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कोरोना वायरस: अमरीकी रिपोर्ट का दावा, एक-दो साल तक रहेगा कहर-प्रेस रिव्यू
चाहे जैसे भी हालात हों, नॉवल कोरोना वायरस का कहर कम से कम अगले एक-दो साल तक किसी ने किसी रूप में हमें देखने को मिलेगा.
ये दावा एक नई अमरीकी रिपोर्ट में किया गया है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित ख़बर के अनुसार अमरीका के सेंटर फ़ॉर इंफ़ेक्शिस डिज़ीज रिसर्च ऐंड पॉलिसी (CIDRAP) की यह रिपोर्ट गुरुवार को जारी की गई है.
यह रिपोर्ट कोविड-19 से पहले आई वैश्विक महामारियों और मौजूदा तीन संभावनाओं पर आधारित है. इस रिपोर्ट के अनुसार कोरोना वायरस के जल्दी ख़त्म होने की कोई संभावना नहीं है.
रिपोर्ट में कहा गया है, "पहली संभावना ये है कि महामारी उतार-चढ़ाव की स्थिति से गुज़रते हुए साल 2021 तक ख़त्म हो जाए. ये सब अलग-अलग देशों की भौगोलिक परस्थितियों और वायरस पर काबू पाने के लिए उठाए गए कदमों पर भी निर्भर करेगा."
अगर हालात 'बद से बदतर' हुए तो इस रिपोर्ट के अनुसार संक्रमण साल 2022 तक भी रह सकता है. ऐसा 1918-19 में आई स्पैनिश फ़्लू महामारी के दौरान भी देखने को मिला था.
रिपोर्ट के मुताबिक़, अगर सबसे अच्छी संभावना सच हुई तो उसमें संक्रमण 'स्लो बर्न' की स्थिति से होकर गुज़रेगा यानी मामलों में छोटे-छोटे उछाल के साथ ख़त्म हो जाएगा.
खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों को वतन लाएगी सेना
भारतीय नौसेना और वायु सेना का कहना है कि वो कोरोना संकट के बीच मध्य पूर्व देशों में फंसे भारतीयों को वतन वापस लाने के लिए तैयार हैं.
नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा, "खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं. वो वहां महत्वपूर्ण काम करते हैं और अपनी कमाई अच्छी-खासी आमदनी वापस भारत भेजते हैं. हमसे कहा गया है कि हम उन्हें वापस लाने के लिए तैयार रहें और हमने अपनी जहाजें तैयार कर ली हैं.''
एडमिरल करमबीर ने कहा कि जैसे ही उन्हें हरी झंडी मिलेगी वो एयर फ़ोर्स और एयर इंडिया के साथ वहां जाएंगे और भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस ले आएंगे.
इस ख़बर को अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने प्रकाशित किया है.
वहीं, चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने कहा कि रेड ज़ोन में तैनात पुलिस के जवान हालात संभालने में सक्षम हैं और कहीं भी सेना को भेजने की ज़रूरत महसूस नहीं हुई.
तीन मई को देश की तीनों सेनाओं के जवान कोरोना वॉरियर्स का सम्मान भी करने वाले हैं.
दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष पर राजद्रोह का केस
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी ख़बर के अनुसार दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष ज़फ़रुल इस्लाम ख़ान पर राजद्रोह की धाराओं मामला दर्ज किया गया है.
सोशल मीडिया पर कथित रूप से भड़काऊ टिप्पणियां करने के आरोप मे दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गुरुवार को उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया.
जॉइंट कमिश्नर (स्पेशल सेल) नीरज ठाकुर ने बताया कि जफ़रुल इस्लाम ख़ान पर आईपीसी की धारा 124ए (राजद्रोह) और 153ए(दो समुदायों के बीच धर्म, नस्ल या भाषा के आधार पर दुश्मनी पैदा करने की कोशिश) के तहत एफ़आईआर दर्ज की गई है.
जफ़रुल इस्लाम ख़ान ने एफ़आईआर के बारे में पूछे जाने पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा, "मैंने एफ़आईआर देखी नहीं है. जब मैं देख लूंगा, तभी इस बारे में कुछ कह पाऊंगा."
उन्होंने 28 अप्रैल को किए एक ट्वीट में लिखा था, "भारत में इस्लामोफ़ोबिया के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए क़ुवैत का शुक्रिया. हिंदुत्व विचारधारा के कट्टपंथियों को लगा था कि मज़बूत आर्थिक साझेदारी की वजह से अरब देश भारतीय मुसलमानों का साथ नहीं देंगे.कट्टरपंथियों! ये जान लो कि भारतीय मुसलमानों ने अब तक अरब और मुस्लिम जगत से आपके हेट कैम्पेन, लिंचिंग और दंगों की शिकायत नहीं की है. जिस दिन उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया जाएगा, उस दिन कट्टरपंथियों को तूफ़ान का सामना करना पड़ेगा."
जफ़रुल इस्लाम ने अपने एक ट्वीट में भगोड़े इस्लामिक उपदेशक ज़ाकिर नाइक की भी तारीफ़ की थी. ज़ाकिर नाइक पर मनी लॉन्ड्रिंग, यूएपीए (अनलॉफ़ुल एक्टिवीज़ प्रिवेंशन एक्ट) और आतंकवाद से सम्बन्धित मामले दर्ज हैं.
विवाद बढ़ने के बाद जफ़रुल इस्लाम ख़ान ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर माफ़ी भी मांगी थी.
उन्होंने लिखा, "मुझे अहसास है कि मैंने ये ट्वीट ग़लत वक़्त पर किए. मुझे अहसास है कि मेरे ट्वीट असंवेदनशील थे क्योंकि देश इस वक़्त मेडिकल इमर्जेंसी की हालत में है. मैंने जिन्हें भी ठेस पहुंचाया है, उन सबसे माफ़ी मांगना चाहता हूं."
दिल्ली: ICU से ठीक होकर लौटा प्लाज़्मा थेरेपी लेने वाला मरीज़
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया है कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण (एलएनजेपी) अस्पताल में हुआ प्लाज़्मा थेरेपी का एक ट्रायल सफल रहा है.
यहां प्लाज़्मा थेरेपी लेने वाला पहला मरीज़ गुरुवार को ठीक होकर अपने घर चला गया.
इस मरीज़ की हालत गंभीर थी और वो आईसीयू में था लेकिन प्लाज़्मा थेरेपी के बाद ठीक होने पर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. ये ट्रायल सफल होना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले मुंबई में प्लाज़्मा थेरेपी लेने वाले एक बुजुर्ग की मौत हो गई थी.
भारत में प्लाज़्मा थेरेपी अभी ट्रायल स्टेज पर है और बिना केंद्र सरकार की मंज़ूरी के इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. उन्होंने ये भी बताया कि दिल्ली में कोरोना संक्रमण से ठीक हुए 1100 लोग प्लाज़्मा थेरेपी के लिए अपना ख़ून देने को तैयार हैं.
इस ख़बर को जनसत्ता ने प्रकाशित किया है.
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