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आसिया बीबी की आपबीती, 'कुत्तों की तरह घसीटा जाता था'
ईशनिंदा के आरोप से बरी हो चुकी पाकिस्तान की ईसाई महिला आसिया बीबी ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि उन्हें हमेशा यक़ीन था कि वो रिहा होंगी.
फ़िलहाल आसिया बीबी कनाडा में रह रही हैं. उन्हें उम्मीद है कि वो कभी न कभी पाकिस्तान लौट सकेंगी.
उन्होंने फ़्रांसीसी पत्रकार ऐन इसाबेल टूलिट के साथ मिलकर जेल में बिताए अनुभवों के आधार पर एक संस्मरण लिखा है, जिसका नाम है: ऑफ़िन लिब्रे (आख़िरकार आज़ादी).
इस संस्मरण में उन्होंने बताया है कि जेल में सुरक्षाकर्मी उनके साथ कैसा बर्बर बर्ताव करते थे.
आसिया याद करती हैं कि कैसे एक बार उनके गले में एक चेन बांधकर घसीटा गया.
पाकिस्तान के अधिकारियों ने आसिया बीबी के आरोपों से इनकार किया है. उनका कहना है कि प्रताड़ना से जुड़े आसिया के आरोप 'विश्वसनीय' नहीं हैं.
कौन हैं आसिया बीबी?
आसिया बीबी के नाम से जानी जाने वाली आसिया नूरीन पर 2009 में ईशनिंदा का आरोप लगा था. ये आरोप उन पर कुछ महिलाओं के साथ हुई बहस के बाद लगा था. एक साल बाद आसिया को मौत की सज़ा सुनाई गई.
ये पहली बार था जब पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप में किसी महिला मौत की सज़ा सुनाई गई. पाकिस्तान के इस फ़ैसले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा हुई. आख़िर साल 2018 में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने उनकी मौत की सज़ा ख़ारिज कर दी.
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद पाकिस्तान में कट्टरपंथियों ने हिंसक विरोध प्रदर्शन किए. आसिया बीबी ने बीबीसी से तब बात की जब वो अपनी किताब का प्रचार करने के लिए फ़्रांस के दौरे पर थीं.
उन्होंने बताया कि कैसे साल 2009 में पड़ोसियों के साथ चल रहा उनका पुराना झगड़ा उन पर ईशनिंदा के आरोपों की वजह बना. कुछ स्थानीय महिलाओं ने आसिया बीबी पर पैग़म्बर मोहम्मद का अपमान करने का आरोप लगाया.
आसिया याद करती हैं, "मेरे पति काम पर गए थे. मेरे बच्चे स्कूल गए थे और मैं बगीचे में फल लेने गई थी, तभी भीड़ आई और लोग मुझे घसीटकर ले जाने लगे. उन्होंने मेरा मज़ाक बनाया. मैं बेसहारा थी."
अपनी किताब में आसिया बीबी ने बताया है कि जेल में उन्हें रोज़ मौत का डर सताता था क्योंकि बाकी कैदी उन्हें फांसी पर चढ़ाए जाने की मांग करते थे. किताब में उन्होंने जेलकर्मियों के दुर्व्यवहार के बारे में लिखा है.
आसिया ने किताब में एक जगह लिखा है, "मैं सांस नहीं ले पा रही हूं. मेरे गले में एक चेन कसकर बांध दी गई है और जेल का गार्ड मुझे गंदे फ़र्श पर कुत्ते की तरह घसीट रहा है."
आसिया का कहना है कि ईसाई धर्म में उनकी आस्था ने उन्हें ये सारी तकलीफ़ें झेलने की ताकत दी.
वो बताती हैं, "उन्होंने कहा अपना धर्म बदल लो और तुम रिहा हो जाओगी. लेकिन मैंने इनकार कर दिया. मैंने कहा कि मैं अपने धर्म का पालन करते हुए ही सज़ा पूरी करूंगी. मुझे मेरे पति ने बताया कि पूरी दुनिया में लोग मेरे लिए प्रार्थना कर रहे हैं. यहां तक कि पोप ने भी मेरे लिए प्रार्थना की. ये सब सुनकर मुझे लगा कि उनकी प्रार्थना मुझे ज़रूर रिहा करा देगी."
आसिया बीबी ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से ईशनिंदा के आरोप में ग़लत तरीके से अभियुक्त बनाए या दोषी क़रार दिए गए लोगों को रिहा कराने की अपील की है. उन्होंने कहा कि ईशनिंदा के मामलों में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए.
