभर में हाई रिस्क वाली आबादी, क्लारंटीन सुविधाओं पर भी इन दवाओं को इस्तेमाल करने की योजना है. इसके लिए राज्यों की भी मदद ली जाएगी. और बतौर सैंपल पांच लाख लोगों पर इनका टेस्ट किया जाएगा.
  • इसके अलावा आरोग्य संजीवनी ऐप के जरिए 50 लाख लोगों पर इसके असर को आंका जाएगा.
  • कोरोना वायरस से निपटने के लिए आयुष मंत्रालय ने ये ऐप लॉन्च किया है. इसका उद्देश्य आयुष मंत्रालय की ओर से जारी की गई इम्युनिटी गाइडलाइन और दूसरे प्रभावों को परखना है.

मंत्रालय का कहना है कि इस परीक्षण में सभी वैज्ञानिक ज़रूरतों का ध्यान रखा जा रहा है. इसके प्रोटोकॉल का रिव्यू एम्स, एसजीपीजीआई, आईसीएमआर जैसे संस्थानों के शीर्ष रिसर्चर और वैज्ञानिक कर रहे हैं. इन सभी अध्ययनों को एथिक्स कमिटी पास कर रही है. आयुष की सभी दवाएं फार्माकोपिया (औषधकोश) के अंतरगत हैं. इन दवाओं का कोई साइड इफेक्ट नहीं है और न ही इंसानों को इनसे कोई ख़तरा है.

इस अध्ययन के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है जिसकी अगुवाई यूजीसी के वाइस चेयरमैन प्रो. भूषण पटवर्धन कर रहे हैं और इसके साथ ही इसे आयुष मंत्रालय और सीएसआईआर के द्वारा संयुक्त रूप से मॉनिटर किया जाएगा.

आयुष संजीवनी ऐप

आयुष संजीवनी ऐप कोरोना वायरस संक्रमण के दौर में लोगों की इम्युनिटी को परखने और उस पर अध्ययन के लिहाज से लॉन्च किया गया है. आयुष संजीवनी ऐप के जरिए लोगों के स्वास्थ्य को परखा जाएगा.

आयुष मंत्रालय की ओर से जारी की गई गाइडलाइन के मुताबिक, लोगों की इम्युनिटी बढ़ाने और उन्हें स्वस्थ रखने की दिशा में यह बेहतर कदम है. आयुष संजीवनी ऐप के जरिए लोगों को योग, प्राणायम और मेडिटेशन जैसी चीज़ों को रोज़ाना आधे घंटे करने की आदत में शामिल करने की सलाह दी गई है ताकि उनकी इम्युनिटी बेहतर हो सके. इसके साथ ही हल्दी दूध, दिनभर गरम पानी पीने, साथ ही खाने में हल्दी, जीरा, धनिया और लहसुन का इस्तेमाल करने की भी सलाह दी गई है.

इस एडवाइजरी के आखिर में यह भी कहा गया है कि ये सारे उपाय कोविड-19 का इलाज नहीं हैं.

किसी भी तरह के दावे पर आपत्ति

एक अप्रैल को आयुष मंत्रालय की ओर से जारी की गई गाइडलाइन में किसी भी तरह के आयुष संबंधित कोविड-19 इलाज के दावे को छापने पर रोक लगाए जाने के निर्देश जारी किए गए थे. इसके साथ यह भी कहा गया था कि किसी भी तरह के दावे को प्रकाशित करने या ऐसा कोई भी दावा किए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

हालांकि अब मंत्रालय की ओर से खुद आयुष की दवाओं को प्रमोट किया जा रहा है और कोविड-19 के हाईरिस्क मरीज़ों पर इनके ट्रायल की बात कही जा रही है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन यह भी कह चुके हैं कि आयुष की इन दवाओं का ट्रायल कोरोना वायरस के मरीजों का इलाज कर रहे और हाईरिस्क स्तर पर काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों पर किया जाएगा.

वहीं, आयुष मंत्री के मुताबिक स्वास्थ्य कर्मियों पर ऐसा कोई ट्रायल नहीं किया जाएगा.

दोनों मंत्रियों के बयानों में विरोधाभास है.

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