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शिवसेना-कांग्रेस करेंगी संविधान दिवस का विरोध: पाँच बड़ी ख़बरें
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आज 26 नवंबर को संविधान दिवस के मौक़े पर संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करने जा रहे हैं.
लेकिन महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक उठापटक के बीच शिवसेना और कांग्रेस ने इस कार्यक्रम का विरोध करने का फ़ैसला किया है.
इसके साथ ही कई विपक्षी दलों ने ऐलान किया है कि बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस और एनसीपी नेता अजित पवार को नाटकीय ढंग से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने के मुद्दे पर वे संसद भवन परिसर में स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने भी विरोध प्रदर्शन करेंगे.
जेएनयू प्रशासन ने फिर कम की फीस
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रशासन की ओर से बनाई गई एक उच्च स्तरीय समिति ने जेएनयू छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद बढ़ाई गई फीस को कम करने का ऐलान किया है.
इस समिति ने ईमेल से प्राप्त छात्रों के प्रतिनिधियों के सुझावों को ध्यान में रखते हुए कुछ मदों में कमी लाने की सूचना दी है.
जेएनयू छात्रों ने बीते दिनों फीस वृद्धि को लेकर दिल्ली की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया था.
वीगर मुस्लिम कैंपों पर चीन घेरे में
ब्रितानी सरकार ने चीनी सरकार से आग्रह किया है कि वह संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधियों को तत्काल प्रभाव से शिनजियांग प्रांत में चलाए जा रहे अति सुरक्षित कैंपों में जाने की अनुमति दे.
ब्रितानी सरकार ने ये कदम इन कैंपों से जुड़े तथ्य मीडिया में लीक होने के बाद उठाया है.
वहीं, ब्रिटेन में तैनात चीनी राजदूत लिउ श्याओमिंग ने इस लीक को फेक न्यूज़ बताया है.
बीते काफ़ी समय से शिनजियांग प्रांत में स्थित कैंपों को लेकर विवाद जारी है.
चीनी सरकार का दावा है कि इन कैंपों का मकसद चरमपंथ को रोकना है.
वहीं, इन कैंपों पर आई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इन कैंपों में लगभग दस लाख वीगर मुसलमानों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के रखा गया है और यहां पर मानवाधिकारों को उल्लंघन हो रहा है.
सूडान में लैंगिक हिंसा के ख़िलाफ़ उतरी महिलाएं
सूडान में सैकड़ों महिलाओं ने लैंगिंक हिंसा के ख़िलाफ विरोध प्रदर्शन किया है.
सूडान के इतिहास में बीते कुछ दशकों में ऐसा पहली बार हुआ है.
इन महिलाओं ने हाथों में बैनर पकड़े हुए थे. वहीं दक्षिण अफ्रीका में राष्ट्रपति सिएरिल रामापोसा ने पुरुषों से अपील की है कि वो औरतों के प्रति अपने नज़रिए को बदलें.
दक्षिण अफ्रीका पूरी दुनिया में औरतों के लिए सबसे ख़तरनाक देश है.
बीते साल देश में करीब 2700 महिलाओं की पुरुषों ने हत्या की थी और हर रोज़ सैकड़ों बलात्कार के मामले दर्ज हो रहे हैं.
यौन उत्पीड़न मामले में पादरियों को मिली सज़ा
अर्जेंटीना में एक अदालत ने दो रोमन कैथलिक पादरियों को 40 से ज़्यादा साल की सज़ा सुनाई है. ये सज़ा चर्च स्कूल के एक बधिर बच्चे के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में सुनाई गई है.
होराशियो कोरबाचो और निकोला कोर्रादी को लगातार 12 साल तक बलात्कार और उत्पीड़न करने का दोषी पाया गया है.
जब ये सज़ा सुनाई गई, तब कोर्ट में पीड़ित भी मौजूद थे. पोप फ्रांसिस भी अर्जेंटीना से हैं और साल 2014 में उन्हें इस बारे में एक ख़त भेजा गया था.
अर्जेंटीना में काफी लोगों का आरोप है कि इस मामले पर एक्शन लेने में चर्च ने सुस्ती दिखाई है.
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