You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
अनिल अंबानी ने ब्रितानी कोर्ट में ख़ुद को बताया दिवालिया : प्रेस रिव्यू
एक समय दुनिया के छठे सबसे अमीर शख़्स रहे अनिल अंबानी ने ब्रिटेन की एक अदालत से कहा है कि उनकी 'शुद्ध संपत्ति यानी नेट वर्थ शून्य है' और वह 'दिवालिया' हैं.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर अनुसार, तीन चीनी बैंक 700 मिलियन डॉलर यानी 5 हज़ार करोड़ रुपए से भी अधिक रक़म की वसूली के लिए अनिल अंबानी की कंपनी को ब्रितानी हाई कोर्ट में ले गए हैं. इस रकम में कर्ज़ पर लगा ब्याज़ भी शामिल है.
इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ़ चाइना लिमिटेड (आईसीबीसी), चाइना डिवेलपमेंट बैंक और एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक ऑफ़ चाइना ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) को कर्ज़ दिया था जो उन्हें वापस नहीं मिला. यह कंपनी इन दिनों दिवालिया घोषित किए जाने की प्रक्रिया में है.
बैंकों ने कोर्ट से अपील की कि वे अंबानी को लगभग 4,690 करोड़ की रकम कोर्ट में जमा करवाने का आदेश जारी करे. मगर जज ने तय किया अंबानी को अदालत में 100 मिलियन डॉलर यानी क़रीब 715 करोड़ रुपये जमा करवाने होंगे.
शुक्रवार को हुई कार्यवाही के दौरान अंबानी के बेटे अनमोल कोर्ट में उपस्थित रहे. चीनी बैंकों का दावा है कि इस कर्ज़ के लिए अंबानी ने निजी तौर पर गारंटी दी थी मगर इस दावे को अंबानी ग़लत बताते हैं.
केजरीवाल को 'हिंदू-मुसलमान' वीडियो के लिए नोटिस
दिल्ली विधानसभा चुनाव से एक दिन पहले चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक वीडियो के लिए नोटिस जारी किया है.
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, केजरीवाल को यह नोटिस 'हिंदू-मुसलमान' वाले उस वीडियो के लिए मिला है जिसके जिसे उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधने के लिए ट्वीट किया था.
चुनाव आयोग के अनुसार, वीडियो में 'सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने' और 'सामाजिक और धार्मिक समुदायों के बीच मौजूद दूरियों को बढ़ाने' की क्षमता है.
दिल्ली के सीएम को यह कारण बताओ नोटिस भारतीय जनता पार्टी की ओर से चार फ़रवरी को की गई शिकायत के आधार पर दिया गया है. बीजेपी का आरोप था कि इस वीडियो को ट्वीट करके केजरीवाल ने दो समुदायों के बीच तनाव पैदा करके वोटों का लाभ हासिल करने की कोशिश की है.
दिल्ली के सीएम को शनिवार शाम पांच बजे तक जवाब देने के लिए कहा गया है.
'प्रमोशन में आरक्षण राज्यों के लिए बाध्यकारी नहीं'
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार को आरक्षण देने के लिए निर्देश जारी नहीं किया जा सकता. कोर्ट का कहना है कि राज्य सरकार प्रमोशन में आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है.
नवभारत टाइम्स की ख़बर के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के उस आदेश को ख़ारिज किया है जिसमें उसने राज्य सरकार से कहा था कि प्रमोशन में आरक्षण देने के लिए क्वॉन्टिटेटिव डेटा इकट्ठा करे.
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा था कि इस डेटा से यह पता लगाया जाए कि एससी/एसटी श्रेणी के लोगों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व है या नहीं ताकि उसके आधार पर प्रमोशन में रिज़र्वेशन की व्यवस्था की जा सके.
इस फ़ैसले को राज्य सरकार और सामान्य वर्ग के आदेवकों ने चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी का मौलिक अधिकार नहीं है कि वह प्रमोशन में आरक्षण का दावा करे. सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा कि राज्य सरकार आरक्षण दे, इस बात के लिए कोर्ट आदेश नहीं दे सकता.
पांच लाख भारतीयों के क्रेडिट-डेबिट कार्ड ख़तरे में
डार्क वेब पर लगभग पांच लाख भारतीयों के क्रेडिट और डेबिट कार्ड से जुड़ी जानकारियां बिक रही हैं.
यह ख़बर दी है हिंदुस्तान टाइम्स ने. अख़बार के अनुसार, एक अंडरग्राउंड वेबसाइट पर यह डेटा बेचा जा रहा है. साइबर विश्लेषकों का कहना है कि यह वेबसाइट वित्ती धोखाधड़ी करती है.
उनका यह भी मानना है कि यह डेटा लीक पिछले 12 महीनों का सबसे गंभीर डेटा लीक है. इसमें कई संवेदनशील जानकारियां हैं जिनमें कार्ड की एक्यपायरी डेट, सीवीवी/सीवीसी कोड, कार्ड धारकों के नाम और कुछ के ईमेल अड्रेस तक हैं.
सिंगापुर की साइबर सिक्यॉरिटी कंपनी ग्रुप आईबी का कहना है कि डार्क वेब पर कुछ कार्डों के तो 14 से 16 नंबर भी उपलब्ध हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)