उन्होंने कहा, "बेग़ुनाह लोगों को बेवजह सज़ा नहीं मिलनी चाहिए. जो बेग़ुनाह लोग जेल में हैं, उन्हें रिहा किया जाना चाहिए. जांच के दौरान दोनों पक्षों से ठीक से पूछताछ होनी चाहिए क्योंकि हमारे जांच के तरीकों में कई समस्याएं हैं. ऐसे में ये बता पाना मुश्किल होता है कि कौन किसकी तरफ़ है."
बेशुमार तकलीफ़ें झेलने के बाद भी आसिया पाकिस्तान के बारे में सकारात्मक सोच रखती हैं. उन्हें उम्मीद है कि वो कभी न कभी अपने देश वापस लौटेंगी.
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वो कहती हैं, "आख़िरकार मेरे देश ने ही मुझे रिहा किया. मुझे इस पर गर्व है. मुझे पाकिस्तान इसलिए छोड़ना पड़ा क्योंकि मुझे वहां ख़तरा था. मुझे कभी भी कुछ भी हो सकता था. लेकिन अब भी मेरे दिल में अपने देश के लिए उतना ही प्यार है. मैं आज भी अपने देश की इज़्ज़त करती हूं और मुझे उस दिन का इंतज़ार है, जब मैं वापस पाकिस्तान जाऊंगी."
आसिया बीबी के जेल में रहने के दौरान उनकी मदद की कोशिश करने वाले दो नेताओं शहबाज़ भट्टी और सलमान तासीर की हत्या कर दी गई थी. आसिया को उनकी हत्या का बहुत दुख है.
उन्होंने बताया, "मैं बहुत रोई थी. मैं एक हफ़्ते से ज़्यादा वक़्त तक रोई थी. मैं उन्हें आज भी याद करती हूं और मेरा दिल दर्द से भर उठता है. लेकिन आसिया के मन में अब उन लोगों के लिए कोई कड़वाहट नहीं है जो कभी उनकी हत्या की मांग करते थे.
वो कहती हैं, "मैं बिल्कुल नाराज़ नहीं हूं. मैंने सबको दिल से माफ़ कर दिया और मेरे मन में किसी के लिए कड़वाहट नहीं है. मेरे मन में अब धीरज है. जब मुझे अपने बच्चों को छोड़कर रहना पड़ा तो मैंने सब्र करना सीख लिया."
पाकिस्तानी ईसाई
- मुस्लिम बहुल पाकिस्तान में ईसाइयों की आबादी लगभग 1.6 फ़ीसदी है.
- इनमें से ज़्यादातर वो लोग हैं जो ब्रिटिश राज के दौरान हिंदू से ईसाई बने थे.
- धर्मांतरण करने वालों में ज़्यादातर लोग पिछड़ी जाति से ताल्लुक रखने वाले और जातिगत भेदभावों का शिकार थे.
- पाकिस्तान में ईसाइयों पर हमले ईशनिंदा के ख़िलाफ़ बने क़ानूनों और अफ़गानिस्तान में अमरीका के छेड़े युद्ध के बाद तेज़ी से बढ़े.
पाकिस्तान का ईशनिंदा क़ानून
पाकिस्तान में जो लोग ईशनिंदा के दोषी करार दिए जाते हैं उनमें एक बड़ी संख्या अहमदिया समुदाय के लोगों की है. अहमदिया ख़ुद को मुसलमान मानते हैं लेकिन पारंपरिक कट्टर मुसलमान उन्हें अपने बराबर नहीं मानते.
साल 1990 से ईशनिंदा के लिए दोषी क़रार दिए जाने वाले ईसाइयों की संख्या में भी बढ़त दर्ज की गई.
सेंटर फ़ॉर सोशल जस्टिस के आंकड़ों के अनुसार साल 1987 से लेकर 2017 के बीच पाकिस्तान के ईशनिंदा क़ानून के अलग-अलग प्रावधानों के तहत कुल 720 मुसलमानों, 516 अहमदियों, 238 ईसाइयों और 31 हिंदुओं को अभियुक्त बनाया गया है.
पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि ईशनिंदा क़ानून से जुड़े सभी मामले अदालत में पेश किए जाते हैं और उन पर तय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई होती है.
आसिया बीबी ने अपनी किताब में लिखा है कि पाकिस्तान में ईसाई समुदाय भेदभाव और प्रताड़ना का शिकार होता है. लेकिन पाकिस्तान का कहना है कि वो अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा को गंभीरता से लेता है और संविधान में इसे सुनिश्चित किया गया है.
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