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नागरिकता संशोधन क़ानून के कथित विरोध में आत्मदाह
- Author, शुरैह नियाज़ी
- पदनाम, भोपाल से, बीबीसी हिंदी के लिए
- प्रकाशित
मध्यप्रदेश के इंदौर में कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े एक व्यक्ति ने नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के कथित विरोध में अपने आप को आग के हवाले कर दिया. 75 साल के रमेश प्रजापति माकपा के नेता है. उन्हें गंभीर हालत में शुक्रवार को शहर के एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया.
पुलिस को उनकी जेब से सीएए और एनआरसी के विरोध के पर्चे मिले है. प्रजापति ने सीएए का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों के बीच जाकर उन्हें समर्थन दिया था.
उन्होंने अलग-अलग बस्तियों में भी सीएए के विरोध में जाकर लोगों से चर्चा की थी. फ़िलहाल इस मामले को लेकर पुलिस जांच में जुटी हुई है.
शहर के द्वारकापुरी थाना क्षेत्र में रहने वाले 75 वर्षीय रमेश प्रजापति के बारे में उनकी पार्टी के एक सदस्य ने बताया कि वे लंबे समय से कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य रहे हैं.
उन्होंने तुकोगंज थाना क्षेत्र के गीता भवन चौराहे पर ख़ुद को आग लगाई. वहां मौजूद लोगों ने पुलिस की मदद से रमेश प्रजापति को एमवाई अस्पताल में भर्ती करवाया.
प्रजापति ने अपने आप को आग क्यों लगाई, इस संबंध में पुलिस उनके परिजनों के बयान ले रही है.
तुकोगंज थाने के प्रभारी निर्मल कुमार ने बताया, "आग लगाने के बाद इन्हें अस्पताल लाया गया था और उनकी हालत ऐसी नहीं थी कि उनके बयान लिए जा सकें. उनके पास मिले एक पर्चे में सीएए के विरोध की बातें लिखी है. अभी यह कहना मुश्किल है कि उन्होंने जो क़दम उठाया, उसकी वजह क्या थी."
वहीं पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें भी नहीं पता कि उनके इस क़दम के पीछे क्या मंशा थी.
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के ज़िला सचिव छोटेलाल मोती सिंह सरावत ने कहा, "वो पार्टी से जुड़े हुए थे. लेकिन हमें भी नहीं पता कि उनके आत्मदाह करने की वजह क्या थी."
उन्होंने आगे बताया कि शहर में जारी सीएए के विरोध प्रदर्शन में उन्होंने कई जगह हिस्सा लिया.
रमेश प्रजापति के पास से टाइप किया हुए कागज़ मिला है जिसमें लाल सलाम, इंक़लाब ज़िंदाबाद और जय भीम लिखा हुआ है. हेडिंग में 'भारतीय धर्म निरपेक्ष संविधान पर हमला' लिखा गया है.
वही इस मामले में उनका परिवार कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं है. बताया जा रहा है कि परिवार के लोग अलग विचारधारा को मानते हैं.
बेटे दीपक प्रजापति ने इतना ज़रूर कहा, "इस मामले को राजनीतिक नज़र से न देखा जाए."
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