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शरजील इमाम पर दिल्ली पुलिस ने चार्ज़शीट दाख़िल किया
जेएनयू के छात्र शरजील इमाम के ऊपर दिल्ली पुलिस ने 'राजद्रोह और जामिया में दंग भड़काने वाले भाषण' के लिए चार्ज़शीट दाख़िल किया है.
शरजील इमाम ने नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध-प्रदर्शन के दौरान 15 दिसंबर, 2019 को यह भाषण दिया था.
पुलिस का आरोप है कि उनके भाषण के बाद जामिया के इलाक़े में हिंसा भड़की थी.
शरजील इमाम के वकील अहमद इब्राहिम ने कहा है, "हमने दिल्ली पुलिस की ओर से 17 अप्रैल, 2020 को दाख़िल की गई चार्ज़शीट को पूरी तरह से नहीं देखा है. इसे पूरी तरह से देखने के बाद हम उचित क़दम उठाएंगे."
शरजील को बिहार के जहानाबाद से दिल्ली पुलिस ने 28 जनवरी को गिरफ़्तार किया था. हालांकि परिवार वालों का कहना था कि उन्होंने सरेंडर किया है.
इसके बाद जहानाबाद की अदालत ने उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली पुलिस को सौंप दिया था.
कौन हैं शरजील इमाम
शरजील जहानाबाद के काको के रहने वाले हैं. काको प्रखंड मुख्यालय भी है. यहां की आबादी मिश्रित है. लेकिन काको गांव में मुस्लिम बहुल आबादी है.
शरजील का घर मल्लिक टोले में पड़ता है.
उनके पिता अकबर इमाम की छवि इलाके में अच्छी है. वो दो-दो बार विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं.
2005 में आखिरी बार जदयू के टिकट पर चुनाव लड़े थे तब 2250 वोटों से उन्हें हार मिली थी.
शरजील की प्रारंभिक पढ़ाई काको से हुई है. लेकिन बाद में वे पटना के सेंट जेवियर स्कूल में पढ़ने के लिए चले गए. वहां से डीपीएस वसंत कुंज और फिर आईआईटी पोवई से कम्प्यूटर साइंस इंजीनियरिंग और अब जेएनयू से पीएचडी.
कब और क्यों आए चर्चा में
CAA और NRC का विरोध करने के दौरान शरजील का एक वीडिया वायरल हुआ था. वायरल हुए वीडियो में शरजील कहते हैं कि "अगर हमें असम के लोगों की मदद करनी है तो उसे भारत से कट करना होगा."
शरजील ख़ुद को शाहीन बाग़ में चल रहे विरोध प्रदर्शन का मुख्य आयोजक बताते थे. उन्होंने दो जनवरी को धरना-प्रदर्शन वापस लेने का एलान किया था.
उस समय शरजील ने फ़ेसबुक पर लिखा था कि "शाहीनबाग़ रोड के चक्काजाम को राजनीतिक पार्टियों के गुंडों द्वारा हिंसा की आशंका और आंदोलन के राजनीतीकरण से बचने के लिए वापस ले लिया है."
हालांकि इसके बाद भी शाहीन बाग़ में विरोध-प्रदर्शन जारी रहा था.
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