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ट्रेन में अभद्रता पर भी लग सकती है पाबंदी: प्रेस रिव्यू
नवभारत टाइम्स में छपी ख़बर के मुताबिक़, भारतीय रेलवे विशेषज्ञों से सलाह ले रही है कि क्या विमान में अभद्र व्यवहार करने के बाद पाबंदी लगाए जाने की तर्ज पर भारतीय रेलों में भी ऐसा करने पर पाबंदी लगाई जा सकती है.
अख़बार ने रेलवे सूत्रों के हवाले से लिखा है कि जिन लोगों पर एयरलाइंस ने बैन लगाया है, उन्हें ट्रेनों में सफ़र करने से भी रोका जा सकता है. ऐसे यात्रियों का डेटा एयरलाइंस से लिया जाएगा.
साथ ही अगर यात्री ट्वीट कर सहयात्री की शिकायत करते हैं और वो वो सही पाई जाती है तो उस आधार पर भी प्रतिबंध लग सकता है.
अख़बार के अनुसार पहली ग़लती पर कितना प्रतिबंध लगेगा और बार-बार अभद्रता का दोषी पाए जाने पर क्या कार्रवाई होगी, ये तय करने के लिए रेलव एक कमिटी या सिस्टम बनाएगी.
हाल ही में यूट्यूबर कुनाल कामरा के पत्रकार अर्नब गोस्वामी के साथ विमान में अभद्र व्यवहार करने के मामला सामने आया था.
इसके बाद कामरा को छह महीने के लिए विमान में यात्रा करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है.
भारत की पहली महिला पेशेवर फुटबॉल खिलाड़ी
भारत की महिला फुटबॉल टीम में फॉरवर्ड पोजिशन पर खेलने वालीं बाला देवी ने भारत की पहली महिला पेशेवर फुटबॉल खिलाड़ी बनने का मुक़ाम हासिल किया है.
29 वर्षीय बाला देवी ने स्कॉटिश क्लब रेंजर्स एफसी के साथ 18 महीने के करार पर हस्ताक्षर किए हैं.
अंग्रेजी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक़ मणिपुर पुलिस स्पोर्ट्स क्लब के लिए खेलने वालीं बाला देवी को रेंजर्स एफसी के लिए खेलने से पहले इंटरनेशनल क्लियरेंस से गुजरना होगा.
लेकिन बाला देवी ने अपने चयन पर खुशी जताते हुए कहा है, "मैं एमी मेकडॉनल्ड, कोचिंग स्टाफ़ और रेंजर्स एफसी के पूरी प्रबंधकीय टीम की शुक्रगुज़ार हूं कि उन्होंने मुझमें अपना विश्वास जताया. और ये बेंग्लुरू एफसी के बिना संभव नहीं हो पाता क्योंकि उनका इस सफलता में एक बड़ा योगदान है."
ट्रायल तक दी जा सकती है अग्रिम जमानत - सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अग्रिम जमानत दिए जाने की प्रक्रिया पर कहा है कि किसी व्यक्ति को किसी मामले में ट्रायल ख़त्म होने तक अग्रिम जमानत दी जा सकती है.
अंग्रेजी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़, सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने एक मत से अपना फ़ैसला सुनाते हुए कहा है कि गिरफ़्तारी से राहत किसी निश्चित समय तक नहीं बल्कि दोषी सिद्ध होने तक दी जानी चाहिए.
कोर्ट ने कहा है कि अग्रिम जमानत देना अदालत का विशेषाधिकार है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता.
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