छत्तीसगढ़ के चर्चित इब्राहिम-अंजलि मामले में नया विवाद

    • Author, आलोक प्रकाश पुतुल
    • पदनाम, रायपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
  • प्रकाशित

छत्तीसगढ़ में चर्चित इब्राहिम-अंजली प्रेम विवाह मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी अंजलि जैन की राजधानी रायपुर के सखी सेंटर से रिहाई फ़िलहाल टल गई है.

इस बीच अंजलि जैन ने अपनी रिहाई की मांग को लेकर आज से आमरण अनशन शुरू कर दिया है.

इधर, अंजलि जैन के वकीलों ने पुलिस पर अंजलि जैन को कथित रूप से बंधक बनाकर रखने का आरोप लगाया है.

राज्य सरकार ने अंजलि की रिहाई के लिए रविवार की दोपहर का समय तय किया था. लेकिन सोमवार को भी अंजलि की रिहाई नहीं हो सकी.

ज़िले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शेख आरिफ़ हुसैन ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि हाईकोर्ट ने अंजलि जैन की रिहाई से 24 घंटे पहले उनके पिता अशोक जैन और उनके पति आर्यन आर्य ऊर्फ मोहम्मद इब्राहिम सिद्दीक़ी को फ़ोन या दूसरे माध्यम से सूचना देने के निर्देश दिए थे. लेकिन उनके पिता और परिजनों ने अपने सारे फ़ोन बंद कर रखे हैं.

आमरण अनशन

शेख आरिफ़ हुसैन ने कहा, "हमने उनके घर पर नोटिस चस्पा किया है. इसके अलावा अख़बार में इश्तेहार देने की हमारी योजना है. हम इस मामले में हाईकोर्ट के दिशा-निर्देश का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित करना चाहते हैं."

लेकिन अंजलि जैन की वकील शमीम रहमान और प्रियंका शुक्ला ने आरोप लगाया कि ज़िले की पुलिस अंजलि को सखी सेंटर से जाने नहीं दे रही है.

प्रियंका शुक्ला ने कहा, "अंजलि को ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से पुलिस ने सखी सेंटर में बंधक बना कर रखा है. ये पूरी तरह से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना है. अगर अंजलि की शीघ्र रिहाई नहीं होती तो हम इस मामले में हाईकोर्ट में अवमानना का मामला दायर करेंगे."

इधर, अपनी रिहाई की मांग को लेकर अंजलि जैन ने सखी सेंटर में आमरण अनशन शुरू कर दिया है.

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

अंजलि ने कहा कि जब तक उन्हें अपने पति आर्यन आर्य ऊर्फ मोहम्मद इब्राहिम सिद्दीक़ी के साथ सखी सेंटर से जाने की इजाजत नहीं दी जाती, तब तक वे अनशन पर रहेंगी.

अंजलि जैन ने कहा, "छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश की मनमानी व्याख्या की जा रही है. मेरे पिता को सूचना देने के जो भी तरीक़े थे, वे अपनाये जा चुके हैं. अगर मेरे पिता कोई सूचना नहीं ग्रहण करना चाहते तो आख़िर मेरी रिहाई को कितने दिनों तक टाला जाएगा."

उन्होंने कहा कि वे पिछले नौ महीने से बंदियों की तरह रह रही हैं और अब, जबकि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उन्हें मर्ज़ी की जगह और मर्ज़ी के व्यक्ति के साथ रहने का आदेश दिया है, तब पुलिस उन्हें अवैध तरीक़े से बंधक बना कर रखना चाहती है.

स्थानीय अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक की कार्रवाइयों में उलझी अंजलि जैन पिछले आठ महीने से रायपुर के सरकारी सखी सेंटर में रह रही थीं.

हाईकोर्ट का आदेश

छत्तीसगढ़ के धमतरी की रहने वाली अंजली जैन की छोटी बहन की चिट्ठी के आधार पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था.

इसके अलावा अंजलि के परिजनों की ओर से भी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएँ दायर की गई थी. अंजलि जैन ने अपनी ओर से भी हाईकोर्ट को एक चिट्ठी लिखी थी.

इन सब पर सुनवाई के बाद शुक्रवार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अंजली जैन को अपनी मर्ज़ी के व्यक्ति के साथ और अपनी मर्ज़ी की जगह में रहने का फै़सला सुनाया था.

अदालत ने ज़िले के पुलिस अधीक्षक के समक्ष अंजलि जैन को सखी सेंटर से मुक्त कराए जाने के निर्देश दिए थे.

अदालत ने अंजलि की रिहाई से 24 घंटे पहले उनके पिता अशोक जैन और पति आर्यन आर्य ऊर्फ मोहम्मद इब्राहिम सिद्दीक़ी को फोन या दूसरे माध्यम से सूचित करने का निर्देश दिया था.

क्या है मामला

सरकारी नोटिस के बाद रविवार को अंजलि की रिहाई के लिए उनके पति आर्यन आर्य सखी सेंटर में ज़रूर उपस्थित हुए.

लेकिन अंजलि के पिता या दूसरे परिजन वहां नहीं पहुंचे. इस दौरान भारतीय जनता पार्टी के कुछ पदाधिकारियों ने अंजलि के पिता की अनुपस्थिति का हवाला दे कर रिहाई का विरोध किया.

छत्तीसगढ़ के धमतरी के रहने वाले 33 वर्षीय मोहम्मद इब्राहिम सिद्दीक़ी और 23 वर्षीय अंजलि जैन ने दो साल की जान-पहचान के बाद 25 फ़रवरी 2018 को रायपुर के आर्य मंदिर में शादी की थी.

इब्राहिम का दावा है कि उन्होंने शादी से पहले हिंदू धर्म अपना लिया था. इसके बाद उन्होंने अपना नाम आर्यन आर्य रखा था.

मोहम्मद इब्राहिम सिद्दीकी उर्फ़ आर्यन आर्य के अनुसार, "शादी की ख़बर जैसे ही मेरी पत्नी अंजलि के परिजनों को मिली, उन्होंने मेरी पत्नी को घर में क़ैद कर लिया. मैंने बहुत कोशिश की कि किसी भी तरह अंजलि से मेरी मुलाक़ात हो लेकिन यह संभव नहीं हो पाया."

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

इसके बाद इब्राहिम ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए न्यायालय से अपनी पत्नी अंजलि जैन को वापस किए जाने की गुहार लगाई.

लेकिन छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अंजलि जैन को सोच-विचार के लिए समय देते हुये छात्रावास में या माता-पिता के साथ रहने का आदेश पारित करते हुए मामले को ख़ारिज कर दिया.

अंजलि जैन ने माता-पिता के साथ रहने के बजाय छात्रावास में रहना तय किया था. इसके बाद इब्राहिम ने हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.

पिछले साल अगस्त में अंजलि को सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया, जहां अंजलि ने अपने माता-पिता के साथ रहने की इच्छा जताई.

अंजलि के अदालत के बयान के बाद मान लिया गया कि मामले का पटाक्षेप हो गया है.

मुक्ति के लिए गुहार

लेकिन फ़रवरी में इस मामले में फिर नया मोड़ आया. अंजलि का दावा है कि घर लौटने के बाद उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा.

उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पिता ने उन्हें ऐसी दवाइयां खिलानी शुरू कर दीं, जिससे वे लगातार बीमार रहने लगीं.

अंजलि के अनुसार उन्होंने किसी तरह राज्य के पुलिस महानिदेशक का नंबर हासिल किया और फिर उन्हें फ़ोन कर पिता की प्रताड़ना से मुक्ति के लिए गुहार लगाई, उनसे घर से छुड़ाने का अनुरोध किया.

इसके बाद पुलिस ने उन्हें घर से मुक्त कराया और रायपुर के सखी सेंटर में उन्हें रखा गया. जहां वे पिछले नौ महीने से रह रही थी.

इस बीच सखी सेंटर में भी अंजलि ने परिवारजनों, हिंदू संगठनों और अधिकारियों पर खुद को प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया.

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